भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, आरएसी टिकट की स्थिति में दोनों यात्रियों को अलग-अलग बेडरोल दिए जाने चाहिए। लेकिन प्रयागराज से दिल्ली 3 AC कोच में सफर के दौरान दो लोगों को एक ही कंबल व तकिया मिला। मांगने पर मना कर दिया। यात्री ने बिना बेडरोल रात काटी। पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने यह मामला सेवा में कमी का माना और रेलवे पर हर्जाना लगाया है।
रेलवे अपने सभी एसी कोच में यात्रियों को चादर, तकिया, तौलिया और कंबल उपलब्ध कराता है,ताकि यात्री आसानी से अपनी यात्रा पूरी सकें और उन्हें कोई समस्या न हो। बता दें कि 3 AC, 2AC और 1AC के सभी कोच में टिकट के साथ ही बेडरोल की सुविधा होती है, इसके लिए कोई अतिरिक्त। शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, कुछ स्लीकपर ट्रेनों में भी अगर आप बेडरोल मांगते हैं तो दिया जाता है, जिनमें दुरंतो और गरीब रथ आदि शामिल हैं। अगर किसी वजह से आपको बेड-रोल नहीं मिलता है, तो आप डेस्टिनेशन स्टेशन पर 20 रुपये वापसी के हकदार होंगे, हालांकि इस शुल्क वापसी के लिए उपभोक्ता का क्लेम ट्रेन के पहुंचने के 20 घंटे के अंदर पंजीकृत हो जाना चाहिए। शुल्क वापसी के क्लेम के साथ उपभोक्ता को यात्रा टिकट और टीटीई का बेड-रोल न मिलने का प्रमाण पत्र भी देना होगा।
गंदे बेडशीट और कंबल की शिकायत
इसी प्रकार से भारतीय रेलवे के एसी कोच में कई बार यात्रियों को गंदे बेडशीट और कंबल मिल जाते हैं। ऐसी स्थिति में यात्री सीधे कोच अटेंडेंट से शिकायत कर सकते हैं। अगर समस्या हल न हो तो रेल यात्री हेल्पलाइन नंबर 139 पर शिकायत कर सकते हैं। उपभोक्ता की शिकायत पहले कंट्रोल रूम से संबंधित जोन और डिवीजन तक पहुंचाई जाती है। अगर समस्या ट्रेन में ही सुलझाई जा सकती है तो तुरंत कार्रवाई होती है। चादर और कंबल बदलवाने जैसी शिकायतों का समाधान आमतौर पर मिनटों में ही हो जाता है। लेकिन अगर किसी शिकायत पर 2 घंटे के भीतर तक कार्रवाई नहीं होती है तो वह सीधी रेल मंत्रालय तक पहुंच जाती है। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी को जवाब देना पड़ता है। यही कारण है कि कर्मचारी की ओर से लापरवाही की संभावना कम रहती है। इसके लिए मंत्रालय यात्रियों से कई बार रेंडम फीडबैक भी लेता रहता है।
रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार चादर, तकिया और तौलिया हर बार इस्तेमाल के बाद धोए जाते हैं। इसके लिए देशभर में 40 डिपार्टमेंटल लॉन्ड्री और 25 बोट लॉन्ड्री बनाई गई हैं। हालांकि कंबलों की धुलाई महीने में सिर्फ एक बार की जाती है।
अलग से बेडरोल न देने के मामले में जुर्माना
दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए भारतीय रेलवे पर 25 हजार रुपये का हर्जाना ठोका है। यह कार्रवाई एसी कोच में सफर कर रहे आरएसी यात्री को अलग से बेडरोल (कंबल और तकिया) न देने के मामले में यानी सेवा में कमी बरतने के कारण की गई है। यह मामला अक्तूबर 2022 का है, जब एक यात्री ने प्रयागराज से दिल्ली के लिए 3 AC कोच में आरएसी टिकट पर यात्रा की थी,जहां उन्हें मांगने पर भी बेडरोल नहीं दिया गया। आरएसी टिकट होने के कारण यात्री को अपनी बर्थ एक अन्य अनजान सह-यात्री के साथ साझा करनी पड़ती है। कोच अटेंडेंट ने दोनों यात्रियों को पूरी रात इस्तेमाल करने के लिए सिर्फ एक कंबल और एक ही तकिया दिया। यात्री द्वारा अलग कंबल व तकिया मांगने पर साफ मना कर दिया गया कि आरएसी बर्थ पर एक ही बेडरोल सेट मिलता है,जबकि ऐसा नहीं है। रेलवे नियमों के तहत आरएसी में दोनों यात्रियों को अलग-अलग बेडरोल दिए जाने की व्यवस्था है।
यात्री अलग बेडरोल पाने के हकदार
दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि रेलवे बोर्ड के 2009 के नियमों के मुताबिक, आरएसी यात्रियों के टिकट किराए में भी बेडरोल का पूरा शुल्क शामिल होता है। इसलिए वे अलग बेडरोल पाने के हकदार हैं। आयोग ने रेलवे को आदेश दिया कि वह उपभोक्ता को 20 हजार रुपये मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के मुआवजे के रूप में और 5 हजार रुपये अदालती खर्च के तौर पर अदा करे।
-लेखक उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।

