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सेहत संवारने में नींद का बड़ा योगदान

हमारी शारीरिक-मानसिक सेहत में नींद का महत्वपूर्ण योगदान है। सोने के दौरान शरीर निष्क्रिय होता है, पर मस्तिष्क अपनी सक्रिय यात्रा पर निकलता है। स्मृतियां फिर लिखी जाती हैं, भावनाएं साफ होती हैं, शरीर खुद की मरम्मत करता है।...

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हमारी शारीरिक-मानसिक सेहत में नींद का महत्वपूर्ण योगदान है। सोने के दौरान शरीर निष्क्रिय होता है, पर मस्तिष्क अपनी सक्रिय यात्रा पर निकलता है। स्मृतियां फिर लिखी जाती हैं, भावनाएं साफ होती हैं, शरीर खुद की मरम्मत करता है। यानी ग्रोथ हार्मोन रिलीज होता है, जिससे मांसपेशियां, हड्डियां व कोशिकाएं रिपेयर होती हैं। इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। डीएनए रिपेयर एंजाइम सक्रिय होते हैं।

सोने का समय भी जिंदगी का एक बड़ा और महत्वपूर्ण समय है। जिंदगी के इस विस्तृत समय के बारे में सोचकर ही रोमांच होता है। दरअसल, सोने का समय सिर्फ आराम का नहीं बल्कि पुनर्निर्माण का समय भी है। अगर कोई कहे कि हम अपनी जिंदगी का एक-तिहाई हिस्सा बिना जाने-समझे, आंखें बंद करके बिता देते हैं तो यह चौंकाने वाला लगेगा। मगर हकीकत में ऐसा ही होता है और हम जरा भी नहीं सोचते। अगर कोई इंसान औसतन 75 साल जिए तो वह लगभग 25 साल सिर्फ सोने में बिताता है। पर सवाल है- क्या वह सचमुच कुछ नहीं कर रहा होता? असल में, नींद के दौरान शरीर निष्क्रिय होता है, पर मस्तिष्क अपनी सबसे सक्रिय यात्रा पर निकल चुका होता है। हमारी स्मृतियां फिर से लिखी जाती हैं, भावनाएं साफ होती हैं, शरीर खुद की मरम्मत करता है। उस दौरान यह सब कुछ होता है।

सोते समय दिमाग की सक्रियता

विज्ञान के मुताबिक़, सोते वक्त हमारा मस्तिष्क किसी भी जागृत अवस्था से ज्यादा सक्रिय होता है। एमआरआई स्कैन में दिखता है कि नींद के दौरान मस्तिष्क बिजली की चमक की तरह जलता-बुझता है। दरअसल हम सोते हैं, पर हमारा मन जागता रहता है। साथ ही इस दौरान हमारा मस्तिष्क दिनभर के अनुभवों को छांटता है और यह तय करता है कि क्या याद रखना है, क्या मिटाना है। इस तय किये हुए के मुताबिक नई जानकारी पुरानी स्मृतियों से जुड़ती है, ठीक वैसे ही जैसे किसी लाइब्रेरी में नई किताब को उसके सन्दर्भ के मुताबिक सही जगह पर रख दिया जाता है। जो भावनाएं जागते वक्त भारी लगती हैं, नींद में डिस्टिल होकर हल्की हो जाती हैं। इसलिए रोने के बाद नींद आने पर मन हल्का लगता है। मतलब यह कि नींद सिर्फ आराम नहीं, मस्तिष्क की सफाई और पुनर्गठन की प्रयोगशाला है।

सपनों की गुप्त प्रयोगशाला

नींद का सबसे जादुई पहलू है- सपनों की दुनिया। क्या आपने कभी सोचा है कि सपने हमें क्यों आते हैं? वैज्ञानिक बताते हैं कि सपने हमारे भावनात्मक संतुलन के संरक्षक हैं। ये हमें अव्यक्त भय, अधूरी इच्छाओं और अनकहे अनुभवों को प्रोसेस करने देते हैं।

शरीर की मरम्मत का कारखाना

जब हम गहरी नींद में जाते हैं, तब शरीर एक शांत लेकिन व्यापक पुनर्निर्माण की प्रक्रिया से गुजरता है। इसी दौरान ग्रोथ हार्मोन रिलीज होता है, जिससे मांसपेशियां, हड्डियां और कोशिकाएं खुद को ठीक करती हैं। इसी से इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा तंत्र) मजबूत होता है। इसलिए नींद की कमी से लोग तुरंत बीमार पड़ जाते हैं। नींद के दौरान ही शरीर में डीएनए रिपेयर एंजाइम सक्रिय होते हैं, जिससे शरीर की हर कोशिका टूटे हुए अणुओं की मरम्मत करती है। इस तरह हर रात हमारा शरीर चुपचाप अपना नवीनीकरण करता है- जैसे कोई शहर रात में सड़कें, पुल और बिजली की लाइनें ठीक करता है ताकि सुबह वह फिर चमक उठे।

स्वस्थ जीवन की गारंटी

आखिर नींद के बिना मनुष्य कितने दिन टिक सकता है? अमेरिका के सैन डियागो शहर के एक युवक रेंडी गार्डेनर ने दिसंबर 1963 से जनवरी 1964 के बीच 264 घंटे (लगभग 11 दिन 24 मिनट) तक लगातार जागकर रहने का प्रयास किया था, जिसका नतीजा यह हुआ कि वह भ्रमित हो गया, उसे लोग और वस्तुएं झूठी लगने लगीं और उसकी स्मृति खोने लगी। वैज्ञानिकों ने इससे यह निष्कर्ष निकाला है कि अगर कोई 72 घंटे तक लगातार न सोए, तो उसकी सोच, भावनाएं और निर्णय क्षमता किसी मदहोश व्यक्ति जैसी हो जाती हैं। अगर कोई 10 दिन तक न सोए, तो मस्तिष्क स्थायी नुकसान झेल सकता है। मतलब यह कि नींद सिर्फ चाह नहीं बल्कि जीवित रहने की शर्त है।

-इ.रि.सें.

 

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