एक दौर में किचन में काम करना मजबूरी समझा जाने लगा था लेकिन अब दोबारा कुकिंग का महत्व बढ़ा है। कई महिलाओं के लिए कुकिंग पैशन ही नहीं ,पैसे कमाने और सोशल मीडिया पर पॉपुलैरिटी हासिल करने का जरिया भी बन गया है। व्यस्त, कैरियर गढ़ने या पढ़ने में जुटे लोगों को अपनी रसोई से ताजा भोजन बनाकर खिलाती हैं।
एक तरफ जहां कुछ महिलाओं के लिए चौका-चूल्हा संभालना सिरदर्द या मजबूरी वाली जिम्मेदारी और कुछ कथित अतिप्रगतिशील महिलाओं के लिए पिछड़ेपन या कम पढ़े-लिखे होने की निशानी हो सकती है, वहीं कई महिलाओं ने कुकिंग को अब अपना पैशन ही नहीं बल्कि पैसे कमाने और पॉपुलैरिटी हासिल करने का जरिया भी बना लिया है।
पाक कला में बढ़ी है रुचि
जीवन को सकारात्मक तरीके से देखने वाली इन महिलाओं का मानना है कि जो भूमिका किसी पुजारी की मंदिर में होती है, किचन में वही भूमिका एक भारतीय महिला की होती है। चौके-चूल्हे से भारतीय महिलाओं का अनंत काल से चोली-दामन का साथ रहा है। जिन घरों में महिलाएं साफ-सुथरा, स्वादिष्ट ,सुपाच्य और स्वास्थ्यवर्धक भोजन बनाती हैं वहां रसोई घर से स्नेह और सरसता बरसती है। हो सकता है बीच के एक दौर में किचन का महत्व कुछ कम हुआ हो लेकिन अब दोबारा कुकिंग जिम्मेदारी के साथ-साथ एक हॉबी बनती जा रही है। आपको बड़े शहरों ही नहीं, छोटे कस्बों में भी टिफिन सर्विस चलाने वाली महिलाएं आसानी से मिल जाएंगी जो व्यस्त, अकेले कैरियर गढ़ने या पढ़ने में जुटे हुए लोगों को अपनी रसोई से ताजा भोजन बनाकर खिलाती हैं। इनकी टिफिन सर्विस की काफी डिमांड रहती है।
सोशल मीडिया से मिली धार
साथ ही सोशल मीडिया पर यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे मजबूत प्लेटफॉर्म्स का लाभ उठाकर अपनी कुकिंग स्किल को धार देते हुए पापुलैरिटी हासिल करने और अपनी दक्षता से लाखों फॉलोअर्स ,व्यूवर्स और कस्टमर पाकर अच्छी-खासी कमाई करने वाली महिलाएं भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुकिंग से संबंधित रेसिपी बताने वाले, फूड सर्व करने के निराले अंदाज सिखाने वाले कंटेंट की विजिबिलिटी और पापुलैरिटी बेहद प्रभावशाली है। इस धार और प्रभाव ने भी महिलाओं को अपने जन्मजात टैलेंट को निखारने, दूसरों के सामने दिखाने और इससे आय करने की ताकत दी है। यहां वे अपनी पाक कला लोगों को दिखा-सिखा और ऐसा करके उन्हें रिझा सकती हैं और साथ ही खुद भी चार पैसे कमा सकती हैं।
कैमरा बना प्रेरक साथी
अब रसोई घर में मेहनती और उद्यमी स्वभाव की महिलाओं को एक नया साथी मिल गया है जो न सिर्फ उनकी एक-एक गतिविधि को देखता है और रिकॉर्ड करता है बल्कि दुनिया को भी दिखाता है कि किस तरह वह अपने और परिवार के पसंदीदा व्यंजन एवं अन्य स्वादिष्ट व्यंजन बना रही हैं। इसके बदले में उन्हें शोहरत भी मिलती है और पैसे भी।
‘फूड स्टूडियो’ से घर वाले भी खुश
मौजूदा भाषा संस्कृति के अनुसार अब किचन को आप चाहें तो फूड स्टूडियो भी कह सकते हैं। एक वक्त था जब घरों में रोजाना दाल-चावल और रोटी-सब्जी ही बनते थे। सिर्फ तीज-त्योहार यानी होली ,दिवाली, नवरात्रि, करवाचौथ ,ओणम , नववर्ष,ईद , जन्मदिन या अन्य खुशी के मौके पर मिठाइयां और पकवान बनते थे लेकिन अब पहले वाली बात नहीं रही। अब तो जब मन, तभी स्पेशल डिशेज ,मिठाइयां, तरह-तरह के पेय,आइसक्रीम, केक आदि बन जाते हैं । यकीनन इससे गृहिणियों को खुशी मिलती है और परिजनों को नए-नए व्यंजन खाने का मौका।
किचन क्वीन बनी महिलाएं
आप देश में निशा मधुलिका, कविता सिंह, हिना बिष्ट, निकिता वर्मा, उमा रघुरामन, मोनिका गोवर्धन, पूजा ढींगरा ,मेघा कामदार ,नेहा दीपक सिंह जैसी लाखों की फैन फॉलोइंग वाली रेसिपी बताने वाली और तरह-तरह के लजीज व्यंजन बनाने वाली महिलाओं को देख सकते हैं। ऐसी महिलाओं की संख्या तो अनगिनत है जिनकी फैन फॉलोइंग हजारों में है। अब पुरुष भी इस क्षेत्र में कमाल दिखा रहे हैं। विदेशों में भी ऐसी महिलाओं की कमी नहीं जो अपने किचन में हुनर के बल पर
चर्चित हैं।
शिकायत नहीं, सुकून
हमेशा से कहा जाता रहा है कि महिलाएं अपने घर में जितना वक्त बिताती हैं उसमें विशेष रूप से किचन में ही उनका ज्यादा वक्त बीतता है। एक राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिक अखबार में प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट में बताया गया है कि कोविड काल के बाद तो महिलाओं का किचन में बीतने वाला समय पहले से भी ज्यादा बढ़ गया है। महाराष्ट्र के 10 शहरों में किए गए सर्वे में इसका पता चला है। अगर इसके बदले महिलाओं को थोड़ी प्रशंसा ,थोड़ा पैसा और थोड़ी शोहरत मिल जाए तो जाहिर है उन्हें शिकायत के बदले सुकून ही मिलेगा ।

