‘मोहल्ला हेल्थकेयर’ मॉडल : रिहायशी कालोनियों में खुलेंगे नर्सिंग होम
नायब सरकार ने बनाई पॉलिसी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने जारी किया नोटिफिकेशन
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच हरियाणा सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को घर के नजदीक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने लाइसेंस प्राप्त रिहायशी कॉलोनियों में नर्सिंग होम खोलने की बहुप्रतीक्षित नीति जारी कर दी है। सरकार का दावा है कि यह फैसला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की मांग और आम लोगों को आपातकालीन व गुणवत्तापूर्ण इलाज उनके अपने इलाके में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस पॉलिसी पर मुहर लग चुकी है। अब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह ने इसका नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार का मानना है कि नियंत्रित और नियमनबद्ध तरीके से रिहायशी क्षेत्रों में छोटे नर्सिंग होम की अनुमति देने से न केवल इलाज सुलभ होगा, बल्कि अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों पर भी लगाम लगेगी।
बिल्डिंग कोड और पार्किंग नियम तय : सेक्टरों के क्लीनिक की परमिशन के साथ ही हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के नियम लागू होंगे। स्टिल्ट पार्किंग अनिवार्य होगी और एंबुलेंस सहित सभी वाहन प्लॉट के भीतर पार्क होंगे। फ्रंट बाउंड्री वॉल की अनुमति नहीं होगी। बेसमेंट में क्लीनिक, लैब या एक्स-रे की सुविधा दी जाएगी। रिहायशी मानकों के अनुरूप ही ऊंचाई और एफएआर नियम लागू होंगे।
परमिशन के लिए फीस : सरकार ने जोन के हिसाब से प्रति वर्ग गज शुल्क तय किया है। प्रदेश के शहरों को अहमियत के हिसाब से जोन में बांटा हुआ है। हाइपर जोन वाले शहरों में 10 हजार रुपये तथा हाई पोटेंशियल जाने वाले शहरों में 8 हजार रुपये प्रति वर्गगज फीस तय की है। मीडियम शहरों में यह फीस 6 हजार रुपये तथा लो पोटेंशियल शहरों में 4 हजार रुपये प्रति वर्गगज रहेगी। इन मामलों में ईडीसी (बाहरी विकास शुल्क) सहित कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
पूरी आवदेन प्रक्रिया होगी ऑनलाइन : टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह का कहना है कि नर्सिंग होम की परमिशन के लिए विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। स्वामित्व दस्तावेज, शपथ पत्र और शुल्क के साथ आवेदन जमा किया जाएगा। इसके लिए ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। साथ ही, बायो-मेडिकल वेस्ट के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में पंजीकरण करवाना होगा।
जानिए कौन खोल सकेगा नर्सिंग होम
नई नीति के तहत केवल वही डॉक्टर नर्सिंग होम खोल सकेंगे जिनके पास मेडिकल काउंसिल/आयुष काउंसिल का वैध पंजीकरण होगा। जो सक्रिय रूप से प्रैक्टिस कर रहे हों और आईएमए की स्थानीय शाखा में पंजीकृत हों। संबंधित प्लॉट का मालिकाना हक संबंधित डॉक्टर के नाम होना चाहिए। निर्धारित कन्वर्जन शुल्क जमा कर इसके लिए शपथ पत्र देना होगा। यह नीति राज्य की सभी लाइसेंस प्राप्त रिहायशी कॉलोनियों पर लागू होगी।
ये होंगे लोकेशन और प्लॉट साइज के नियम
सरकार ने क्षेत्र की क्षमता के अनुसार न्यूनतम प्लॉट साइज तय किया है। हाइपर और हाई पोटेंशियल जोन वाले शहरों में कम से कम 350 वर्गगज साइज के प्लाट पर ही अनुमति मिलेगी। वहीं मीडियम और लो-पोटेंशियल जाने वाले शहरों में 250 वर्ग गज साइज के प्लाटों पर परमिशन मिल सकेगी।
एक सेक्टर में चार ही नर्सिंग होम
नोटिफिकेशन में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एक सेक्टर में अधिकतम चार ही नर्सिंग होम की परमिशन मिलेगी। केवल सर्विस रोड या सेक्टर/मास्टर रोड से लगे प्लॉट पर ही अनुमति होगी। एक बड़ी शर्त यह रहेगी कि जिस कॉलोनी के लिए परमिशन चाहिए, उसमें सभी बुनियादी सेवाएं विकसित होना अनिवार्य हैं।

