आजकल महिलाएं नौकरी या बिजनेस और घर-गृहस्थी की दोहरी जिम्मेदारी संभालती हैं। व्यस्तता के चलते उनकी खुद की सेहत की अनदेखी हो जाती है। खासकर बढ़ती उम्र में उन्हें हार्मोनल बदलावों, हड्डियों की कमजोरी और तनाव से जुड़ी दिक्कतें आती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, पोषक तत्वों से भरपूर कुछ ‘सुपरफूड्स’ इन समस्याओं से बचाव व समाधान में मददगार हैं।
आज के दौर में महिलाएं एक साथ कैरियर और घर की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। इस भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य को बनाए रखना बड़ी चुनौती बन चुका है। अध्ययनों ने साबित किया है कि महिलाओं का शरीर पुरुषों की तुलना में हार्मोनल बदलावों, हड्डियों की कमजोरी और तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। इसी वजह से चिकित्सा विशेषज्ञों ने ‘भोजन ही औषधि है’ के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए कुछ ‘सुपरफूड्स’ को चिन्हित किया है।
आंतों व मानसिक सेहत के रक्षक : फर्मेंटेड फूड
एक न्यूट्रीशन पोषण सर्वे के अनुसार, महिलाओं में तनाव, एंग्जायटी और पाचन संबंधी समस्याएं सबसे तेजी से बढ़ी हैं। नए न्यूरो-गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिकल अध्ययनों ने ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ की पुष्टि की है। विज्ञान कहता है कि ग्रीक योगर्ट, किम्ची, केफिर और चुकंदर की कांजी जैसे खाद्य पदार्थ प्रोबायोटिक्स से भरपूर होते हैं। ये आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जिससे पाचन सुधरता है व सेरोटोनिन (हैप्पी हार्मोन) बढ़ता है।
हार्मोनल संतुलन : अलसी और कद्दू के बीज
महिलाओं को पीएमएस , पीसीओडी और मेनोपॉज जैसी हार्मोनल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ‘न्यूट्रीशनल आउटलुक 2025’ की रिपोर्ट में प्रकाशित शोध के अनुसार अलसी के बीजों में ‘लिगनेन’ पाया जाता है, जो शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को संतुलित करता है। वहीं, कद्दू के बीजों में भरपूर मैग्नीशियम, जिंक और ट्रिप्टोफैन होता है। यह मेनोपॉज के दौरान ‘हॉट फ्लैशेस’, चिड़चिड़ेपन और ऐंठन से राहत दिलाता है।
एंटीऑक्सीडेंट व मेमोरी बूस्टर : जामुन और बेरीज
ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, जो महिलाएं अपनी डाइट में गहरे रंग के फल शामिल करती हैं, उनमें बढ़ती उम्र के साथ ब्रेन फॉग और याददाश्त कमजोरी की समस्या कम होती है। दरअसल जामुन और ब्लूबेरीज में ‘एंथोसायनिन’ और ‘फ्लेवोनोइड्स’ नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। ये कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं, झुर्रियां रोकते हैं और हार्ट अटैक के खतरे को कम करते हैं।
हड्डियों के लिए लाभकारी सहजन
एक शोध के अनुसार, 85 फीसदी भारतीय महिलाओं में विटामिन-डी और कैल्शियम की भारी कमी है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ रहा है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मोरिंगा (सहजन की पत्तियां) सबसे पोषक तत्वों से भरपूर पौधों में शामिल है। इसमें दूध की तुलना में कई गुना अधिक कैल्शियम और प्रचुर मात्रा में आयरन होता है। इसी तरह केल और पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां विटामिन-के और फोलेट से भरपूर होती हैं। विटामिन-के कैल्शियम को हड्डियों में सोखने में मदद करता है, जिससे जोड़ों का दर्द दूर होता है।
ब्रेस्ट व सर्विकल कैंसर : ब्रोकली
कैंसर रिसर्च यूके और वैश्विक ऑन्कोलॉजी सर्वे की नवीनतम रिपोर्टों में महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्विकल कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई है। शोध बताते हैं कि खान-पान में बदलाव करके इस खतरे को टाला जा सकता है। ब्रोकली, बंदगोभी और फूलगोभी जैसी क्रूसिफेरस सब्जियों में ‘सल्फोराफेन’ और ‘इंडोल-3- कॉर्बिनोल’ नामक तत्व पाए जाते हैं। ये यौगिक शरीर में कैंसर पैदा करने वाले विषाक्त पदार्थों को नष्ट करते हैं। पपीते में मौजूद लाइकोपीन भी इसमें मददगार साबित हुआ।
हेल्दी हार्ट और त्वचा : एवोकैडो
महिलाओं में 40 की उम्र के बाद दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता है। इसके लिए हेल्दी फैट्स का सेवन जरूरी है। वैज्ञानिकों के अनुसार एवोकैडो और साल्मन मछली (या शाकाहारियों के लिए चिया सीड्स और अखरोट) में ओमेगा-3 फैटी एसिड और मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाता है। चेहरे पर निखार लाता है।
एनीमिया से मुक्ति: चुकंदर और क्विनोआ
कामकाजी महिलाओं में थकान और हीमोग्लोबिन की कमी हो सकती है। इनमें चुकंदर लाभदायक है। शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन बढ़ाता है, जिससे नसों में रक्त प्रवाह बेहतर होता है। क्विनोआ प्रोटीन अनाज है, जिसमें सभी नौ आवश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं। यह ऊर्जा स्तर को तुरंत बढ़ाता है, मांसपेशियों की मरम्मत करता है और मासिक धर्म के दौरान कमजोरी दूर करता है।
सही तरीका और समय जरूरी
अध्ययनों से साफ है कि कोई भी एक सुपरफूड जादुई गोली नहीं है। यदि आप अत्यधिक चीनी, प्रोसेस्ड फूड या तला-भुना खाती हैं, तो सिर्फ सुपरफूड खाने से लाभ नहीं होगा। इसलिए इन पोषक तत्वों को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और गहरी नींद के साथ लें। यानी सुबह उठते ही गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच भीगे हुए चिया सीड्स या अलसी के बीज लें। नाश्ते में क्विनोआ उपमा या मोरिंगा पाउडर मिला हुआ पराठा/चीला लें। लंच में दाल, रोटी के साथ उबली ब्रोकली या पालक की सब्जी और चुकंदर का सलाद लें। शाम के नाश्ते में एक मुट्ठी कद्दू बीज, बादाम और जामुन या बेरीज लें। डिनर में हल्का भोजन जैसे सूप, ग्रिल्ड सब्जियां या पनीर/मछली ले सकते हैं।
- कोलकाता स्थित डायटिशियन पिंकी गोयल से बातचीत पर आधारित।

