‘वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या जिस पथ पर बिखरे शूल न हों। नाविक की धैर्य परीक्षा क्या यदि धाराएं प्रतिकूल न हों।’ प्रतिकूल धाराओं पर मेहनत के बल पर साहस के साथ चलकर मंजिल पाने की इन पंक्तियों को सच साबित किया है यूजीसी नेट की टॉपर दीक्षा मक्कड़ ने। अम्बाला की रहने वाली दीक्षा पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में रिसर्च स्कॉलर हैं। यूजीसी नेट परीक्षा में चार बार असफल होने के बावजूद दीक्षा ने हार नहीं मानी और जब सफलता मिली तो ऐसी मिली की चारों ओर से तारीफें मिलने लगीं।
‘दैनिक ट्रिब्यून’ से खास बातचीत करते हुए दीक्षा ने अपनी तैयारियों के बारे में तो बताया ही, साथ ही परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों को टिप्स भी दिये। क्या आपको टॉप करने का भरोसा था, पूछने पर दीक्षा कहती हैं, ‘परिणाम मेरे लिए भी आश्चर्यजनक था। मुझे इतनी उम्मीद नहीं थी।’ चार बार असफल होने के बावजूद हिम्मत कैसे बनी रही, के सवाल पर दीक्षा ने कहा, ‘हिम्मत बने रहने के कारण थे। बार-बार असफलता ने बताया कि गलतियां कहां हो रही हैं। मैंने पीएचडी के लिए तो क्वालीफाई कर लिया था, लेकिन फिर परीक्षा देने का मन नहीं किया। इसके बाद मेरे साथियों और घरवालों ने हौसला बढ़ाया।’
अपनी तैयारी के बारे में दीक्षा ने कहा कि रुटीन स्टडी के अलावा दो साल से लगातार कड़ी मेहनत कर रही थी। मेरे गाइड ने भी कहा कि मुझे और प्रयास करना चाहिए। फिर मैंने ऑनलाइन कोचिंग ली। इसके अलावा सेल्फ स्टडी, वीकली रिवीजन, मंथली रिवीजन वगैरह-वगैरह से मुझे सफलता मिल ही गयी। यह पूछने पर कि यही लक्ष्य था या फिर कुछ और भी करने का इरादा है, दीक्षा ने कहा, ‘सिविल सर्विस में जाना तो सबका सपना होता ही है। पहला कदम पार कर लिया अब अगले कदम पर फोकस करूंगी।’
जब परिणाम आया तो कैसा मंजर था, के सवाल पर दीक्षा कहती हैं, ‘रिजल्ट पहले खुल नहीं रहा था। पूरी रात जागती रही। अगले दिन काम पर चली गयी। रिजल्ट देखने की कोशिश की तो देखा कि इतने अच्छे मार्क्स। घरवालों को और सुपरवाइजर को बताया। चारों ओर खुशी का माहौल था।
लक्ष्य पर फोकस रहें, अभिभावकों की ओर देखें... सफलता जरूर मिलेगी
इन दिनों बच्चे बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। कुछ और भी प्रतियोगी परीक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में उनको क्या टिप्स देंगी। इस सवाल के जवाब में दीक्षा ने कहा, ‘अनुशासन, टाइम टेबल, सेगमेंट में डिवाइड कर तैयारी। सबसे जरूरी हैं।’ दीक्षा ने कहा, ‘कभी हार नहीं माननी चाहिए। खुद पर भरोसा रखना चाहिए। कभी अगर डिप्रेशन जैसी स्थिति आ जाये तो पैरेंट्स का चेहरा देखिए। फिर भी कभी अवसाद की स्थिति आए तो उसे हावी नहीं होने देना चाहिए। खेल, डांस, म्यूजिक आदि कोई न कोई एक्टिविटी करें।’
कथक डांसर भी हैं
दीक्षा कथक डांसर भी हैं। वह कहती हैं, ‘कथा कहे सो कथा कहावे। स्टोरी टेलिंग पर हम डांस करते हैं तो वह कथक है। बचपन से ऐसा शौक था। घर में मां, भाई भी डांस करते हैं। मेरी मौसी ने सिखाया। एक बार मैंने एक गीत पर परफाॅर्म किया। किसी ने कहा कि यह अच्छा कर सकती है। फिर गुरु अंजू मृलानी से कथक सीखा। स्कूल के बाद इसे सीखने जाती। पढ़ाई से कंप्रोमाइज नहीं किया। गुरु और अभिभावक की मदद से सब कुछ होता चला गया।’

