आज का युवा यदि देश के लिए कुछ अलग करना चाहता है, तो उसके सामने मौजूद कई विकल्पों में अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक में कैरियर भी शामिल है। दरअसल, भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार विस्तार कर रहा है। उपग्रह, लांच व्हीकल, पृथ्वी अवलोकन, अंतरिक्ष विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे क्षेत्रों में देश की गतिविधियां बढ़ रही हैं। इसलिए इस क्षेत्र में कैरियर अनंत संभावनाओं से भरपूर है।
आज संचार, मौसम की जानकारी, आपदा प्रबंधन, कृषि, नेवीगेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा- सब कुछ किसी न किसी रूप में उपग्रहों और अंतरिक्ष तकनीक से जुड़ चुका है। वहीं अंतरिक्ष अब किसी देश की सामरिक और तकनीकी शक्ति का भी महत्वपूर्ण आधार है। आज का युवा यदि देश के लिए कुछ अलग करना चाहता है, तो उसके सामने मौजूद कई विकल्पों में अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक में कैरियर भी शामिल है। यहां हाथ में हथियार नहीं बल्कि कंप्यूटर, सेंसर, रॉकेट, रोबोट और उपग्रह होते हैं। यहां लड़ाई गोलियों से नहीं, ज्ञान, तकनीक और नवाचार से लड़ी जाती है। भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार विस्तार कर रहा है। उपग्रह, लांच व्हीकल, पृथ्वी अवलोकन, अंतरिक्ष विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे क्षेत्रों में देश की गतिविधियां बढ़ रही हैं। इसलिए यह नया कैरियर अनंत संभावनाओं से भरपूर है।
स्पेस साइंस और स्पेस टेक्नोलॉजी
स्पेस साइंस यानी अंतरिक्ष विज्ञान। इसमें हम ब्रह्मांड, ग्रहों, तारों, सूर्य और अंतरिक्षीय घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करते हैं। दूसरी ओर स्पेस टेक्नोलॉजी उन तकनीकों का क्षेत्र है, जिनकी मदद से रॉकेट, उपग्रह, अंतरिक्ष यान, सेंसर और अन्य अंतरिक्ष प्रणालियां बनायी और संचालित की जाती हैं। यह एक बहुआयामी क्षेत्र है। इसमें केवल एक विशेषज्ञ काम नहीं करता बल्कि कई क्षेत्रों के लोग मिलकर अंतरिक्ष मिशन तैयार करते हैं। मसलन, मैकेनिकल इंजीनियर, जो रॉकेट और संरचनाएं डिजाइन करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर, जो संचार और नियंत्रण प्रणाली विकसित करते हैं। कंप्यूटर इंजीनियर, जो सॉफ्टवेयर और डेटा सिस्टम तैयार करते हैं। भौतिक वैज्ञानिक, जो अंतरिक्ष और ग्रहों का अध्ययन करते हैं। गणितज्ञ, जो जटिल कक्षाओं और गणनाओं पर काम करते हैं। डेटा वैज्ञानिक, जो उपग्रहों से प्राप्त विशाल डेटा का विश्लेषण करते हैं। अंतरिक्ष का कैरियर केवल रॉकेट वैज्ञानिक बनने तक सीमित नहीं है।
ये हैं कैरियर विकल्प
स्पेस सेक्टर में युवाओं के लिए अनेक रोमांचक कैरियर विकल्प उपलब्ध हैं जैसे- स्पेस साइंटिस्ट, जिनका काम अंतरिक्ष, ग्रहों, सूर्य, ब्रह्मांड और अन्य खगोलीय घटनाओं पर शोध करना होता है। इसी तरह एयरोस्पेस इंजीनियर जो रॉकेट, लांच व्हीकल, अंतरिक्ष यान और उड़ान प्रणालियों के डिजाइन विकसित करते हैं। इसी क्रम में सैटेलाइट इंजीनियर संचार, मौसम और पृथ्वी अवलोकन के लिए उपग्रहों का निर्माण तथा परीक्षण करते हैं। जबकि रॉकेट और प्रोपल्शन इंजीनियर रॉकेट को अंतरिक्ष तक पहुंचाने वाली प्रणोदन तकनीक पर काम करते हैं। इसी तरह स्पेसक्राफ्ट सिस्टम इंजीनियर अंतरिक्ष यान की बिजली, संचार, नियंत्रण और अन्य प्रणालियों से समन्वय का काम करते हैं। जबकि रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों और डेटा के आधार पर धरती का अध्ययन करते हैं। इसी तरह स्पेस डेटा साइंटिस्ट बड़े पैमाने पर उपग्रह और अंतरिक्ष डेटा का विश्लेषण करते हैं, जबकि स्पेस रोबोटिक विशेषज्ञ अंतरिक्ष मिशनों के लिए रोबोट व स्वचालित प्रणालियां तैयार करते हैं और स्पेस साइबर सिक्यूरिटी विशेषज्ञ उपग्रहों तथा अंतरिक्ष से जुड़ी डिजिटल प्रणालियों को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने का काम करते हैं।
ऐसे शुरू करें तैयारी
यदि आप 10वीं या 12वीं के विद्यार्थी हैं, तो अभी से गणित और विज्ञान की नींव को मजबूत बनाना जरूरी है। बारहवीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स (पीसीएम) स्पेस टेक्नोलॉजी के अधिकांश तकनीकी कैरियरों का रास्ता बनाती है। इसके बाद निम्न क्षेत्रों में स्नातक कर सकते हैं- बी.टेक. एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, बी.टेक. मैकेनिकल इंजीनियरिंग,*बी.टेक. इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, बी.टेक. कंप्यूटर साइंस, बी.टेक. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, बी.एससी. फिजिक्स, बी.एससी. मैथ्स, बी.एससी. एस्ट्रोनॉमी/एस्ट्रोफिजिक्स। इसके बाद एम.टेक, एम.एससी. और पीएचडी के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है।
केवल इसरो नहीं
आमतौर पर जब अंतरिक्ष विज्ञान या तकनीकी की बात होती है तो लोगों को लगता है सिर्फ इसरो में ही नौकरी मिलेगी, जबकि ऐसा नहीं है। इस क्षेत्र के कैरियर की खासियत है कि भारत में आज 40 से ज्यादा ऐसे संस्थान और स्टार्टअप तैयार हो चुके हैं, जो अंतरिक्ष तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान के डिग्रीधारकों को नौकरी दे सकते हैं। अनेक निजी कंपनियां इस क्षेत्र में आ चुकी हैं और आने वाले सालों में इनमें और भी बढ़ोतरी तय है। सवाल है आज स्पेस सेक्टर में काम के विशेष क्षेत्र क्या-क्या हैं-उपग्रह निर्माण, लांच सर्विसेज, पृथ्वी अवलोकन, जियोस्पेशियल डेटा, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, स्पेस सॉफ्टवेयर, ड्रोन और सेंसर तकनीक, स्पेस रोबोटिक,नेवीगेशन व अंतरिक्ष आधारित स्टार्टअप।
वेतन और कमाई की संभावना
सरकारी संस्थानों में वेतन पद और सरकारी वेतन नियमों के अनुसार मिलता है। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की नियुक्ति के लिए संबंधित भर्ती नियम लागू होते हैं। जबकि निजी स्पेस कंपनियों और तकनीकी स्टार्टअप्स में वेतन अनुभव, कौशल और विशेषज्ञता के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। खासकर सॉफ्टवेयर, सैटेलाइट डेटा, रोबोटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसी विशेषज्ञताओं में अवसर तेजी से बढ़ सकते हैं। हालांकि इस क्षेत्र में शुरुआत केवल वेतन को ध्यान में रखकर नहीं करना चाहिए। यहां विशेषज्ञता और अनुभव सबसे बड़ी पूंजी है।
-इ.रि.सें.

