हमारे लिए सुविधाजनक स्मार्टफोन, पीसी, लैपटाप व क्लाउड बेस्ड वॉयस असिस्टेंट जैसे डिजिटल डिवाइस हमारी जासूसी भी करते हैं। दरअसल इनके बातचीत, सर्च, कैमरा निगरानी और वीडियो मीटिंग जैसे कई उपयोग हैं। इनके सॉफ्टवेयर व एप उपयोग से पहले परमिशन मांगते हैं फिर वे हमारी गतिविधि का डाटा प्राप्त करते हैं। यह निजी डेटा किसी तीसरे पक्ष या हैकरों तक पहुंच सकता है।
सभी स्तरों की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रश्न पत्र में सामान्य ज्ञान का प्रमुख व बड़ा हिस्सा होता है या फिर एक अलग पेपर ही निर्धारित होता है। चाहे वह एग्जाम किसी शैक्षणिक कोर्स में प्रवेश के लिए हों या फिर नौकरी आदि के लिए, उम्मीदवारों का सामान्य ज्ञान बेहतर होना जरूरी है। यह ज्ञान विभिन्न क्षेत्रों का होता है। जानिये तकनीक के क्षेत्र से कि स्मार्टफोन और अन्य उपकरण कैसे ‘डिजिटल जासूस’ की तरह काम करते हैं।
पॉकेट में’ डिजिटल जासूस’
स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरण हमारी सुविधा के लिए बनाए गए हैं, लेकिन ये अनजाने में एक ‘डिजिटल जासूस’ की तरह काम करते हैं। ये हमारी हर गतिविधि का डेटा इकट्ठा करते हैं और विभिन्न लोगों को बेचते या बांट देते हैं। यह जासूसी मुख्य रूप से विज्ञापनों, सरकारी निगरानी या साइबर अपराधियों द्वारा की जाती है।
लोकेशन ट्रैकिंग (आप कहां हैं?)
आपका फोन हर समय यह रिकॉर्ड करता है कि आप कहां जा रहे हैं। लगभग हर सरकारी एजेंसी, विज्ञापन कंपनी या हैकर आराम से आपकी लोकेशन का पता लगा सकता है। जीपीएस,मैप, वेदर ऐप और यहां तक कि फोटो गैलरी भी आपके सटीक स्थान को ट्रैक करती है। कई ऐप बैकग्राउंड ट्रैकिंग करते हैं यानी लोकेशन सर्विस बंद होने पर भी वाईफाई सिग्नल्स, ब्लूटूथ बीकन और सेल टावर के जरिए आपका पता लगा लेते हैं। इस डेटा से आपकी आदतों और स्थान का पता लगाया जा सकता है।
माइक्रोफोन और कैमरा
इन डिवाइसेज से पता चल सकता है कि आप क्या कह रहे हैं और देख रहे हैं? स्मार्टफोन के सेंसर आपकी निजी बातचीत और दृश्यों तक पहुंच सकते हैं। ये 24×7 आपकी बात सुनते हैं। वॉयस असिस्टेंट जैसे एलेक्सा ‘वेक वर्ड्स’ सुनने के लिए माइक्रोफोन को हमेशा चालू रखते हैं। आपने गौर किया होगा तो पाएंगे कि किसी चीज़ के बारे में बात करने के तुरंत बाद फोन पर उसी से संबंधित विज्ञापन दिखने लगते हैं। कुछ आधुनिक तकनीकें तो सामने वाले कैमरे के जरिए आपके चेहरे के रक्त प्रवाह और पुतलियों के आकार को पढ़कर आपके मूड और रुचि को भी समझ सकती हैं।
डिजिटल फुटप्रिंट और ऐप परमिशन (पसंद का ज्ञान )जब आप कोई ऐप इंस्टॉल करते हैं, तो वह कई परमिशन मांगता है जो उसकी ज़रूरत से ज़्यादा होती हैं। मूल रूप से यह डेटा शेयरिंग के लिए होती है। ऐप आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट, मैसेज, कॉल लॉग और ब्राउज़िंग हिस्ट्री को एक्सेस करते हैं। ये आपके व्यवहार संबंधी डेटा पर नजर रखते हैं, जैसे आप स्क्रीन पर कितनी देर रुके, किस खबर पर होवर किया या कितनी तेज़ी से स्क्रॉल किया, यह सब रिकॉर्ड होता है ताकि आपका मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल बनायी जा सके।
स्पाईवेयर और मैलवेयर (असली जासूसी)
यह सबसे खतरनाक स्तर है जहां अपराधी आपके फोन में दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर डाल देते हैं। कीलॉगर्स जैसे सॉफ़्टवेयर आपके द्वारा टाइप किए गए हर अक्षर (जैसे पासवर्ड, बैंक डिटेल्स) को रिकॉर्ड कर लेते हैं। जबकि स्टॉकवेयर गुप्त रूप से फोन में रहता है और दूर बैठे व्यक्ति को आपकी गैलरी, कॉल और चैट का एक्सेस दे देता है। बीते दिनों आपने पेगासस का नाम सुना होगा। यह एक ऐसा शक्तिशाली स्पाईवेयर है जिसका उपयोग दुनिया भर में महत्वपूर्ण व्यक्तियों की जासूसी के लिए किया गया है।
सावधानी
बचाव के लिए हमेशा ऐप की परमिशन चेक करें, अनजान लिंक पर क्लिक न करें और समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट करते रहें। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, स्मार्टफोन ‘ऑलवेज-ऑन’ सैटेलाइट ट्रैकिंग प्रस्तावों और उन्नत स्पाईवेयर के माध्यम से निरंतर निगरानी यंत्र के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो यूजर्स की गोपनीयता के लिए गंभीर खतरा हैं। ये उपकरण माइक्रोफोन, व्यवहार विश्लेषण और बैकग्राउंड डेटा एक्सेस के द्वारा बिना अनुमति के जासूसी कर रहे हैं।
जासूसी के कुछ मुख्य संकेत
*बैटरी का बहुत तेज़ी से खत्म होना। *फोन का बिना इस्तेमाल किए ही गर्म होना। *डेटा की खपत अचानक बढ़ जाना। *बिना किसी कारण फोन की लाइट जलना या कैमरा/माइक का हरा/नारंगी बिंदु दिखना।

