आने वाले समय में देश के बेहतर विकास के लिए क्वालिटी डीप टेक टैलेंट चाहिये। हजारों नई टेक फेलोशिप का ऐलान किया गया ताकि डीपटेक एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, और एडवांस्ड मैन्यूफैक्चरिंग आदि क्षेत्रों में शोध क्षमता बढ़े। यह पहल रोज़गार, स्टार्टअप और इंडस्ट्री-लिंक्ड नवाचार से जुड़ी है।
भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित आईआईटीज और आईआईएससी में 10,000 नई टेक फेलोशिप का उद्देश्य देश में डीप टेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और एडवांस्ड मैन्यूफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय शोध क्षमता बढ़ाना है। यह पहल केवल अकादमिक रिसर्च तक सीमित नहीं है बल्कि इसे सीधे रोज़गार, स्टार्टअप और इंडस्ट्री-लिंक्ड इनोवेशन से जोड़ा गया है। ये फेलोशिप मूलतः इन संस्थानों में केंद्रित होंगी- देश की सभी इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी और बंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस से। इन संस्थानों को इसलिए चुना गया है; क्योंकि यहां पहले से ही हाई-एंड लैब्स, सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री कोलैबोरेशन नेटवर्क मौजूद है।
तीन स्तरों पर होंगी फेलोशिप
पीएचडी/इंटीग्रेटेड पीएचडी फेलोज : *डीप टेक और एआई में थीसिस आधारित रिसर्च * मासिक फेलोशिप + रिसर्च ग्रांट।
पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो : * इंडस्ट्री-ओरिएंटेड रिसर्च प्रोजेक्ट्स, * प्रोटोटाइप डेवलपमेंट।
इंडस्ट्री-स्पॉन्सर्ड रिसर्च फेलो : * किसी कंपनी की समस्या पर सीधे काम, * जॉब ऑफर की उच्च संभावना।
डीप और एआई रिसर्च के मुख्य क्षेत्र
* जनरेटिव एआई मॉडल, * चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर आर्किटेक्चर, * मेडिकल एआई (डायग्नोसिस सिस्टम), * ड्रोन और ऑटोनॉमस व्हीकल, * क्वांटम कंप्यूटिंग एल्गोरिद्म
इन सभी क्षेत्रों में मार्केट-डिमांड पहले से मौजूद है, इसलिए रिसर्च केवल पेपर तक सीमित नहीं रहेंगी। कई फेलोशिप प्रोजेक्ट्स में टेक कंपनियां को-फंडिंग करेंगी और मेंटर इंडस्ट्री से होगा। इस तरह रिसर्च का अंतिम लक्ष्य प्रोडक्ट होगा।
फेलोशिप के बाद प्रोफेशन
* एआई/डीप टेक साइंटिस्ट, * कंपनियों में आर एंड डीटी, * अप्लाइड रिसर्च इंजीनियर। * स्टार्टअप फाउंडर/को-फाउंडर, * फैकल्टी/रिसर्च पेपर, * सरकारी लैब्स (डीआरडीओ, इसरो प्रोजेक्ट्स)
फेलोशिप और रोजगार
आखिर सरकार इन फेलोशिप्स को रोजगार से क्यों जोड़ रही है। वह इसलिए कि भारत का लक्ष्य सिर्फ सर्विस आधारित आईटी नहीं है बल्कि प्रोडक्ट बेस्ड नेशन बनना है। डीप टेक रिसर्च+ पैटेंट+ इंडस्ट्री+ मैन्यूफैक्चरिंग+ नौकरियां। यह एक पूरी चेन तैयार की जा रही है। संभावित सैलरी की बात करें तो * एंट्री लेवल पर डीप टेक साइंटिस्ट को 18 से 25 लाख रुपये सालाना। * 3 से 5 वर्ष के अनुभव वाले को 35 से 60 लाख रुपये सालाना। * स्टार्टअप एग्जिट/इक्विटी : करोड़ों की संभावना। यह सामान्य आईटी जॉब्स से काफी ऊपर है।
योग्यताएं
ये फेलोशिप्स छात्रों को भी मिल सकती हैं बशर्ते उनका मजबूत मैथ्स और प्रोग्रामिंग बेस हो।
* वह गेट/संस्थान स्तरीय परीक्षा पास किए हों। * उन्हें रिसर्च और प्रोजेक्ट्स में रुचि हो।
ये फेलोशिप रोजगार की गारंटी भले न दे, लेकिन आपको एक ऐसे ट्रैक पर ले जाएगी, जहां बेरोजगार रहने की संभावना नहीं रह जायेगी। वास्तव में आईआईटीज और आईआईएसटी की 10,000 टेक फेलोशिप सिर्फ स्कॉलरशिप स्कीम नहीं है बल्कि भारत के भविष्य के वैज्ञानिकों, डीप टेक उद्यमियों और हाई एंड टेक प्रोफेशनल्स की फैक्टरी बनने जा रही है। लेकिन सवाल है कि क्या इस सबके लिए देश में योग्य और जरूरी मानव संसाधन हैं?
डीप टेक एआई ट्रैक का रोड मैप
दरअसल डीप टेक एआई ट्रैक के रोड मैप के चार लेयर हैं। लेयर एक में मजबूत अकादमिक नींव जरूरी है यदि लक्ष्य डीप टेक और एआई रिसर्च फेलोशिप हो। इसके लिए जरूरी हैं कि आपके आवश्यक विषय ये हों- * लिनियर एलजेब्रा, * प्रोबेबिल्टी एंड स्टैटिस्टिक्स* डाटा स्ट्रक्चर एंड एल्गोरिद्म, * ऑपरेटिंग सिस्टम, * कंप्यूटर नेटवर्क और बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स। वहीं अगर हार्डवेयर साइड में जाना है तो बीटेक, बीई या बीएससी मैथ्स या एमएससी डिग्रीधारी जरूरी होंगे। इसी तरह लेयर टू में कोर टेक्निकल्स का होना जरूरी है। लेयर थ्री में रिसर्च ओरिएंटेशन महत्वपूर्ण है और सबसे ज्यादा बाधा इसी लेयर में आती है। क्योंकि 90 प्रतिशत छात्र इससे पीछे रह जाते हैं।
अगर उपभोक्ता बनने की बजाय निर्माता बनना है तो हमें यह भी बात समझनी होगी कि सिर्फ बड़ी घोषणाओं से काम नहीं होगा। क्योंकि हम सब जानते हैं कि भारत में क्वालिटी डीप टेक टैलेंट की भारी कमी है। इसी कमी को भरने के लिए फेलोशिप लायी गयीं। ऐसे में जो छात्र आज से सही दिशा पकड़ लेगा, वह अगले पांच-सात साल में भारत की टेक एलीट का हिस्सा होगा। -इ.रि.सें.

