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रिश्ते सहेजने से ही आयेगी जीवन में वासंती रंगत

वसंत पंचमी -23 जनवरी

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सौंदर्य की ऋतु वसंत जीवन के हर पक्ष पर नई रंगत को जीने का पाठ पढ़ाती है। प्रकृति में फूलों की भांति भावों का भी खिलना जरूरी है। ताकि रिश्तों में भी वासंती छटा का अहसास बना रहे। कटु अनुभवों को बिसराकर आगे बढ़कर ही यह संभव है। इसीलिए इमोशनल फ्रंट पर आयी नकारात्मकता साफ करते रहें। जहां पुराना रिश्ता सहेजने की गुंजाइश न बचे वहां जीवन सहज बनाने वाले नये रिश्तों संग आगे बढ़ें ताकि जीवन में वासंती रंगत आये।

वसंत, नयेपन की रुत है। नये रंगों का मौसम है। नव उल्लास के भाव की आबोहवा हर ओर फैलने के दिन हैं। यह ठहराव को गति देने वाली ऋतु है। ध्यान रहे कि परिवेश में खिलते रंग परिवार में खिलते-मुरझाते भावों से भी जुड़े हैं। अपनों के संग ही अपनेपन के रंग लिए इस मौसम में हर तरफ खिले फूल मोहक लगते हैं। जैसे वसंत में प्रकृति नया रूप धारण कर सामने आती है वैसे ही रिश्तों में भी वसंत बनाए रखने के लिए कटु अनुभवों के पत्तों का मन की शाख से अलग हो जाना बेहतर है। पुरानी पीड़ाओं को भूलकर नये अहसासों की कलियों का चटखना बहुत ही जरूरी है। शीत ऋतु के एक ठहराव के बाद गुनगुनाने वाली प्रकृति से सम्बन्धों में आई स्थिरता से बाहर आने की सीख लेना भी आवश्यक है। सचमुच, वसंत में खिलखिलाती कुदरत से मिली छोटी-छोटी समझाइशों से रिश्तों का वसंत कायम रह सकता है।

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भावनात्मक रंग बचाएं

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किसी भी रिश्ते में भावनाओं के वासंती रंग सहेजने के लिए जरूरी है कि इमोशन्स बोझ ना बनें। इंसानी मन का उल्लास एक स्वतंत्र सहज भाव से ही पोषण पाता है। इसीलिए समय-समय पर इमोशनल फ्रंट पर जड़ें जमाने वाली नकारात्मकता को साफ करते रहें। इसे स्प्रिंग क्लीन भी कहा जाता है। यानी उन बातों और बर्ताव की डी- क्लटरिंग करना जो आपसी रिश्तों को बेरंग करती हैं चाहे वह परिवार में हों या फिर समाज में। जानी मानी क्लिनिकल सोशल वर्कर एमिली लैंबर्ट का कहना है कि ‘कल्पना करें कि आपके साथी के साथ आपका रिश्ता एक बगीचे जैसा है। इस रिश्ते में कौन से पौधे हैं जिन्हें हमें बाहर निकालना होगा ताकि यह बेहतर हो सके?’ देखा जाये तो यह बात हर रिश्ते पर लागू होती है। समय रहते उलझाऊ भावों की खरपतवार निकालना सम्बन्धों को फूलने-फलने का अवसर देता है। रिश्तों को बिना रुकावट सकारात्मक इमोशन्स का पोषण मिलता है। भावनाओं के चटक फूल खिलने के लिए किसी तरह की दुर्भावना को जड़ से उखाड़ फेंकना बहुत आवश्यक है।

बेझिझक आगे बढ़ें

कई रिश्तों में किसी भी तरह के रंग बचाए रखने की गुंजाइश नहीं बचती। मित्रता, रिश्तेदारी, आस-पड़ोस या करीबी संबंध। प्रकृति से सीख लेते हुए आगे बढ़ना सीखें। नये रिश्तों की कलियों को खिलने का मौका दें। बिना किसी अपराधबोध के अपने जीवन में जुड़ाव की नई कोंपलों का स्वागत करें। विलियम मॉरिस के अनुसार, ‘अपने घर में ऐसा कुछ भी न रखें जिसके बारे में आप न जानते हों कि वह उपयोगी है, या जिसके बारे में आप नहीं जानते कि वह सुंदर है।’ यहां यक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि फिर जीवन में ऐसा कुछ क्यों रखा जाए? यह बात भी अकसर हमारे रिश्तों पर गहराई से लागू होती है। ऐसे में ना केवल ऐसे रिश्तों को छोड़ बेझिझक आगे बढ़ें बल्कि उन सम्बन्धों को पोषित करने में रुचि लें जो जीवन को सहज व सुंदर बनाने वाले हैं। उलझाव और बिखराव आपकी झोली में डालने वाले संबंध आपके मन का मौसम कभी नहीं बदलने देंगे। साथ स्नेह के सुंदर फूल खिलने की रुत सदा जीवन को खुशहाल रखेगी।

नई रंगत का स्वागत

रिश्तों में समयानुसार नये रंग-ढंग भी अपनाएं। अपनों का मन रखने की बात हो या सफिर ्वयं कुछ अलग करने की चाह हो। यहां यह बात खास है किनयापन अपनाने में कोताही ना करें। वसंत ऋतु की सबसे प्यारी सीख यही है कि जीवन में हर रंग का स्वागत हो। वसंत तो यूं भी आकर्षक, ऊर्जावान बने रहने और सुंदर भावनाओं को मन में जगाने का संदेश साथ लाता है। यह खिलखिलाने की रुत है। जुड़ाव के भाव का उत्सव मनाने का मौसम है। सौंदर्य की यह ऋतु जीवन के हर पक्ष पर नई रंगत को जीने का पाठ पढ़ाती है। नयेपन को जीने का भाव-चाव तो मन को गतिशील रखता है। आशावादी सोच से जोड़ता है। आज बढ़ते अकेलेपन और भागमभाग के बावजूद ठहरे से लगते जीवन में नयापन बेहद आवश्यक है। जिसका अर्थ है कि न्यूनेस, साथ समय बिताने से लेकर कुछ नया सीखने और रिश्तों के लिए कुछ विशेष करने तक, किसी भी मोर्चे पर अपनाया जा सकता है। जो जीवन के हर पड़ाव को सुरम्य बना सकता है।

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