परीक्षाएं जारी हों तो सबसे बड़ी चुनौती पढ़े हुए टॉपिक्स को याद रखने की होती है, क्योंकि किसी पाठ को बार-बार दोहराने के बावजूद भी अमूमन मस्तिष्क उसे भूल जाता है। अलग-अलग इम्तिहान के ठीक बीच में पाठ पक्का याद हो जाये इसमें स्मार्ट रिविजन के तौर–तरीके बहुत मददगार हैं।
जब परीक्षाएं चल रही हों उस दौरान स्मार्ट रिविजन का मतलब सिर्फ दोबारा पढ़ना भर नहीं होता बल्कि वैज्ञानिक तरीके से दिमाग को याद रखने के लिए प्रशिक्षित करना भी होता है। आधुनिक न्यूरोसाइंस और लर्निंग साइकोलॉजी बताती हैं कि ठीक परीक्षाओं के बीच में स्मार्टली रिविजन कैसे किया जाए, ताकि पढ़ा हुआ न केवल परीक्षा स्थल में पूरी तरह से याद रहे बल्कि उसका शानदार फायदा भी मिल सके, तो जानिये ऐसी स्थितियों में स्मार्टली रिविजन के तौर-तरीके :
सक्रिय पुनःस्मरण
सक्रिय पुनःस्मरण इसे अंग्रेजी में एक्टिव रिकॉल कहते हैं। वास्तव में किसी चीज को याद रखने और बेहतर ढंग से समझने का यह सबसे प्रभावी वैज्ञानिक तरीका है। यह सिर्फ पढ़ना नहीं है बल्कि किताब बंद करके खुद से सवाल पूछना भी है। रिविजन के इस तरीके के तहत कोई भी अध्याय पढ़ने के बाद उस अध्याय से संबंधित 10 से 15 सवाल बनाएं और उनका गंभीरता पूर्वक उत्तर दें। इसमें याद रखें कि किसी भी सूरत में ये उत्तर लिखते हुए किताब नहीं देखनी। ऐसा करने के दौरान जिन-जिन जगहों पर आपको अपनी खास कमजोरियां समझ में आएं, उन पर नये सिरे से काम करें यानी गलतियों को परीक्षाओं में न दोहराएं, इसके लिए कुछ चिन्हित सामग्री को बार-बार पढ़ें ताकि वह अच्छी तरह से समझ भी आ जाए और जितना संभव हो याद भी रहे। इस संबंध में विभिन्न रिसर्च बताती हैं कि पढ़ने की तुलना में इस तरह के टेस्ट देकर पढ़ना सामान्य से 200 से 300 प्रतिशत ज्यादा बेहतर होता है।
अंतराल पुनरावृत्ति
अंतराल पुनरावृत्ति जिसे अंग्रेजी में स्पेस्ड रिपिटिशन कहते हैं। वास्तव में यह प्रक्रिया दिमाग की भूलने की एक प्रक्रिया से होकर गुजरना है, जिसे इप्पिंगूस फॉर्गेटिंग कर्व कहा जाता है। अगर वास्तव में सही अंतराल पर जरूरी सामग्री का रिविजन किया जाए, तो भूलना कम हो जाता है। सवाल है इसे कैसे करें, तो एक चार्ट बनाना होता है। कुछ इस प्रकार-
* पहला दिन- पढ़ाई, * दूसरा दिन- पहला रिविजन, * तीसरे और चौथे दिन- या तो छुट्टी करें या बिना रिविजन के पढ़ाई करें। * पांचवें दिन- तकनीकी रूप से दूसरा और दसवें दिन तीसरा तथा 20वें दिन अंतिम रिविजन करें।
रिविजन करने की इस तकनीक से जानकारी लंबी अवधि तक के लिए स्मृति में दर्ज हो जाती है।
मिश्रित अभ्यास
मिश्रित अभ्यास यानी इंटरलीविंग टेक्निक। एक ही विषय तीन घंटे में पढ़ने की बजाय तीन घंटे में तीन अलग-अलग विषय पढ़ें। जैसे अगर पहले घंटे में गणित के सवाल हल किए हैं, तो दूसरे घंटे में इतिहास चुनें और तीसरे घंटे में विज्ञान के समीकरणों से उलझें। जानकारों का मानना है हर घंटे पढ़े जाने वाले विषय को बदलने से दिमाग ज्यादा सक्रिय रहता है और बोरियत भी कम होती है।
माइक्रो रिविजन
माइक्रो रिविजन का मतलब है, अगर 25 मिनट पढ़ाई करनी हो तो 5 मिनट का गैप करें। इसके लिए फ्लैश कार्ड का इस्तेमाल करें और माइंड गैप प्रक्रिया को बनाए रखें। इस तरह के रिविजन से फोकस बना रहता है और मानसिक थकान भी कम होती है।
मॉर्निंग रिकॉल
पढ़ने का सबसे पारंपरिक और सुंदर तरीका सदियों से यही रहा है कि सुबह-सुबह उठकर सबसे पहले 10 मिनट तक तो उन पाठों को याद करें, जो कल पढ़ाये गये हों। याद न आएं तो हाथ- मुंह धोकर कम से कम 15 मिनट तक किसी भी पुराने पाठ का पठन करें। इससे रिविजन का तकनीकी दबाव नहीं बनता। क्योंकि 10 मिनट तक पुराने टॉपिक को पढ़ने के बाद जब आप जरूरी और याद करने वाला टॉपिक पढ़ते हैं तो ऐसे में नींद आ जाती है। लेकिन जब बार-बार इस प्रक्रिया को दोहराएंगे तो दिमाग में स्थायी रूप से यह प्रक्रिया दर्ज हो जायेगी कि नींद नहीं आने देनी और इस तरह जागता हुआ दिमाग आपके पढ़े हुए को बेहतर ढंग से याद रखेगा।
दिमाग ऐसे रखता है याद
मानव मस्तिष्क में 86 अरब न्यूरांस होते हैं। जब हम कोई चीज बार-बार याद करते हैं तो न्यूरांस के बीच कनेक्शन मजबूत होता है, लेकिन चौबीस घंटे में ही बिना रिविजन के हम 50 से 60 फीसदी जानकारी भूल सकते हैं। लेकिन जब चौबीस घंटे के भीतर हम इसे रिविजन करते हैं तो हमें लगभग इसमें से 20 फीसदी सामग्री याद रह जाती है। एक्टिव रिकॉल्स के जरिये 70 से 80 फीसदी जानकारी हम याद रखते हैं। अगर 7 से 8 घंटे की बेहतर नींद लेते हैं, तो याद्दाश्त 20 से 30 फीसदी बढ़ जाती है। इस प्रकार वैज्ञानिक तरीके से अगर रिविजन किया जाए तो न केवल तुरंत पढ़ा हुआ याद रहता है बल्कि समझ भी बेहतर होती है।
-इ.रि.सें.
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