कड़ाके की ठंड के कारण खून गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है,जिससे रक्त नलिकाओं में थक्के जमने यानी ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ जाता है। यही थक्का मस्तिष्क तक पहुंचकर स्ट्रोक या लकवा का कारण बन सकता है। ऐसे में कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है।
देश में शीतलहर के कारण स्ट्रोक, कोल्ड डायरिया, हार्ट और सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कड़ाके की सर्दी के चलते लकवा जैसे गंभीर मामले भी सामने आने लगे हैं। देश भर के मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में लकवा के मरीजों को गंभीर हालत में देखा जा रहा है। ऐसे में कुछ सावधानियां बरतने के साथ ही समय पर जांच व सतर्कता भी जरूरी है।
स्ट्रोक यानी पैरालिसिस का जोखिम
कड़ाके की ठंड के कारण खून गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है,जिससे रक्त नलिकाओं में थक्के (ब्लड क्लॉट) जमने का खतरा बढ़ जाता है। यही थक्का मस्तिष्क तक पहुंचकर स्ट्रोक या लकवा का कारण बन सकता है। ठंड में धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है और हृदय पर दबाव बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव होता है और अहम अंगों में रक्त की सप्लाई रुक जाती है।
यह जोखिम विशेष रूप से बुजुर्गों और शुगर या दिल के रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को ज्यादा होता है। खून का दौरा कम होने से मस्तिष्क को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे लकवा का दौरा भी पड़ सकता है। इसके कारण अचानक शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, सुन्नपन, बोलने या समझने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है।
कोल्ड डायरिया और पेट दर्द
कड़ाके की ठंड के चलते कोल्ड डायरिया, पेट दर्द, उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो जाता है। इसके अलावा शुगर, हाई बीपी, हृदय रोग, सांस की बीमारी, हड्डी रोग, नेत्र रोग, मस्तिष्क रोग, बाल रोग और महिला रोगों के मरीज भी ओपीडी में पहुंचते हैं।
ठंड में बरतें ये सावधानियां
बच्चों,क्रॉनिक रोगों से पीड़ितों व वृद्धों को ऐसे मौसम में खास सतर्कता जरूरी है। वहीं खासकर लकवे या पैरालिसिस के लक्षणों में किसी अंग में अचानक कमजोरी महसूस होना, बोलने में मुश्किल होना, संतुलन बिगड़ना या चेहरे में विकृति नजर आना शामिल हैं। इन लक्षणों की अनदेखी करने से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं। इनमें से कोई भी संकेत दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से मदद लें।
ठंड से बचाव के करें उपाय
वैसे तो सभी उम्र के लोगों को चाहिये ठंड में विशेष सावधानी बरतें। मसलन-सुबह-शाम ठंडी हवा से बचें। बुजुर्ग और बीपी-शुगर मरीज नियमित दवा लें। शरीर को पूरी तरह ढककर रखें। ठंडे पानी और बासी भोजन से बचें। अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी या हाथ-पैर सुन्न होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें। दरअसल, ठंड से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। लापरवाही भारी पड़ सकती है। किसी भी लक्षण को हल्के में न लें और सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या अस्पताल पहुंचें। - हील इनिशिएटिव
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