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दिल की सेहत को बनाये रखेंगे जीवनशैली के बदलाव

बीते दशकों में हार्ट अटैक के मामलों और इससे मरने वालों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। युवा भी शिकार हो रहे हैं। बेशक इसकी मूल वजह बिगड़ती जीवनशैली है जिसमें गलत खानपान, तनाव, निष्क्रियता, अनियमित दिनचर्या, पूरी...

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बीते दशकों में हार्ट अटैक के मामलों और इससे मरने वालों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। युवा भी शिकार हो रहे हैं। बेशक इसकी मूल वजह बिगड़ती जीवनशैली है जिसमें गलत खानपान, तनाव, निष्क्रियता, अनियमित दिनचर्या, पूरी नींद न लेना तथा अत्यधिक धूम्रपान आदि शामिल हैं। ऐसे में हृदय रोगों के जोखिम कारकों के प्रति जागरुकता, लक्षणों को समय पर पहचानना, रेगुलर चेकअप और डॉक्टरी सलाह का पालन जरूरी है। इसी विषय पर गुड़गांव स्थित एक नामी अस्पताल में एचओडी-सीटीवीएस डॉ. महेश वाधवानी से रजनी अरोड़ा की बातचीत।

आजकल की तनाव भरी जिंदगी में स्वास्थ्य की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्या भी शामिल है। पिछले कुछ सालों में हार्ट अटैक से मरने वालों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों की मानें तो सालाना प्रति एक लाख लोगों में 210 लोगों की मृत्यु हार्ट डिजीज के कारण हो जाती है। युवावर्ग में हार्ट अटैक के मामले चिंताजनक रूप से बढ़े हैं। हार्ट डिजीज के कई रिस्क फैक्टर्स के प्रति जागरुकता का अभाव, अंदेशा होने के बावजूद अनदेखी करना और बचाव के लिए भरसक प्रयास न करना जैसे कई कारण हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो हर रोज़ की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव लंबे समय में आपके हृदय के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। छोटे कदमों के साथ न केवल अपने दिल की सेहत को सुधार सकते हैं, बल्कि अपने जीवन को भी लंबे समय तक स्वस्थ और खुशहाल बना सकते हैं।

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हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाएं

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एक सही दिनचर्या हेल्थ की मजबूत नींव होती है। सरकेडियम रिदम् का पालन करें। नियत समय पर रात को सोएं और सुबह जल्दी उठें, समय पर खाना खाएं और दैनिक कार्य करें। डाइट पैटर्न फोलो करें- ब्रेकफास्ट हैवी, लंच और डिनर हल्का करें। डिनर रात को सोने से 3 घंटे पहले करें। कम से कम 6-7 घंटे की नींद लें। गहरी नींद शरीर की मरम्मत और मानसिक संतुलन के लिए आवश्यक है। सोने से पहले स्क्रीन का कम उपयोग, स्लीप हाइजीन (रूम-टेम्परेचर और लाइट) मेंटेन करना जैसी आदतें अच्छी नींद में सहायक होती हैं।

स्वास्थ्यवर्धक आहार

खाने में अधिक मात्रा में फाइबर, जैसे साबुत अनाज, बीज और फलियां शामिल करें। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे मछली दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड से परहेज करें। पर्याप्त मात्रा में विटामिन्स, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे आवश्यक खनिज शामिल करें।

अधिक फल, सब्जियां, साबुत अनाज, और लीन प्रोटीन का सेवन करें। सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट, रिफाइंड खाद्य पदार्थ और अतिरिक्त नमक और चीनी से परहेज करें।

सुपरफूड्स का सेवन

दिल की सेहत के लिए कुछ सुपरफूड्स, जैसे कि अखरोट, बादाम, बेरीज (ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी), पालक, और हरी पत्तेदार सब्जियां, एंटीऑक्सिडेंट्स और अच्छी वसा से भरपूर होती हैं जो दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं।

हाइड्रेशन का भी ध्यान

पर्याप्त मात्रा में पानी पीना दिल की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। पानी रक्त के प्रवाह को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है और रक्तचाप को नियंत्रित रखता है।

तनाव प्रबंधन

बहुत अधिक मानसिक तनाव और चिंता दिल के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। मानसिक शांति और शारीरिक संतुलन के लिए ध्यान और योग का अभ्यास करें। गहरी सांस लेना, ध्यान या योग, संगीत सुनने या किताबें पढ़ने आदि एक्टिविटीज को समय दें ताकि तनाव को कम किया जा सके। ऐसा लाइफस्टाइल दिल की समस्याओं में योगदान दे सकता है।

खुश रहना और सकारात्मक सोच

सकारात्मक सोच और खुश रहने का प्रयास करें। मानसिक स्थिति का हृदय के स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। सकारात्मकता से तनाव कम होता है और दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।

काम और जीवन में संतुलन

लगातार काम की अधिकता से तनाव बढ़ सकता है, जो दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए पेशेवर जिम्मेदारियों और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। लंबे वर्किंग ऑवर्स में काम के बीच में ब्रेक लें, अवकाश के लिए समय निकालें और अपने परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताएं।

एक्टिव लाइफ स्टाइल

लंबे समय तक बैठे रहना या निष्क्रिय जीवनशैली दिल की समस्याओं को बढ़ा सकती है। दिन में हर घंटे कुछ मिनट चलें या खड़े होकर खिंचाव यानी स्ट्रेचिंग करें। अगर आप ऑफिस में काम करते हैं, तो थोड़ी-थोड़ी देर में उठकर टहलने की आदत डालें।

स्वस्थ वजन करें मेंटेन

बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से नीचे रहना चाहिए। अगर वजन ज्यादा है, तो हार्ट को हैल्दी रखने के लिए अपने वर्तमान वजन से कम से कम 10 प्रतिशत जरूर घटाएं। इसके लिए डाइट पर कंट्रोल और रेगुलर एक्सरसाइज करें।

रोजाना कम-से-कम आधा घंटा एक्सरसाइज या योगा करना जरूरी है। इससे वजन और बीपी तो कम होता ही है, हार्ट डिजीज होने की आशंका 25 प्रतिशत कम हो जाती है। कोर्डियो एक्सरसाइज, सुबह-शाम 10 हजार स्टैप चलें या 30-45 मिनट ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइकलिंग या स्विमिंग आदि करें।

ध्यान रखें कि फिजीकल एक्टिविटी ऑप्टिमल लेवल पर करें यानी जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज न करें। अपनी उम्र, वजन और फैमिली हिस्ट्री के हिसाब से व्यायाम करें। एक्सरसाइज के साथ हार्मोन ,ड्रग्स या एंडोजेनिक स्टेरॉयड नहीं लें। इनका असर हार्ट की आर्टरीज पर पड़ता है, वह ठीक से काम नहीं कर पाता और हार्ट अटैक हो सकता है।

प्रिवेंटिव चैकअप

यह समझना गलत है कि आप हैल्दी और फिट हैं तो आपको हार्ट डिजीज नहीं हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारे देश में 26 प्रतिशत लोगों को तब तक पता नहीं चल पाता कि उन्हें ब्लड प्रेशर है, जब तक कि हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक जैसी समस्याएं न हो जाएं। खासकर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री वाले हाई रिस्क कैटेगरी के लोगों को 35-40 साल के बाद रूटीन प्रिवेंटिव मेडिकल चेकअप कराना चाहिए। कम से कम साल में एक बार पूरी बॉडी चेकअप जरूर करा लेना चाहिए जिससे किसी भी तरह का अंदेशा होने पर समुचित उपचार कर सकें। सबसे अहम है बीमारी का पता चलने पर डॉक्टर की सलाह पर समुचित मेडिसिन और हैल्दी लाइफ स्टाइल से इन्हें कंट्रोल में रखने की कोशिश करनी चाहिए। बेहतर महसूस होने पर डॉक्टर की सलाह पर ही मेडिसिन बंद करनी चाहिए वरना बीमारी दोबारा बढ़ सकती है और हार्ट अटैक की संभावना रहती है।

बुरी आदतों का त्याग

स्मोकिंग, एल्कोहल अवॉयड करें। कैफीन का सेवन कम करें। ये चीजें कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित करती हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ाती हैं, हार्ट आर्टरीज में संकुचन का कारण बनती हैं, हार्ट स्ट्रोक की संभावना 50 प्रतिशत बढ़ा देती हैं।

पर्याप्त नींद भी जरूरी

हर रात 7-9 घंटे की गुणवत्ता वाली नींद लें। स्वस्थ हृदय के लिए पर्याप्त नींद बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शरीर की रिकवरी प्रक्रिया में मदद करती है।

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