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रफ्तार पूरी, जिम्मेदारी अधूरी : केएमपी बना खतरों का कॉरिडोर!

कुंडली से मानेसर तक एक्सप्रेस-वे बेहाल, ट्रकों का दबाव, हर मोड़ पर खतरा

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हरियाणा की औद्योगिक धमनियों को जोड़ने के लिए बना कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे आज खुद सवालों के कठघरे में खड़ा है। कभी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज रफ्तार का प्रतीक बताया गया यह मार्ग अब जगह-जगह उखड़ी सड़क, गड्ढों, अधूरी सुविधाओं और टोल वसूली के विवादों में उलझा है। हादसों की बढ़ती घटनाएं और प्रशासनिक खींचतान ने इसे ‘हाई-स्पीड कॉरिडोर’ से ज्यादा ‘हाई-रिस्क जोन' बना दिया है।सबसे खराब हालात कुंडली से मानेसर तक के हिस्से के हैं। स्थानीय वाहन चालकों का कहना है कि नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत होती तो हालात इतने गंभीर नहीं होते। मानेसर से पलवल तक के हिस्से में मरम्मत का काम हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम द्वारा अंतिम चरण में बताया जा रहा है। लेकिन जब तक पूरे मार्ग की स्थिति एकसमान नहीं सुधरती, राहत अधूरी रहेगी।

केएमपी एक्सप्रेस-वे हरियाणा की औद्योगिक और लॉजिस्टिक रीढ़ है। इसकी बदहाली आर्थिक दक्षता और सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा है। सरकार सख्त रुख दिखा रही है, लेकिन असली परीक्षा जमीन पर परिणाम देने की है।

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केएमपी एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के पहले कार्यकाल में हुआ था। निर्माण कार्य पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा की कंपनी द्वारा किया गया। मानेसर से कुंडली तक का पैच अभी भी उसी कंपनी के पास है और टोल वसूली का अधिकार भी उसके पास है। ऐसे में मरम्मत की जिम्मेदारी भी उसी की बनती है। लेकिन सड़क की हालत बिगड़ने के बावजूद मरम्मत कार्य शुरू न होना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मरम्मत प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार कंपनी की सुस्ती से नाराज है और एचएसआईआईडीसी स्वयं टेंडर जारी कर मरम्मत करवाने तथा खर्च संबंधित कंपनी से वसूलने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

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हादसों की बढ़ती रफ्तार

मानेसर, सोहना, बहादुरगढ़ और कुंडली के औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह मार्ग दिन-रात ट्रकों से भरा रहता है। सड़क की खराब सतह, किनारों पर अपर्याप्त संकेतक और रात में सीमित रोशनी हादसों को न्योता दे रहे हैं। कई स्थानों पर अचानक ब्रेक लगने या वाहन उछलने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब टोल की वसूली बिना चूक के हो सकती है, तो रखरखाव में ढिलाई क्यों बरती जा रही है।

रेस्ट एरिया का वादा हवा में

केएमपी पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव स्थिति को और गंभीर बनाता है। पूरे मार्ग पर अधिकृत रेस्ट एरिया विकसित नहीं हो पाया है। हालत यह है कि ट्रक चालक एक्सप्रेस-वे किनारे ही वाहन खड़े कर लेते हैं। न शौचालय, न भोजनालय, न सुरक्षित पार्किंग। यह मजबूरी कई बार बड़े हादसों का कारण बनती है, क्योंकि तेज रफ्तार वाहन अचानक खड़े ट्रकों से टकरा जाते हैं।

अवैध ढाबों का जाल, सुरक्षा पर सवाल

सुविधाओं की कमी का फायदा उठाकर करीब दर्जनभर स्थानों पर खेतों में अस्थायी ढाबे और चाय की दुकानें खुल गई हैं। प्रशासन इन्हें हटाता है, लेकिन कुछ समय बाद ये फिर सक्रिय हो जाते हैं। इन ढाबों के पास अव्यवस्थित पार्किंग और अपर्याप्त रोशनी रात के समय जोखिम कई गुना बढ़ा देती है।

जसौरखेड़ी एंट्री : दूरी कम, टोल ज्यादा

बहादुरगढ़ के जसौरखेड़ी के पास से दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे की शुरुआत होती है। यहां केएमपी के नीचे एंट्री-एग्जिट प्वाइंट तो है, लेकिन एंट्री पर्ची या डिजिटल रिकॉर्ड की समुचित व्यवस्था नहीं। परिणाम यह कि जसौरखेड़ी से चढ़कर बहादुरगढ़ उतरने वाले वाहन चालकों से कुंडली से बहादुरगढ़ तक का पूरा टोल वसूला जाता है। वास्तविक दूरी कम होने के बावजूद छोटे गैर-व्यावसायिक वाहन चालकों को लगभग 100 रुपये अतिरिक्त देने पड़ते हैं। रोजाना हजारों वाहनों के गुजरने से यह अतिरिक्त वसूली करोड़ों में पहुंचने का अनुमान है। यदि फास्टैग आधारित सटीक दूरी निर्धारण लागू किया जाए, तो यह विवाद खत्म हो सकता है।

कोट्स

मानेसर से कुंडली तक हिस्से की मरम्मत जल्द शुरू कराई जाएगी। अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। मानेसर से पलवल तक का मरम्मत कार्य अंतिम चरण में है और इसे शीघ्र पूरा कर वाहन चालकों को राहत दी जाएगी।

-राव नरबीर सिंह, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री, हरियाणा

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