किसी भी क्षेत्र का ज्ञान होना व्यक्तित्व विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन उस ज्ञान की सार्थकता जरूरत के वक्त उसके उपयोग में ही है। इसीलिए कई बार वे लोग भी किसी खास परिस्थिति में बेहतर प्रदर्शन करते दिखाई देते हैं जो कम जानकारी रखते हैं। उनकी कामयाबी का राज़ है व्यावहारिक बुद्धि का इस्तेमाल।
एक महिला को उसके पति ने रसोई में काम आने वाला बिजली का एक उपकरण उपहार में दिया। उसने डिब्बे को खोला लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि उस उपकरण का उसे इस्तेमाल कैसे करना है? उसने डिब्बे में रखे मैनुअल को पढ़कर उसे चलाने के बारे में सोचा। घंटों तक कोशिश करने के बाद वह उस उपकरण को चलाने में नाकाम रही। अंततः थक- हारकर उसने उस उपकरण को यूं ही रसोई की टेबल पर छोड़ दिया।
कुछ घंटों के बाद जब वह रसोई में गई तो उसने देखा कि उस उपकरण के सारे पुर्जे एक- दूसरे से जुड़े हुए थे। अब वह उपकरण इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार था। उसने अपनी घरेलू सेविका का धन्यवाद किया, जिसने उस उपकरण के सारे हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ दिया था। उसे बड़ी हैरानी हुई। उसने नौकरानी से पूछा, ‘तुम तो पढ़-लिख नहीं सकती, फिर तुमने ये सब कैसे किया? नौकरानी का जवाब था, ‘मैडम जो लोग पढ़ नहीं सकते तो वे अपने दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।’ सोचने और विचार करने की क्षमता तो सभी में होती है। अनपढ़ व्यक्ति अपनी इस ताकत का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता है। क्योंकि वह दूसरों के विचारों का अनुसरण नहीं कर सकता। अनपढ़ होने के कारण वह दूसरों के द्वारा दिये गये ज्ञान का लाभ नहीं उठा सकता। ऐसे लोग अवचेतन में ही अपनी व्यावहारिक बुद्धि का इस्तेमाल करते हैं। कभी-कभी अनपढ़ होना इस लिहाज से बुरा भी नहीं होता। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि अनपढ़ होना अच्छा है।
सामान्य ज्ञान
शुरुआती दौर की नोबेल विजेता महिलाएं
साहित्य के क्षेत्र में पहला नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली महिला सेल्मा लागरलोफ थीं। करीब 51 वर्ष की उम्र में स्वीडेन की इस लेखिका को यह पुरस्कार वर्ष 1909 के लिए दिया गया। जबकि विश्व शांति के लिए सन् 1905 में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली महिला आस्ट्रियन लेखिका बर्थावान सट्नर थीं, उन्हें यह पुरस्कार वर्ष 1905 के लिए दिया गया। जबकि विज्ञान के क्षेत्र में पहला नोबेल पुरस्कार पाने वाली महिला वैज्ञानिक मैडम क्यूरी थीं। उन्हें नोबेल पुरस्कार शुरू होने के तीसरे साल सन् 1903 में ही भौतिकी के क्षेत्र में यह पुरस्कार मिल गया था। सन् 1901 में शुरू होने वाले नोबेल पुरस्कारों की पहली महिला विजेता मैडम क्यूरी ही थीं। साथ ही अब तक की वही एकमात्र महिला हैं, जिन्हें यह पुरस्कार दो बार मिला- पहले 1903 में और फिर 1911 में। मैडम क्यूरी को पहला पुरस्कार भौतिकी में मिला तो दूसरा रसायनशास्त्र में।

