एलटीसी में बड़ा बदलाव : अब यात्रा किए बिना नहीं मिलेगा लाभ, कर्मचारियों में नाराजगी
एक महीने के वेतन और पेंशन का विकल्प होगा खत्म
प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलने वाले लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी) नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नई अधिसूचना के अनुसार, अब कर्मचारियों को एलटीसी का लाभ लेने के लिए वास्तविक यात्रा करना अनिवार्य होगा। मुख्य सचिव कार्यालय के मानव संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2028 से ‘घर बैठे’ एक महीने के वेतन या पेंशन के बराबर राशि लेने का विकल्प पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
सरकार का तर्क है कि एलटीसी योजना का मूल उद्देश्य कर्मचारियों को भ्रमण के लिए प्रोत्साहित करना है। साल 2009 से प्रभावी पुरानी व्यवस्था के तहत कर्मचारी बिना यात्रा किए भी एक महीने का अतिरिक्त वेतन ले लेते थे, जिससे योजना का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा था। अब नए नियमों से कर्मचारियों में पर्यटन की प्रवृत्ति बढ़ेगी। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) ने सरकार के इस फैसले पर कड़ा एतराज जताया है।
हसला के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंधु ने कहा कि एलटीसी के बदले मिलने वाला एक महीने का वेतन कर्मचारियों के लिए बड़ी वित्तीय राहत थी। सिंधु ने तर्क दिया कि कई कर्मचारी पारिवारिक जिम्मेदारियों, स्वास्थ्य कारणों या अधिक आयु के चलते लंबी यात्राएं करने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में यह विकल्प उनके लिए बहुत उपयोगी था। संगठन ने मांग की है कि सरकार जमीनी हकीकत को देखते हुए इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करे और पुरानी व्यवस्था को बहाल रखे।
इन श्रेणियों पर पड़ेगा सीधा असर
यह नियम राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ बोर्ड, निगम और विश्वविद्यालयों के कर्मियों पर भी लागू होगा। इसके दायरे में न्यायिक अधिकारी और अखिल भारतीय सेवा (एआइ) के अधिकारी भी शामिल रहेंगे।
पेंशनर्स : अब पेंशनरों को भी एलटीसी के लिए होम टाउन या देश के किसी अन्य हिस्से की
यात्रा करनी होगी।
आउटसोर्सिंग कर्मी : आउटसोर्सिंग पॉलिसी पार्ट-2 और हारट्रॉन के माध्यम से तैनात कर्मियों को मिलने वाले पुराने लाभ भी 2028 से बेअसर हो जाएंगे।

