Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

चिकित्सा के पेशे में पर्दे के पीछे वाले विशेषज्ञ

रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग टेक्नोलॉजिस्ट

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

एमबीबीएस के अलावा भी चिकित्सा क्षेत्र में कैरियर की कई अच्छी संभावनाएं हैं। मसलन अगर आप तकनीकी दक्षता से रोगों के निदान में योगदान देना चाहते हैं, तो रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग टेक्नोलॉजी में बीएससी करके हेल्थ पेशा अपनाना बेहतरीन विकल्प है।

जब किसी रोग का सही निदान होता है, तभी उसका सही उपचार संभव हो पाता है- और इस निदान की प्रक्रिया में पर्दे के पीछे एक ऐसा विशेषज्ञ सक्रिय रहता है, जो आधुनिक चिकित्सा का तकनीकी स्तंभ है। यही विशेषज्ञ होता है रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग टेक्नोलॉजिस्ट (आरआईटी) जो अत्याधुनिक मशीनों से शरीर के आंतरिक अंगों की सटीक तस्वीरें लेकर डॉक्टर को सही निदान में सहायता करता है। इसलिए इन्हें चिकित्सा जगत के इनविजिबल डायग्नोस्टीशियंस यानी पर्दे के पीछे के सच्चे हीरो कहा जाता है।

पेशेवर के तौर पर पहचान

रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग टेक्नोलॉजिस्ट एक प्रशिक्षित टेक्नो-क्लिनिकल प्रोफेशनल होता है, जो विभिन्न रेडियोलॉजिकल उपकरणों जैसे एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राफी आदि का संचालन करता है। ये विशेषज्ञ चिकित्सकों की सहायता से रोग की पहचान, चोट का मूल्यांकन और उपचार की प्रगति की निगरानी करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

प्रमुख जिम्मेदारियां

एक्स-रे, सीटी, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग प्रक्रियाओं का संचालन, रेडिएशन सेफ्टी और क्वालिटी सुनिश्चित करना, उपकरणों की देखभाल, कैलिब्रेशन व ट्रबलशूटिंग, मरीज की स्थिति के अनुसार उचित पोजिशनिंग और तैयारी, इमरजेंसी एवं ट्रॉमा के मामलों में तत्काल इमेजिंग सहायता, रिपोर्टिंग में चिकित्सक को तकनीकी सहयोग, संक्रमण नियंत्रण और मरीज की सुरक्षा का ध्यान।

कोर्स की योग्यता

इस कोर्स में प्रवेश के लिए छात्र को 12वीं (फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायलोजी) विषयों के साथ न्यूनतम 50–55 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। प्रवेश एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से किया जाता है।

कोर्स की अवधि

बी.एससी. रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग टेक्नोलॉजी (बीएमआरआईटी) एक 4 वर्षीय डिग्री कार्यक्रम है- जिसमें 3 वर्ष का अकादमिक प्रशिक्षण व 1 वर्ष की अनिवार्य क्लीनिकल इंटर्नशिप शामिल है। इस दौरान विद्यार्थियों को रेडियोलॉजी विभाग, आईसीयू, आपातकालीन इकाइयों और सुपर-स्पेशियलिटी यूनिट्स में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

इंटर्नशिप में क्या सिखाया जाता है?

एक वर्षीय क्लिनिकल इंटर्नशिप के दौरान छात्र वास्तविक तौर पर अस्पतालों में कार्य करते हुए निम्नलिखित प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं : 🔹 एक्स-रे, सीटी, एमआरआई, डीईएक्सए, मेमोग्राफी, फ्लोरोस्कोपी आदि उपकरणों का संचालन, अल्ट्रासाउंड एवं डॉप्लर तकनीक से जुड़ी मूलभूत बातें, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी प्रक्रियाओं में तकनीकी सहायता, रेडिएशन सुरक्षा एवं क्वालिटी कंट्रोल उपाय, पीएसीएस (पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम्स) का प्रबंधन, मरीजों के साथ संवाद, पोजिशनिंग और सुरक्षा संबंधी सावधानियां, आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय क्षमता और टीमवर्क। इस इंटर्नशिप से विद्यार्थी एक सक्षम, व्यावहारिक और अस्पताल में काम करने के योग्य रेडियोलॉजी प्रोफेशनल के रूप में विकसित होते हैं।

प्रमुख संस्थान

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भोपाल,🏛 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, जोधपुर ,🏛 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, देवघर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गोरखपुर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, बीबीनगर, 🏛 स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, चंडीगढ़, जवाहरलाल स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुडुचेरी, संजय गांधी स्नातकोत्तर, आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ, पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, रोहतक, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, चंडीगढ़, जामिया हमदर्द, नई दिल्ली।

रोजगार के अवसर

मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स, डायग्नोस्टिक सेंटर / रेडियोलॉजी लैब्स, सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय, आपातकालीन एवं ट्रॉमा केयर इकाइयां, अनुसंधान एवं शिक्षा संस्थान, मेडिकल इक्विपमेंट कंपनियां, मेडिकल इमेजिंग इंडस्ट्री (पीएसीएस, क्यूए, सेल्स और एप्लीकेशन स्पेशलिस्ट), सशस्त्र बल, रेलवे एवं इएसआईसी अस्पताल, विदेशों में हेल्थकेयर सेक्टर के विभिन्न जॉब।

संभावित पदनाम

रेडियोग्राफर / एक्स-रे टेक्नॉलोजिस्ट, सीटी / एमआरआई टेक्नॉलोजिस्ट, मेमोग्राफी / डीईएक्सए ऑपरेटर, इंटर्वेंशन रेडियोलॉजी टेक्नॉलोजिस्ट, पीएसीएस मैनेजर / एप्लीकेशन स्पेशलिस्ट, रेडियोलोजी क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर, रेडियोलोजी सेफ्टी ऑफिसर, टीचिंग एंड रिसर्च फैकल्टी।

वेतनमान

फ्रेशर : 25,000– 35,000 रुपये प्रति माह, सरकारी अस्पतालों में प्रारंभिक वेतन: लगभग 60,000 रुपये प्रति माह, अनुभवी (3–5 वर्ष) : 50,000 – 80,000 रुपये, सीनियर/ सुपर स्पेशियलिटी : 1,00,000 रुपये से ज्यादा प्रति माह, विदेश में अवसर : 2–4 लाख रुपये प्रतिमाह तक।

विज्ञान, तकनीक और मानव सेवा

यदि आप बिना एमबीबीएस किए चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी दक्षता और मरीजों के निदान में प्रत्यक्ष योगदान देना चाहते हैं, तो रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग टेक्नोलॉजी में बीएससी आपके लिए एक उत्कृष्ट और सम्मानजनक कैरियर विकल्प है। यह क्षेत्र विज्ञान, तकनीक और मानव सेवा- तीनों का अद्भुत संगम है। रेडियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट न केवल मशीनों को चलाते हैं, बल्कि हर निदान की सटीकता और हर जीवन की सुरक्षा के संरक्षक होते हैं। इसीलिए इन्हें सही मायनों में कहा जाता है- द हीरोज बिहाइंड एवरी डायग्नोसिस यानी ‘निदान के सच्चे महारथी’।

Advertisement
×