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हिट की गारंटी बने फिल्मों के बैक स्टेज ड्रामे

सिनेमा के इतिहास में जिस फिल्म के साथ जितना बड़ा ड्रामा जुड़ा है, वह उतनी ही ज्यादा कामयाब हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब किसी फिल्म की चर्चा जरूरत से ज्यादा होती है, तो दर्शकों में उसे देखने की जबर्दस्त...

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सिनेमा के इतिहास में जिस फिल्म के साथ जितना बड़ा ड्रामा जुड़ा है, वह उतनी ही ज्यादा कामयाब हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब किसी फिल्म की चर्चा जरूरत से ज्यादा होती है, तो दर्शकों में उसे देखने की जबर्दस्त जिज्ञासा होती है। ऐसे में बॉक्स ऑफिस पर वह हिट हो जाती है।

फिल्में सिर्फ पर्दे पर चलने वाली कहानियां नहीं होतीं, असली कहानियां तो अकसर पर्दे के पीछे लिखी जाती हैं- स्टार के मूड, डायरेक्टर की महत्वाकांक्षाएं, प्रोड्यूसर का दबाव मिलकर ऐसा कॉकटेल बनाते हैं, जिससे फिल्म की किस्मत ही बदल जाती है। बॉलीवुड में कहा जाता है, जहां ड्रामा होता है, वहीं चर्चा होती है, जहां चर्चा होती है, वहीं हाउसफुल का बोर्ड टंगता है। कुछ प्रमुख कामयाब फिल्मों के मशहूर बैक स्टेज ड्रामों पर एक नजर -

शोले : क्लासिक बनने की कहानी

भला कौन जानता था कि रामगढ़ की कहानी बनाने में खुद रामगढ़ के सेट को भी दर्द सहना पड़ेगा। शोले के बैक स्टेज किस्से फिल्मी कहानी जैसे हैं। जय की भूमिका में अमिताभ बच्चन ने असली कांच पर स्टंट किये और चोट खायी। डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने एक-एक सीन को 20-20, 25-25 बार रिटेक तक पहुंचाया था। शूटिंग के दौरान धूल, गर्मी और भारी भरकम सेट पर काम करते-करते कलाकार थककर चूर हो जाते। हर कलाकार सोचता था, कब फिल्म बने और उन्हें छुट्टी मिले। लेकिन यही संघर्ष कथा, इसकी कामयाबी की कथा बन गई।

कभी खुशी, कभी गम : बड़े स्टार, बड़ी इगो

जब एक ही फिल्म में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, जया भादुड़ी, ऋतिक रोशन, काजोल और करीना कपूर हों, तो कौन भला किसकी सुने। सभी बड़े स्टार और सभी की बड़ी इगो। शूटिंग के दौरान रोज ड्रामे पर्दे से टपकते रहे। कभी खबर आयी कि शाहरुख नाराज हैं , कभी यह कि करीना की तबीयत खराब हो गई। लेकिन ये खबरें अफवाहें साबित हुईं। करण जौहर की यह फिल्म ब्लॉक बस्टर साबित हुई।

देवदास: भंसाली की परफेक्शन

संजय लीला भंसाली की फिल्मों में ड्रामा कैमरे के पीछे भी होता है और ‘देवदास’ के समय यही हुआ। ऐश्वर्या राय के लहंगे बेहद वजनी थे। रोशनी, महल, आंसू, चिल्लाहटें और कट की भंसाली की आवाज। ‘देवदास’ प्रतिष्ठित फिल्मों में एक साबित हुई।

बर्फी: सन्नाटे के पीछे का शोर

रणवीर कपूर, प्रियंका चोपड़ा और इलियाना। ‘बर्फी’ जितनी साइलैंट फिल्म है, बैक स्टेज ड्रामा उतना ही शोरगुल पूर्ण। कैमरा बंद होने के बाद भी कलाकार, किरदार से बाहर आने को घंटों तैयार नहीं होते थे। आखिरकार ‘बर्फी’ कामयाब व कल्ट फिल्म बन गई।

बाजीराव मस्तानी: प्यार, प्रतिद्वंदिता

यह फिल्म तो सचमुच बैक स्टेज ड्रामों की खान थी। सिर्फ ऑन स्क्रीन ही नहीं ऑफ स्क्रीन भी इस फिल्म के मूवमेंट ऐसे थे, जो दांवपेच से कम नहीं लगते थे। दीपिका-प्रियंका ने डांस ‘पिंगा’ की रिहर्सल में सेट को मानो जंग के मैदान में बदल दिया था।सारा ड्रामा अंततः फिल्म को बड़ी कामयाबी दिलाने का जरिया बना। जिस फिल्म के साथ जितना बड़ा ड्रामा जुड़ा है, वह उतनी ही ज्यादा कामयाब हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब किसी फिल्म की चर्चा जरूरत से ज्यादा होती है, तो दर्शकों में उसे देखने की जबर्दस्त जिज्ञासा होती है। -इ.रि.सें.

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