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अब वक्त जीने के तरीके में संतुलन का

अच्छी नौकरी और ज्यादा कमाई ही अब तक हम भारतीयों के कामयाबी के पैमाने रहे हैं। लेकिन कैरियर के लिए आपाधापी में तनाव से तन-मन की सेहत बिगड़ने लगी। ऐसे में इस साल से लोग वर्क-लाइफ संतुलन, दिनचर्या और...

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अच्छी नौकरी और ज्यादा कमाई ही अब तक हम भारतीयों के कामयाबी के पैमाने रहे हैं। लेकिन कैरियर के लिए आपाधापी में तनाव से तन-मन की सेहत बिगड़ने लगी। ऐसे में इस साल से लोग वर्क-लाइफ संतुलन, दिनचर्या और कम जरूरतों वाली जीवनशैली अपनाएंगे। हाइब्रिड वर्क कल्चर व तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल डिटॉक्स के प्रति रुझान बढ़ेगा।

साल 2026 की लाइफस्टाइल में जीवन जीने के तरीके में गहरे बदलाव साफ तौरपर देखने को मिलेंगे। ये बदलाव सिर्फ सतही फैशन या ट्रेंड के स्तर पर नहीं होंगे बल्कि हमारी सोच, प्राथमिकताओं और जीवन दर्शन के स्तर पर भी दिखेंगे। अगर इस सबको एक वाक्य में कहा जाए, तो साल 2026 तेज रफ्तार जीवनशैली का नहीं बल्कि संतुलित जीवनशैली का साल होने जा रहा है।

‘ज्यादा’ नहीं ‘जरूरी’ पर होगा जोर

इस साल लोग ज्यादा की तरफ न भागकर, जीवन में जरूरी यानी उचित की तरफ देखेंगे। व्यावहारिक तौरपर यह जीवनशैली हमें कम सामान, कम दिखावा और कम शोर की तरफ ले जायेगी। इस तरफ बढ़ने की और कई वजहें होंगी। मसलन जीवन में महंगाई का दबाव, जलवायु संकट, मानसिक थकान और अनिश्चित भविष्य। साल 2026 में मिनिमलिज्म मजबूरी नहीं, समझदारी की वजह भी होगी।

कामयाबी की बदलेगी परिभाषा

आज की तारीख में हम अच्छी नौकरी और ज्यादा से ज्यादा कमाई को अपनी सफलता का पैमाना मानते हैं। लेकिन साल 2026 में हमारी यह सोच बदलेगी। इस साल हम कामयाबी यानी अच्छी नौकरी और ज्यादा पैसे के मुकाबले मानसिक शांति को ज्यादा महत्वपूर्ण समझेंगे। समय की कीमत को, कमाई से ज्यादा महत्व देने वाले हैं और फैशन या दिखावे पर स्वास्थ्य के प्रति सजगता ज्यादा भारी पड़ेगी। इसकी एक वजह ये होगी कि एआई और आटोमेशन ने नौकरी की स्थिरता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। किसी की भी नौकरी सहजता से जा सकती है। वहीं युवा पीढ़ी ने पिछले कुछ सालों में महसूस किया है कि सब कुछ पाने के बाद भी एक खालीपन बना रहता है। इसलिए सब कुछ पाना अब कामयाबी की आखिरी परिभाषा नहीं होगी।

जीवन और काम का समीकरण

अब जीवन का मालिक एक अकेला काम नहीं रहेगा। अब जीवन पर काम का इतना दबाव नहीं होगा कि सिर्फ काम ही काम जिंदगी की प्राथमिकता रहे। अब काम और जीवन में एक व्यापक और समानुपातिक बदलाव देखने को मिलेगा। इस साल जो ट्रेंड सबसे ज्यादा दिखने वाले हैं, उनका रिश्ता भी जीवन और काम से सीधे-सीधे जुड़ता है। मसलन हाइब्रिड जॉब कल्चर 2026 में सबसे ज्यादा हाइब्रिड जॉब कल्चर के प्रति झुकाव देखने को मिलेगा। फ्रीलांस अब नये सिरे से प्रतिष्ठित हो रही गतिविधि है। पहले इसे लोग मजबूरी समझते थे लेकिन अब इसे अपने मन की मर्जी और और पसंद समझा जाने लगा है। साल 2026 में कॅरियर ब्रेक को सामाजिक स्वीकृति मिलेगी। असफलता के रूप में दर्ज नहीं होगा। वहीं अब हाईप्रोफेशनल पहचान वाले लोग सिर्फ मेट्रोज में ही नहीं बल्कि छोटे शहरों और दक्षिण भारत के तो गांवों में भी मिलेंगे।

दवा पर नहीं, दिनचर्या पर जोर

हम सब जानते हैं कि भारतीय दुनिया में सबसे ज्यादा दवाएं गटकते हैं। एंटीबायोटिक दवाएं खाना तो मानो भारतीयों का सबसे प्रिय शगल है। क्योंकि हम भारतीय स्वास्थ्य के प्रति सजग नहीं बल्कि ज्यादा चिंतित रहते हैं। लेकिन साल 2026 में हमारी इस पहचान को भी धक्का लगेगा। क्योंकि इस साल भारतीय अपने स्वास्थ्य के लिए दवा से ज्यादा दिनचर्या के बदलाव पर जोर देंगे। अच्छी नींद, तनाव से मुक्ति, बेहतर भोजन और भावनात्मक संतुलन पर ज्यादा सहज और आकर्षित दिखेंगे। क्योंकि हमारी लाइफस्टाइल में जो तेजी शामिल है, उसके चलते 30 से 40 की उम्र में ही बड़े पैमाने पर भारतीयों में स्वास्थ्य विकृतियां देखने को मिल रही हैं। आज 30 से 40 की उम्र में ही बहुत बड़े पैमाने पर भारतीय लोग लाइफस्टाइल डिजीज से पीड़ित हो रहे हैं। कोविड के बाद भारतीयों में बीमारी के प्रति डर और स्वास्थ्य के प्रति चेतना में बढ़ोत्तरी हुई है। अब आयुर्वेद और वेलनेस का जोर शोर से वैज्ञानिक पुनरोत्थान हो रहा है।

टेक्नोलॉजी से दूरी नहीं, यारी

हाल के सालों में जिस तरह से टेक्नोलॉजी के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं रहा, उस कारण अब टेक्नोलॉजी से भारतीयों की दूरियां कम होनी शुरू हो गई हैं लेकिन इस साल अनुमान है कि भारतीय हाल के किसी भी साल के मुकाबले कम फोन करेंगे और सोशल मीडिया में कम से कम समय जाया होने देंगे। सोशल मीडिया से चयनात्मक दूरी और डिजिटल डिटॉक्स रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी और सहज ढंग बन जायेगा। बड़े पैमाने में भारतीयों में डिजिटल थकान बढ़ चली है और आपाधापी में मन और तन दोनों की एकाग्रता में भारी कमी आयी है।

मौजूदा साल हमें अपने लाइफस्टाइल में रिश्तों की एक नई संस्कृति, खानपान में स्वास्थ्य के प्रति खास चेतनता का आग्रह और घर में हर समय काम में डूबे रहने की जगह बालकनी गार्डेंस की हवा और उपयोगी स्पेस के प्रति रुझान देखने को मिलेगा।

- इ.रि.सें.

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