पर्दे पर प्रेजेंस है महत्वपूर्ण : दीपक डोबरियाल
बॉलीवुड अभिनेता दीपक डोबरियाल ने ओमकारा , शौर्य , तनु वेड्स मनु , दबंग 2 , तनु वेड्स मनु रिटर्न्स , प्रेम रतन धन पायो , हिंदी मीडियम और अंग्रेजी मीडियम जैसी फिल्मों में अभिनय किया है। उन्हें खास...
बॉलीवुड अभिनेता दीपक डोबरियाल ने ओमकारा , शौर्य , तनु वेड्स मनु , दबंग 2 , तनु वेड्स मनु रिटर्न्स , प्रेम रतन धन पायो , हिंदी मीडियम और अंग्रेजी मीडियम जैसी फिल्मों में अभिनय किया है। उन्हें खास पहचान ओमकारा में राज्जू और तनु वेड्स मनु में पप्पी के किरदार से मिली। इन दिनों उनकी चर्चा फिल्म ‘इक्कीस’ को लेकर है।
कुछ साल पहले महान फिल्मकार श्याम बेनेगल से एक इंटरव्यू के दौरान जब इस लेखक ने दीपक डोबरियाल का जिक्र किया तो उन्होंने पूछा कौन, जिसने ओमकारा में काम किया। जवाब ‘हां’ में देने पर उन्होंने कहा कि दीपक ब्रिलियंट एक्टर है। धर्मेंद्र जी की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ में दीपक के अभिनय को देख बेनेगल साहब की कही वह बात बार-बार याद आती रही।
पाकिस्तानी फौजी का है किरदार
फिल्म ‘इक्कीस’ में सिर्फ एक मिनट की भूमिका में एक पाकिस्तानी फौजी जहांगीर के रूप में धर्मेंद्र जैसे मंझे हुए अभिनेता के सामने जो परफार्मेंस उन्होंने दी उसे देखकर दर्शकों ने ही नहीं बल्कि बॉलीवुड के कई निर्माता-निर्देशकों और अभिनेताओं ने भी सराहना की। एक तरह से कह सकते हैं कि वे परफार्मेंस के मामले में इक्कीस साबित हुए।
छोटी सी लेकिन मीनिंगफुल भूमिका
दीपक ने फोन पर हुई बातचीत में कहा कि इस छोटी पर मीनिंगफुल भूमिका के लिए न केवल फिल्म के निर्देशक श्रीराम राघवन बल्कि खुद धर्मेंद्र ने उनकी प्रशंसा की थी।
पाकिस्तानी वॉर वेटर्न से जुड़ा है सीन
सीन की तैयारी को लेकर पूछे एक सवाल के जवाब में दीपक ने बताया कि वे कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के एक वार वेटर्न हैं और युद्ध के दौरान वे अपनी टांग गंवा बैठे हैं। जैसे ही उन्हें पता चलता है कि हिन्दुस्तान से कोई रिटायर्ड फौजी अफसर हमारे गांव में दावत पर बुलाया गया है। यह भी कि फौजी अफसर एमएल क्षेत्रपाल यानी धर्मेन्द्र अपने गांव सरगोधा के घर की यादें संजोने आए हैं और पाकिस्तान के ब्रिगेडियर नासिर उनकी मेजबानी कर रहे हैं तो जहांगीर वहां जाकर मेजबानों को धमकाता है। हम यहां जंग में अपनी टांग गंवा रहे हैं और तुम दुश्मन को बिरयानी खिला रहे हो।
गुस्से के बाद अचानक भावुक पल
वह ललकारते हुए कहता है कि हिन्दुस्तानी को बाहर निकालो। शोर सुनकर क्षेत्रपाल बाहर आते हैं और जहांगीर से मुखातिब होते हुए कहते हैं, मैं भी फौजी हूं। जब जहांगीर उनसे कहता है कि हिन्दुस्तान से जंग में उसने अपनी टांग गंवा दी। उसके कई साथी शहीद हो गए। तो क्षेत्रपाल कहते हैं तुमने टांग खोई है तो जंग में मैंने अपना बेटा खोया है। यह सुनते ही जहांगीर के भाव परिवर्तित होने शुरू हो जाते हैं। उसके बाद क्षेत्रपाल जहांगीर की ओर हाथ बढ़ाकर गले मिलते हैं और जहांगीर अपना दुख बयां करता है।
और वो यादगार क्षण
पाकिस्तानी रिटायर्ड फौजी क्षेत्रपाल की प्रतिक्रिया पर भावुक हो जाता है और फिर क्षेत्रपाल कहता है कुछ तो ऊपरवाले की मर्जी होगी। उस क्षण के बारे में दीपक ने कहा- उसे धरम जी से गले मिलते हुए ऐसा लगा जैसे मानो उसने एक युग को छू लिया है। वह क्षण मेरे सिनेमाई सफर का यादगार क्षण था। उस दृश्य में दीपक की स्क्रीन प्रेजेंस देखने लायक बतायी जा रही है।
एक्टर की प्रेजेंस है महत्वपूर्ण
सिनेमा में एक्टर की प्रजेंस के महत्व को लेकर दीपक डोबरियाल ने कहा कि यह उनके लिए ही नहीं बल्कि किसी भी अभिनेता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि पर्दे पर वह कैसे प्रस्तुत होता है।
लर्निंग जारी,इम्तिहान बाकी
दीपक कहते हैं कि मेरे लिए तो यह किसी लर्निंग प्रोसेस की तरह है। अभी इम्तिहान बाकी हैं। शूटिंग के दौरान धरम जी के साथ बिताए क्षणों के बारे में पूछने पर दीपक ने बताया कि वे उन्हें बेटा कहकर ही बुलाते थे। बहुत प्यार था उनके बोलने-मिलने में।
फिल्म ‘इक्कीस’ में इस शॉट की चर्चा होगी, इसके जवाब में दीपक ने कहा कि यह दर्शकों और फिल्म क्रिटिक्स का उनके प्रति स्नेह है। मेरा सिनेमाई सफर तो अभी जारी है। मैं अपने आपको तराश रहा हूं। किसी एक भूमिका में टाइपकास्ट नहीं होना चाहता हूं। बस यही कहूंगा कि मेरे सिनेमाई सफर की यह एक यादगार भूमिका है।

