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पेशेवर पर्सनैलिटी का आईना है ऑनलाइन मीटिंग

कैरियर ग्रोथ का नया मंच

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दूरस्थ कार्य संस्कृति ने ऑनलाइन मीटिंग को रोजमर्रा के प्रोफेशनल जीवन का हिस्सा बना दिया है। टीम मीटिंग से लेकर क्लाइंट प्रजेंटेशन, नौकरी के साक्षात्कार, वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तक कई महत्वपूर्ण और पेशेवर संवाद अब स्क्रीन पर होते हैं। ऐसे में समय पर मीटिंग में जुड़ना, ध्यान से सुनना, उचित समय पर बोलना, अपनी बात को तार्किक तरीके से संक्षेप में रखना और समस्या के साथ समाधान सुझाना, आपके प्रमोशन का आधार भी बन सकता है।

सोचिए सुबह के 10 बजने में दो मिनट बाकी हैं। लैपटॉप खुल चुका है। कैमरा ऑन है। स्क्रीन पर एक-एक करके कई चेहरे उभर रहे हैं। किसी के पीछे किताबों की अलमारी है। कोई इस मीटिंग में सीधे कार से जुड़ा है। किसी के कान में ईयर फोन हैं और कोई अपना माइक्रोफोन खोज रहा है। मीटिंग शुरू होती है, बॉस एक सवाल पूछते हैं- कुछ सेकेंड की खामोशी के बाद एक युवा अपनी बात शुरू करता है- आवाज साफ, जवाब संक्षिप्त, आंकड़े आकर्षक और अंत में एक व्यावहारिक सुझाव। दस मिनट बाद मीटिंग खत्म हो जाती है। लेकिन संभव है उस युवा के लिए असली प्रक्रिया यहीं से शुरू हुई हो। क्योंकि ऑनलाइन मीटिंग में केवल काम की समीक्षा नहीं होती बल्कि आपकी तैयारी, संवाद क्षमता, आत्मविश्वास, सुनने की आदत, समस्या को समझने का तरीका और नेतृत्व की संभावना- सब कुछ स्क्रीन पर दिखायी देता है। दरअसल ऑफिस की मेज अब केवल ऑफिस में नहीं है, वह आपके लैपटॉप की स्क्रीन के दूसरी तरफ भी है और इस स्क्रीन के उस पार अब आपका अगला कैरियर अवसर भी हो सकता है।

ऑनलाइन मीटिंग की समझें अहमियत

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हाईब्रिड और दूरस्थ कार्य संस्कृति ने ऑनलाइन मीटिंग को रोजमर्रा के प्रोफेशनल जीवन का हिस्सा बना दिया है। टीम मीटिंग से लेकर क्लाइंट प्रजेंटेशन, नौकरी के साक्षात्कार, वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तक कई महत्वपूर्ण और पेशेवर संवाद अब स्क्रीन पर होते हैं। इस बदलाव ने एक दिलचस्प स्थिति पैदा कर दी है। पहले ऑफिस में किसी कर्मचारी के बारे में उसकी लगातार मौजूदगी, सहकर्मियों से व्यवहार और रोजमर्रा की गतिविधियों से काफी कुछ समझा जाता था, अब इन अनुभवों का एक हिस्सा ऑनलाइन व्यवहार से बनता है। यही वजह है कि ऑनलाइन मीटिंग को अब हल्के में लेना महंगा पड़ सकता है। मीटिंग में देर से जुड़ना, लगातार कैमरा बंद रखना, दूसरों की बात बिना वाजिब तर्क के काटना, सवाल पूछे जाने पर लंबा और अस्पष्ट जवाब देना या ज्यादातर बातों पर चुप रहना- ये छोटी बातें लग सकती हैं। लेकिन बार-बार इन्हें दोहराये जाने पर ये आपकी पेशेवर छवि का हिस्सा बन जाती हैं। जबकि इसके उलट समय पर मीटिंग में जुड़ना, ध्यान से सुनना, उचित समय पर बोलना, अपनी बात को तार्किक तरीके से संक्षेप में रखना और समस्या के साथ समाधान सुझाना, सिर्फ आपके आकर्षक व्यक्तित्व का हिस्सा ही नहीं, आपके प्रमोशन का ठोस आधार भी बन सकता है।

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कैमरा सिर्फ चेहरा नहीं पढ़ता

याद रखिए ऑनलाइन मीटिंग में कैमरे की ताकत बहुत चुबंकीय होती है। वह केवल चेहरा नहीं देखता, आपकी समूची वर्चुअल बॉडी लैंग्वेज को स्कैन कर रहा होता है। जब आप बोलने वाले व्यक्ति की ओर ध्यान देते हैं, तब क्या आपकी आंखें बार-बार दूसरी स्क्रीन पर जा रही हैं? क्या आप जरूरत से ज्यादा तेज बोल रहे हैं? क्या सवाल सुनने से पहले ही जवाब देना शुरू कर देते हैं? कैमरा ध्यान से देखता है कि असहमति के समय आप असहज तो नहीं हो जाते? इन छोटी प्रतिक्रियाओं को मामूली न समझें। ये आपके व्यक्तित्व का समूचा आधार बन जाती हैं। हालांकि कोई कह सकता है कि किसी के व्यक्तित्व का वैज्ञानिक आकलन भला एक ऑनलाइन मीटिंग के जरिये कैसे संभव है? लेकिन पेशेवर संदर्भ में लगातार दिखायी देने वाला व्यवहार आपकी कार्यशैली के बारे में एक धारणा जरूर बना सकता है। इसलिए कैमरे के सामने ‘एक्टिंग’ करने की जरूरत नहीं है। वहां जरूरत है, आपके सजग और स्वाभाविक पेशेवर व्यवहार की।

ज्यादा बोलना, प्रभावशाली होना नहीं

ऑनलाइन मीटिंग को लेकर एक बड़ा भ्रम है, कई लोग सोचते हैं कि जो ऐसी मीटिंग के दौरान सबसे ज्यादा बोलता है, वही सबसे प्रभावशाली माना जाता है। जबकि हकीकत कई बार इसके बिल्कुल उलट होती है। अच्छा पेशेवर वह है, जो पहले सवाल को ध्यान से सुने, अच्छी तरह से समझे, दूसरों की बात पर गहराई से ध्यान देता महसूस हो और फिर उतना ही नपा-तुला मगर प्रभावशाली तरीके से बोले, जितने की वास्तव में जरूरत हो। ऐसे लोग ज्यादा बोलने वालों से कहीं ज्यादा प्रभावशाली साबित होते हैं। एक प्रभावी उत्तर की संरचना होती है- समस्या क्या है, तथ्य क्या कहते हैं, समाधान क्या हो सकता है और अगला ठोस तथा जरूरी कदम क्या होना चाहिए?

असहमति भी एक खूबी है

किसी मीटिंग में सबका एकमत होना जरूरी नहीं है। क्योंकि वास्तविक पेशेवर जीवन में असहमति अपरिहार्य होती है। असली परीक्षा यह है कि आप असहमति व्यक्त कैसे करते हैं? ‘आप गलत हैं’ इसे कहने की बजाय ‘मेरे आंकड़ों के आधार पर तस्वीर थोड़ी अलग दिखायी देती है’, कहना केवल भाषा का फर्क नहीं है। यह संवाद में सम्मान, आत्मविश्वास और तर्क- तीनों को साथ-साथ रखता है। ऐसा व्यक्ति धीरे-धीरे टीम में उस भूमिका की ओर बढ़ सकता है, जहां उसे केवल काम पूरा करने की नहीं, सोचने और निर्णय में योगदान देने की अपेक्षा भी की जाती है।

होमवर्क की जरूरत

किसी भी मीटिंग में हिस्सा लेने से पहले इसके लिए अच्छी तैयारी करना सफलता के लिए जरूरी होता है। ऑनलाइन मीटिंग में भी यह मंत्र काम करता है। वास्तव में अच्छी ऑनलाइन मीटिंग कैमरा ऑन होने से 5 मिनट पहले शुरू नहीं होती, उसकी तैयारी घंटों पहले शुरू हो चुकी होती है। मीटिंग का एजेंडा पढ़ना, जरूरी आंकड़े देखना, संभावित सवालों की सूची बनाना और बात के दो-तीन मुख्य बिंदु पहले से ही तैयार करके रख लेना बहुत फर्क डाल सकता है। खासकर मीटिंग से पहले अपने उत्तर को कैमरे के सामने बोलकर देखना बेहद उपयोगी होता है। इससे पता चलता है कि आप बहुत तेज तो नहीं बोल रहे, उत्तर ज्यादा लंबा तो नहीं और उत्तर देते हुए आपका चेहरा स्वाभाविक है या नहीं।

ताकि बाद में भी बना रहे प्रभाव

अच्छी ऑनलाइन मीटिंग वह है, जिसमें आपका प्रभाव मीटिंग खत्म होने के बाद भी बना रहे। क्योंकि ऑनलाइन मीटिंग की सबसे अनदेखी की गई कला है- फॉलो। मीटिंग में आपने अच्छी बात कही, लेकिन उसके बाद क्या हुआ? यदि आप चर्चा के मुख्य निर्णय, अपनी जिम्मेदारी और अगला कदम स्पष्ट करते हुए एक छोटा सा संदेश भेजते हैं, तो आपकी छवि जिम्मेदार और गंभीर व्यक्ति की बनती है। दरअसल ऑनलाइन मीटिंग आपके व्यक्तित्व का ही नहीं, आपके कैरियर का एक नया और ज्यादा साफ दिखाने वाला आईना है। तकनीकें बदलती रहेंगी, वीडियो प्लेटफॉर्म बदलेंगे, लेकिन एक चीज बनी रहेगी- दूसरों के साथ कैमरे के सामने आप कितने प्रभावी ढंग से पेश आते हैं। इसलिए अगली बार जब स्क्रीन पर ‘ज्वाइन मीटिंग’ आइकन दिखायी दे, तो उसे केवल एक बटन न समझें। हो सकता है, वो आपके कैरियर का एक छोटा सा मंच हो और कैमरे के उस पार बैठा व्यक्ति केवल आपकी आज की भूमिका नहीं बल्कि आपमें कल की संभावना भी देख रहा हो। -इ.रि.सें.

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