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सफलता की अंधी दौड़ छोड़ सुकून तलाशें

सॉफ्ट लिविंग का नया ट्रेंड

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‘सॉफ्ट लिविंग’ का मतलब आलसी हो जाना या कामकाज से किनारा कर लेना नहीं है, बल्कि कार्य के उन पहलुओं पर ध्यान देना है जो आपको पसंद हैं। जिनसे सुकून के साथ ही जिंदगी में संतुलन कायम हो। वहीं जहां ज़रूरत है वहां सीमाएं भी तय करना है। चाहे वह अपना पेशा हो या फिर रिश्ते।

 

इसमें कोई संदेह नहीं कि भागदौड़ और अति व्यस्तता से लोग अब ऊबने लगे हैं। सुकून और आराम के लिए लोग अब’ सॉफ्ट लिविंग’ एक नया लाइफ स्टाइल ट्रेंड अपना रहे हैं। सॉफ्ट लिविंग का अर्थ आलस्य नहीं, बल्कि समझदारी और जागरूकतापूर्ण चयन है। इसका मुख्य उद्देश्य सफलता की अंधी दौड़ के बजाय खुद के साथ जुड़ाव और वर्तमान पल का आनंद लेना है। आप इसमें मानसिक शांति और माइंडफुलनेस के बारे में अधिक ध्यान दे सकते हैं।

क्या है सॉफ्ट लिविंग

इस तरह की जीवनशैली में व्यक्ति अपनी खुशी और मानसिक शांति को प्राथमिकता देता है। इसके तहत व्यक्ति तनाव कम करने और जीवन में संतुलन लाने पर ध्यान केंद्रित करता है। इसमें सचेतन निर्णय लेना, अपनी जरूरतों को समझना और रिश्तों व काम के बीच स्वस्थ सीमाएं तय करना शामिल है। सॉफ्ट लिविंग का मतलब लग्जरी या काम को पूरी तरह छोड़ना नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और आत्म-देखभाल पर जोर देना है। यह जीवनशैली उद्देश्यपूर्ण जीवन को बढ़ावा देती है, जहां आप अपनी ज़रूरतों और मूल्यों के अनुसार निर्णय लेते हैं।

सेल्फ केयर को प्राथमिकता

सॉफ्ट लिविंग को अपनाने वाले उपभोक्तावाद से हटकर सच्ची आत्म-देखभाल पर विशेष ध्यान देते हैं। इसमें तन-मन की बेहतरी के लिए थेरेपी लेना, अपनी सीमाएं तय करना जरूरी हो जाता है। आत्म आनंद को ही प्राथमिकता दी जाती है। जीने का यह अंदाज भागदौड़ भरी संस्कृति के तनाव और चिंता कम करने की कोशिश करता है।

‘सॉफ्ट लिविंग’ के मुख्य पहलू

व्यक्तिगत ज़रूरतें कम यानी इसमें यह समझना जरूरी कि क्या चीज़ आपको खुशी देती है। खुशी देने वाली चीज़ों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाता है।सुबह की दिनचर्या को शांत बनाना, स्क्रीन टाइम कम करना और छोटी खुशियों (जैसे प्रकृति के साथ समय बिताना) को महत्व देना इसमें शामिल है।

सीमाएं तय करना

काम, रिश्तों और घर के कामों में स्वस्थ सीमाएं बना दी जाती हैं ताकि अनावश्यक शारीरिक व मानसिक दबाव न हो और तनाव कम हो ।

धीमी गति से जीवन

इस शैली में भागमभाग यानी’फास्ट लाइफ’ के बजाय धीरे-धीरे, सोच-समझकर काम करना और अच्छे अनुभवों को महत्व देना शामिल किया जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य

मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसा करने से बर्नआउट और अन्य मानसिक समस्याओं का मुकाबला करने में मदद मिलती है।

भावनात्मक स्वास्थ्य

लोग उन स्थितियों और रिश्तों से धीरे-धीरे दूरी बना रहे हैं जो मानसिक सुकून को प्रभावित करते हैं। टॉक्सिक लोगों से दूरी बनाना जरूरत है। हर काम को मजबूरी में करने की बजाय सोच-समझकर और खुशी के लिए किया जाता है।

वर्क लाइफ बैलेंस

काम के घंटों के बाद ऑफिस के नोटिफिकेशन बंद करना और “ना” कहना सीखना इसका अहम हिस्सा है। पेशेवर जीवन और निजी जीवन में अंतर समझा जा रहा है और संतुलन बनाया जा रहा है।

जीने के हल्के-फुल्के ढंग का महत्व

बढ़ते बर्नआउट (मानसिक थकान) के कारण आज अधिक लोग काम और जीवन के बीच संतुलन को एक लग्जरी के बजाय जरूरत मान रहे हैं। उन नौकरियों या लाइफस्टाइल में अधिक ऊर्जा देने के पक्ष में नहीं हैं जो उनके मानसिक स्वास्थ्य की कीमत पर आती हैं। सॉफ्ट लीविंग का अर्थ है ‘अगर कोई चीज आपकी शांति भंग कर रही है, तो उससे अपनी ऊर्जा और श्रम को वापस खींच लेना चाहिए’।

‘सॉफ्ट लिविंग’ बनाम ‘हार्ड लिविंग’

‘सॉफ्ट लिविंग’ का मतलब आलसी होना या काम से पूरी तरह कट जाना नहीं है, बल्कि काम के उन पहलुओं पर ध्यान देना है जो आपको पसंद हैं और जहां ज़रूरत है वहां सीमाएं तय करना है। यह ‘हार्ड लॉन्च’ यानी रिश्तों में पार्टनर को पूरी तरह दुनिया के सामने लाना के विपरीत ‘सॉफ्ट लॉन्च’ यानी रिश्तों को निजी रखना के ट्रेंड जैसा है, जहां आप अपनी निजी जिंदगी और खुशी को सिर्फ अपने ही लिए सुरक्षित रखते हैं।

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