भागदौड़ भरी जिंदगी के चलते खाना ऑनलाइन ऑर्डर करने का ट्रेंड बढ़ा है। सिर्फ 10 मिनट में खाना पहुंचाने के दावे वाले वाले कई ऑनलाइन फूड आउटलेट हैं। शहरों में पढ़ाई या जॉब करने वाले युवा या फिर अनेक कामकाजी कपल भी फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म से खाना ऑनलाइन मंगाते हैं। हालांकि इन खानों की गुणवत्ता को लेकर दावे किए जाते हैं लेकिन असल में दोबारा गर्म किये गये, प्रिजर्वेटिव की मदद से कई दिन मेंटेन होते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदेह हैं। ऐसे में छानबीन के बाद ही ऑर्डर करें।
दाल मखनी हो या मटर पनीर, चिकन बिरयानी हो या हो पावभाजी, आइस्क्रीम हो गुलाब जामुन या हो चॉकलेट केक, आजकल 10 मिनट में या कुछ मिनटों में ही घर तक पहुंचाया जा सकता है। आपको करना क्या है, बस एप डाउनलोड कर पसंदीदा खाना मंगाना होता है, जो आपके ऑर्डर करने के बाद मात्र कुछ मिनट के भीतर आपके घर तक पहुंचा दिया जाता है। भारत के हर रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन का यह एक ऐसा नेटवर्क है, जो तुरंत सेवा देने की होड़ में लगा है। इस क्विक यानी तुरत-फुरत डिलीवरी ने सबको यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि चंद मिनट के अंदर ऑर्डर किया गया यह खाना, हमारी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है।
झटपट पकाने पर गुणवत्ता का सवाल
मिनटों में ही ताजा खाना सुनने में ही थोड़ा अटपटा लगता है, क्योंकि घर में यदि हम कुछ सोचकर कि क्या बनाएं, उसके लिए सामान इकट्ठा करने में ही हमें 10-15 मिनट लग जाते हैं, इतने कम समय में भला खाना बन कैसे सकता है। हालांकि कुछ ऐसी आइटम्स है, जिन्हें एक साथ बनाकर रख लिया जाता है और उन्हें गर्म करके परोसा जाता है। लेकिन मोमोज, चिकन विंग्स, बरगर, फिश या चिकन को कैसे चंद मिनट में पकाकर पैक किया जा सकता है। क्योंकि भोजन को कुछ मिनट में ही डिलीवर करने के लिए उसे बहुत ही कम समय में पकाना होता है। दरअसल हमें चंद मिनट्स में परोसा जाने वाला खाना, अल्ट्रा प्रोसेस्ड, पहले से पका हुआ, पकाने के बाद फ्रीज किया हुआ और फिर माइक्रोवेव किया हुआ, इसके बाद डिलीवर किया जाता है। यह खाना जो आज हमारे घरों में कुछ ही मिनट के भीतर पहुंचता है, इसको पकाने के बाद फ्रोजन करने के अलावा इनमें कई रंग और स्वाद जैसे कृत्रिम तत्व मिलाए जाते हैं। इन्हें स्वादिष्ट बनाने के लिए कैमिकलयुक्त मसाले डाले जाते हैं। इन खाद्य पदार्थों में शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली संतृप्त वसा और शर्करा तथा कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा मात्रा में होते हैं। इन्हें जब उच्च तापमान पर पकाया और माइक्रोवेव किया जाता है, उस दौरान इनमें कई ऐसे तत्व और यौगिक निर्मित होते हैं, जो डायबिटीज, किडनी फेल्योर जैसी बीमारियों की वजह बनते हैं। इन तमाम खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इनमें ऐसे पदार्थ शामिल किए जाते हैं, जो हमारी सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह होते हैं।
सेहत के जोखिम
डिब्बाबंद दालें और जमे हुए खाद्य पदार्थ जो हमें परोसे जाते हैं, इन्हें 100 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर पकाए जाने के बाद इन्हें ठंडा करने की बजाय जीरो से माइनस 4 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर ब्लास्ट चिलर में रखा जाता है। पके हुए भोजन को कमरे के तापमान पर छोड़ना या फ्रीज किए बिना उन्हें फिर से गर्म करना, इससे भोजन के सभी पोषक तत्व तो नष्ट होते ही हैं, इसके अलावा मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग जैसी बीमारियां होने के भी खतरे रहते हैं। भले ही मिनटों में डिलीवर किये गये इन खानों की गुणवत्ता को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हों और बचाव के लिए इन्हें तापमान नियंत्रित वातावरण में सुरक्षित रखने और कम से कम तैयारी के समय वाले व्यंजनों पर फोकस करने का दावा किया जाता हो और दो किलोमीटर के भीतर ही डिलीवरी सेवाएं देने की बातें कही जाती हों, इसके बावजूद यह मानकर चलें कि पहले से बने खाने को दोबारा गर्म करने से उसकी पौष्टिकता पर तो बुरा असर होता ही है, उन खानों को कई दिनों तक फ्रीज करने से भी वह सेहत के लिए कितना नुकसानदेह हो सकता है, इसका हम अंदाजा लगा सकते हैं।
पोषण से रहित पैकेज्ड फूड
फटाफट डिलीवरी की यह सुविधा हमारी अधीर पीढ़ी के लिए भले ही सुविधाजनक हो, लेकिन इसकी कीमत काफी ज्यादा है। क्योंकि तेज डिलीवरी गुणवत्ता से कम्प्रोमाइज करती है, ताजी और पौष्टिक सामग्री के बजाय हमारे हाथों में थमाया गया यह पैकेज्ड फूड पोषण से रहित होता है। हम तक इन्हें कुछ ही मिनट तक पहुंचाने वालों को हमारे स्वास्थ्य से क्या लेना-देना, जहां गति को ही प्राथमिकता दी जाती है। लंबे समय तक संरक्षित यह भोजन हमारे लिए कैंसर के खतरे बढ़ा रहा है, इससे हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और दिल की बीमारियां होने के खतरे बढ़ रहे हैं। पोषक तत्वों से भरपूर ताजा खाना जिसे बनने में समय लगे, वही हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। चाहे वह खाना घर पर बने, किसी रेस्टोरेंट या किसी ठेली पर। ताजा खाना ही हमें लाभ देता है। इनमें पोषक तत्व भी संरक्षित रहते हैं। यह जल्दी पचता है और इससे बीमार होने के खतरे भी कम होते हैं।
ऑनलाइन ऑर्डर से पूर्व जरूरी छानबीन
हर किसी के घर में खाना बनाना तो संभव नहीं होता। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां देश का यूथ अपना घर छोड़कर रोजी रोटी की तलाश में घर से बाहर है, जिसके पास बाहर के खाने का कोई विकल्प ही नहीं है और जिन्हें दिन में तीनों टाइम बाहर के खाने पर ही निर्भर होना पड़ता है, उनके लिए यह जरूरी है कि वह उसी रेस्टोरेंट से खाने का ऑर्डर करें, जहां सचमुच ताजा खाना परोसा जाता हो। ऑनलाइन समीक्षाएं देखकर ही खाना ऑर्डर करें। खाना ऑडर करते समय ऐसे मैन्यू से बचें, जिनमें लंबे समय तक पकाकर खानों को सुरक्षित रखा जाता है। खाने की ऐसी चीजें चुनें, जो सरल हों और जिनको बनाने में ज्यादा से ज्यादा प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल हों। चंद मिनटों में खाना डिलीवरी करने का चलन हमें सुविधा तो देता है लेकिन यह सुविधा हमें अपने स्वास्थ्य की कीमत पर हासिल होती है। तेजी के चक्कर में पोषण से समझौता करने की बजाय ताजा और पौष्टिक खाना चुनें, जो हमारे शरीर को बीमारियों का घर न बनाए।-इ.रि.सें.

