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मुआवजे को लेकर यात्रियों के हक

विमान हादसा/ कंज्यूमर राइट्स

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देश की व्यावसायिक फ्लाइट में विमान हादसे के दौरान किसी यात्री की मौत हो, या गंभीर घायल हो, उसे या उसके परिवार को मुआवजा स्वत: मिलता है। वहीं चार्टर्ड विमान हादसों पर मुआवजा तय नहीं होता व थर्ड पार्टी इंश्योररेंस जरूरी है। अगर विमान या इंश्योरेंस कम्पनी मुआवजा न दे तो सिविल कोर्ट में 3 साल व उपभोक्ता अदालत में 2 साल के अंदर केस किया जा सकता है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का चार्टर्ड प्लेन हाल ही में हादसे का शिकार हो गया और उनके साथ करीब 6 लोगों की मौत हो गई। अब क्या एयर इंडिया हादसे की तरह इस दुर्घटना में भी पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलेगा? देश की सभी व्यावसायिक फ्लाइट चाहे वह घरेलू उड़ान हो या अंतर्राष्ट्रीाय, सभी पर मुआवजे का नियम लागू होता है। विमान हादसे के दौरान किसी यात्री की मौत हुई हो, या वह गंभीर रूप से घायल हुआ हो, उसे या उसके परिवार को 1.5 से 1.85 करोड़ रुपये तक का मुआवजा मिलता है। विमान दुर्घटना मुआवजा नियम के तहत न तो विमान चालक या उसकी कंपनी की गलती साबित करने की जरूरत होती है और न ही लापरवाही साबित करना आवश्यक है। केवल हादसे या फिर किसी भी अनहोनी पर यह नियम स्वात: लागू हो जाता है।

मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत मुआवजा

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पिछले साल अप्रैल माह में एयर इंडिया का विमान हादसे का शिकार हुआ था, जिसमें करीब 200 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इस एयर इंडिया के हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों में प्रत्येक को 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक मुआवजा मिला है। अब सवाल ये है कि क्या चार्टर्ड प्लेन के हादसे में भी जान गंवाने वालों को मुआवजा मिलेगा है और अगर मिलता है तो इसे कौन देगा और कितना पैसा मिलेगा? एयर इंडिया विमान हादसे में जान गंवाने वालों को मॉन्ट्रियल कन्वेंशन 1999 के नियमों के तहत मुआवजा दिया गया था। यह नियम दुनियाभर की सभी एयरलाइंस पर प्रभावी है। यह नियम देश की सभी कॉमर्शियल फ्लाइट चाहे वह घरेलू उड़ान हो या अंतर्राष्ट्रीय, सभी पर लागू होता है।

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चार्टर्ड विमानों के लिए नियम

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के दुर्घटना ग्रस्त विमान को चार्टर्ड विमानों की श्रेणी में कॉमर्शियल उड़ान नहीं माना जाता , जिस कारण इस तरह के हादसे में मॉन्ट्रियल कन्वेंशन का नियम भी इस दुर्घटना पर लागू नहीं होगा। लेकिन फिर भी इस विमान हादसे में मारे गए लोगो को भी मुआवजा मिल सकता है,क्योंकि चार्टर्ड विमानों के क्रैश होने पर जान गंवाने वालों या गंभीर रूप से घायलों को मुआवजा मिलता है, लेकिन यह मुआवजा राशि पहले से निर्धारित नहीं होती, ऐसे मामलों में चार्टर्ड ऑपरेटर जैसे अजित पवार के मामले में वीएसआर कंपनी के पास थर्ड पार्टी इंश्योतरेंस जरूर होना चाहिए। इसी इंश्योरेंस के तहत पीडि़तों को मुआवजा दिया जाता है।

मुआवजा दावा की प्रक्रिया

चार्टर्ड विमानों के हादसे के बाद अगर विमान कम्पनी या फिर इंश्योरेंस कम्पनी मुआवजा न दे तो मुआवजे का दावा करने के लिए सिविल कोर्ट में 3 साल के अंदर व उपभोक्ताय अदालत में 2 साल के अंदर मुकदमा दायर कर सकते हैं। इसमें मुआवजा राशि पीडि़त की उम्र, कमाई, आश्रितों आदि के आधार पर तय होती है। चार्टर्ड विमानों के मामले में औसत मुआवजा 50 लाख से 2 करोड़ होता है।

गलती या खराबी का सबूत

चार्टर्ड विमानों के हादसे में चूंकि मॉन्ट्रियल कन्वेंशन का नियम लागू नहीं होता है और इसमें मुआवजा पाने के लिए गलती साबित करना जरूरी होता है, जैसे पायलट की लापरवाही या फिर विमान में आई तकनीकी खराबी को सिद्ध करना जरूरी है। लेकिन, अगर यह हादसा बिना किसी की गलती या बिना किसी लापरवाही के हुआ है और इसके पीछे खराब मौसम वजह है तो फिर मुआवजे से इनकार भी किया जा सकता है।

कंपनियों की साझा जिम्मेदारी

मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत हर यात्री के लिए 128,821 स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स तक का मुआवजा तय है, भारतीय करेंसी में यह राशि लगभग 1.4 करोड़ रुपये होती है। यदि सिद्ध हो जाए कि हादसा एयरलाइंस की लापरवाही से हुआ, तो मुआवजा राशि और भी अधिक हो सकती है। भारतीय एयरलाइंस कंपनियां घरेलू उड़ानों में भी यात्रियों को लगभग वैसी ही सुरक्षा देती हैं,जैसी अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों में दी जाती है। घरेलू उड़ानों में मुआवजा राशि अलग-अलग हो सकती है जिसे अदा करने की एयरलाइन व इंश्योरेंस कंपनी की साझा जिम्मेदारी है।

 -लेखक उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।

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