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गुणों के विकास से पर्सनैलिटी में निखार

प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए जहां बेहतर संवाद कला चाहिये वहीं निर्णयों का तथ्य आधारित और तर्कसंगत होना जरूरी है। साथ ही संतुलित पर्सनैलिटी के लिए वैज्ञानिक व पूर्वाग्रह रहित सोच आवश्यक है। ये गुण आप अलग-अलग कार्यक्षेत्रों के पेशेवरों...

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प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए जहां बेहतर संवाद कला चाहिये वहीं निर्णयों का तथ्य आधारित और तर्कसंगत होना जरूरी है। साथ ही संतुलित पर्सनैलिटी के लिए वैज्ञानिक व पूर्वाग्रह रहित सोच आवश्यक है। ये गुण आप अलग-अलग कार्यक्षेत्रों के पेशेवरों से सीख सकते हैं।

 

अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी पर्सनैलिटी के फैन बन जाएं और सोसायटी व कार्यक्षेत्र में आपके हुनर, मृदुभाषिता और विद्वत्ता का डंका बजे तो आपको खुद को तराशना होगा।

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बोलें वकील की तरह

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वकील की तरह बोलने का अर्थ है कि जब भी बोलें—तर्क , आत्मविश्वास और शब्दों के सटीक चयन के साथ बोलें। जब आप तर्कसंगत बात आत्मविश्वास से कहते हैं, तो लोग आपको गंभीरता से लेते हैं। ‘शायद’ या ‘मुझे लगता है’ जैसे शब्दों का प्रयोग कम ही करें। प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए अपनी बात को डेटा या सबूतों से जोड़ें। विनम्रता लेकिन दृढ़ता से बात कहें। वकील चिल्लाकर अपनी बात नहीं मनवाते, वे दलीलों से सामने वाले को निरुत्तर करते हैं। वहीं अच्छा वकील बोलने से ज्यादा सुनता है ताकि वह सामने वाले की बात में ‘लूपहोल्स’ (खामियां) ढूंढ सके। बॉडी लैंग्वेज का भी ध्यान रखें। बात करते समय नजरें न चुराएं।

वाणी में दार्शनिक-सा ठहराव

एक वकील जहां ‘तथ्यों’ पर जोर देता है, वहीं एक दार्शनिक ‘तत्व’ और ‘अर्थ’ की बात करता है। प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए जब आप दार्शनिक शैली अपनाते हैं, तो आपकी वाणी में ठहराव और गहराई आ जाती है। बात करते समय सतहीपन से ऊपर उठें। दार्शनिक हल्की गपशप में नहीं उलझते। वह तब बोलता है जब उसके पास कहने के लिए कुछ ऐसा हो जो ‘मौन’ से बेहतर हो। बोलने से पहले 3 सेकंड का मौन लें। यह दिखाता है कि आप प्रतिक्रिया नहीं कर रहे, बल्कि विचार प्रकट कर रहे हैं। यह शैली अपनाने से लोग आपकी ओर खिंचे चले आएंगे।

वैज्ञानिक जैसी सोच

वैज्ञानिक किसी भी वस्तु, घटना या परिस्थिति के हर पहलू पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उनका स्वभाव जिज्ञासु, तर्कसंगत, और खुले विचारों वाला होता है। अपनी सोच को तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित करना,निरंतर सीखने और प्रयोग करने की प्रवृत्ति उनकी आदत होती है। वहीं बेहतर है आप समस्याओं को चुनौतियों की तरह देखें और आत्मविश्वास के साथ समाधान निकालें, ठीक वैसे ही जैसे वैज्ञानिक करते हैं। हर चीज़ पर सवाल करें, नए ज्ञान और विचारों की खोज करें, जैसे वैज्ञानिक नए प्रयोगों से करते हैं। तथ्यों और तर्कों के आधार पर निष्कर्ष निकालें।

नए विचारों और परिणामों का स्वागत करें, भले ही वे आपकी पुरानी धारणाओं के खिलाफ हों। गलतियों से सीखें और अपनी परिकल्पना बदलें।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण

प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए आत्म-जागरूकता, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, प्रभावी संचार (सुनना और बोलना), सहानुभूति और मजबूत नैतिक मूल्यों की आवश्यकता होती है,जिससे वह न केवल खुद को समझता है, बल्कि दूसरों को भी गहराई से प्रभावित कर पाता है। जरूरी है कि आप अपनी शक्तियों और कमजोरियों को पहचानें। अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना और कमजोरियों पर काम करना महत्वपूर्ण है। लोगों का दिल जीतने के लिए सहानुभूति यानी दूसरों की भावनाओं को समझना और करुणा दिखाना आवश्यक है।

जज की तरह निर्णय लें

हवाई निर्णय आपको न तो सफल बनाएंगे न ही आपकी छवि एक परिपक्व इंसान की बनाएंगे। आपको किसी जज की तरह निर्णय लेना चाहिए। इसके लिए निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता, गहरी समझ और तार्किक विश्लेषण के साथ स्थितियों का मूल्यांकन करना जरूरी है। अपने पूर्वाग्रहों को अलग रखने और व्यापक प्रभावों पर विचार करते हुए निर्णय लेने से आपकी विश्वसनीयता और प्रभाव बढ़ता है।

इंजीनियर की तरह कार्य

एक इंजीनियर किसी भी समस्या को तर्क और दक्षता के साथ हल करता है। वह समस्या का विश्लेषण करके मुख्य समस्या और उसकी सीमाओं को समझता है। समस्या का प्रभावी और टिकाऊ समाधान तैयार करें। कार्यान्वयन के लिए चरण-दर-चरण कार्ययोजना बनाना। कम से कम संसाधनों में सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करना उनकी कार्यशैली में शामिल होता है। इस तरह की आदत आपको विशिष्ट बनाती है।

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