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रंग पर्व पर स्मार्ट तरीकों से रोकें बच्चों की ओवरइटिंग

होली और चटपटा खानपान

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वर्तमान दौर में देश में बड़ों के अलावा बच्चों में भी मोटापा एक गम्भीर समस्या बनता जा रहा है। बच्चों की सेहत पर खान-पान और फ़ूड हेबिट्स का असर जल्दी पड़ता है। खासकर त्योहारों के समय जब घरों में व्यंजन बनते हैं तो बड़ों के साथ बच्चे भी बड़े चाव से खाते हैं जिससे मोटापे आदि का खतरा बढ़ जाता हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस होली के त्योहार पर खाने पर खुद भी अंकुश रखें और बच्चों को भी सचेत करें।

 

बच्चे जीवन के हर क्षण को उत्सव की तरह मनाते हैं और जब मौका होली का हो तो फिर इनका उत्साह देखते ही बनता है। रंग-गुलाल, पिचकारी, पानी से भरे गुब्बारे, टेस्टी पकवान और बच्चे, इन्हीं सब से तो होली के त्योहार की रौनक लगती है। यूं तो होली प्यार बांटने का त्योहार है। लज़ीज़ व्यंजन और गुजिया से भरी प्लेट देखकर किसी का भी मन ललचा जाएगा। लेकिन वर्तमान दौर में मोटापा एक गम्भीर समस्या बनता जा रहा है। जिसने बच्चों को भी अपनी जद में ले रखा है। बच्चों पर खान-पान और फ़ूड हेबिट्स का असर जल्दी पड़ता है। खासकर त्योहारों के समय जब घरों में व्यंजन बनते हैं तो बड़ों के साथ बच्चे भी बड़े चाव से खाते हैं जिससे मोटापे का खतरा बढ़ जाता हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस होली के त्योहार पर खाने पर खुद भी अंकुश रखें और बच्चों को भी सचेत करें।

टेस्टी के साथ स्वस्थ भी हो खानपान

अक्सर देखा गया है कि हमारे लाइफ स्टाइल और जंक फ़ूड की वजह से बच्चे मोटे होते जा रहे हैं। ऐसे में यदि कोई त्योहार आ जाए, तो घर के बच्चों को उस दौरान परंपरागत भारी खाने से बचाना मुश्किल हो जाता है। यह जानते हुए कि मोटे बच्चों को बीमारियां जल्दी पकड़ती हैं, फिर भी कई बार हम इस सच की अनदेखी कर जाते हैं और ‘अभी बच्चा है’ ये कहकर टाल जाते हैं। जबकि, धीरे-धीरे बच्चों में खाने की यही आदत मुश्किल बन जाती है। वैसे तो बच्चे खाने को लेकर बेहद चूज़ी होते हैं। उन्हें वही पसंद आता है, जो खाने से रोका जाए। ऐसे में जरूरी होता है, कि बच्चों के लिए एक स्मार्ट तरीका अपनाया जाए। कोई ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिसमें उन्हें अपनी पसंद का स्वाद भी मिले और वो उनकी हेल्थ को प्रभावित भी न करे।

ज्यादा खाना न दें

होली पर गुंजिया, मीठे-नमकीन और डिशेज को देखकर बच्चों का मन डोल सकता है और वे ओवर ईटिंग का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में अगर वजन कंट्रोल रखना है तो बच्चों को ओवर ईटिंग से बचाएं। बच्चों को एक बार में ढेर सारा खाना नहीं दे बल्कि थोड़ा-थोड़ा खाना दें।

हेल्दी चीजें चुनें

बच्चे गुजिया-पापड़ और अन्य ऑयली डिशेज खा रहे हैं, तो लंच और डिनर में कुछ हैवी खाने के बजाय सलाद और फ्रूट्स दें। इससे दिनभर की कैलोरीज को मैनेज कर पाएंगे और वजन भी कंट्रोल रहेगा। बच्चों के खाने में ऐसी डिशेज शामिल करें जो दिखने में खूबसूरत, खाने में टेस्टी और हेल्दी हों जैसे- ओट्स से बनी डिशेज, फ्रूट कस्टर्ड व कोल्ड ड्रिंक्स की जगह फ्लेवर्ड शर्बत आदि।

हाइड्रेटेड रहें

बच्चे पानी कम पीते हैं। बच्चों को रंगीन बॉटल में पानी भरकर दें। बीच-बीच में हेल्थी ड्रिंक बनाकर दे जिससे शरीर में पानी की कमी न हो। यदि बच्चा बाजार के शेक और सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने की जिद करे, तो उसे घर का हेल्दी मिल्क शेक पीने की आदत डालें।

रोज करें कसरत

बच्चे मिठाई और पकवानों का स्वाद ले रहे है तो उनके साथ मिलने वाली कैलोरी को बर्न करने का इंतजाम भी जरूर करें। बच्चों के साथ आउटडोर गेम्स खेलें। बच्चे योग करने से जी चुराते है लेकिन गेम्स खेलने के लिए आसानी से राजी हो जाते है इसलिए ऐसे गेम्स चुने जिससे बच्चों की एक्सरसाइज खेल-खेल में हो जाए।

लुभावने विज्ञापनों से बचाएं

लुभावने विज्ञापनों का मायाजाल बच्चों को जंक फ़ूड की तरफ आकर्षित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। समय-समय पर चिकित्सक खाने में नमक और चीनी की मात्रा कम लेने की बात कहते हैं, लेकिन ये बात कम ही लोग जानते हैं कि खाने में किस मात्रा में इन पदार्थों का सेवन करना सही होगा। इसलिए बेहतर है कि बच्चों को घर का ही नाश्ता दें।

बड़ों की हो बड़ी भूमिका

आखिर बच्चे मोटे क्यों होते हैं, इसका एक सीधा सा जवाब है कि उनके खान-पान पर नियंत्रण नहीं होता। लोग लाड़-प्यार में बच्चों को हर वो चीज खाने का मौका देते हैं जो उन्हें पसंद है। यही कारण है कि आजकल बच्चों में मोटापा यानी ओबेसिटी बढ़ रही है। इसके मूल कारणों को खोजा जाए, तो फास्ट फूड का ज्यादा उपयोग, स्क्रीन टाइम का बढ़ना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी आदि सामने आयेंगे। जबकि, इसमें बच्चों की कोई गलती नहीं है। वे यदि कोई चीज पसंद करते हैं, तो उसमें उनकी यह मानसिकता नहीं होती कि इससे हमको फायदा हो रहा है या नुकसान। उन्हें स्वाद अच्छा लगता है और वे खाते हैं।

यह जिम्मेदारी घर वालों की होती है कि वे बच्चे को अनहेल्दी खाने से रोकें। उसे समझाएं भी कि यह क्यों नहीं खाना चाहिए। बच्चों को फील्ड गेम में लगाएं और खाने पर भी नियंत्रण रखें। हेल्दी फूड दें, उनकी पसंद की चीज भी दें लेकिन थोड़ा ही खाने दें। लंच और डिनर में सिर्फ उसे वही खाना दिया जाए जो उनके लिए जरूरी है। लेकिन, इस सबके लिए परिवार को जागरूक होना पड़ेगा न कि बच्चों को! -इंदौर स्थित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओपी गोयल से बातचीत पर आधारित।

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