रत्नों का अध्ययन करने वाले पेशेवर यानी जेमालॉजिस्ट कीमती पत्थरों की पहचान, ग्रेडिंग, डिज़ाइन, ट्रेंड व कीमत का निर्धारण करते हैं। विद्यार्थी जेमोलॉजी से संबंधित शैक्षणिक कोर्स व प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इस फील्ड में बेहतर कैरियर बना सकते हैं। वे ग्रेडर, डिजाइनर, सेटर या जेमोलॉजिस्ट बन सकते हैं। उन्हें ज्वेलरी बिज़नेस मैनेजमेंट, जेम एक्सपोर्ट डिपार्टमेंट, जेम टेस्टिंग लैब, ज्वेलरी शोरूम व खनन उद्योग आदि में जॉब मिलता है।
रंग-बिरंगे रत्नों की\ दुनिया और कैरियर बहुत पुराना है। जेमोलॉजिस्ट का विज्ञान और प्रोफेशन बहुत ही अनोखा है। रत्नों से बहुत ज्यादा आकर्षित रहने वाले लोग जेमोलॉजी यानि रत्न शास्त्र में विशेषज्ञ बनकर खुद का एक शानदार कैरियर बना सकते हैं। असली रत्न की पहचान करना, उनकी जांच-परख करना, ये सब एक जेमोलॉजिस्ट का काम है। कमाई की बात करें तो जानकारी और स्किल्स के आधार पर इस पेशे में कुछ सालों की नौकरी के बाद 25-30 लाख रुपये तक सालाना आय होने लगती है।
जेमोलॉजी क्या है ?
रत्न के बारे में पढ़ाई करना ही जेमोलॉजी है। इसके अंतर्गत नेचुरल नग या स्टोन की जांच की जा जाती है और उनकी बारीकी से जानकारी दी जाती है। उन्हें रत्न में मौजूद खामियां और अच्छाई के बारे में आकलन करना सिखाया जाता है। इसमें वैल्यूएशन, सॉर्टिंग, ग्रेडिंग, डिज़ाइन व लेटेस्ट ट्रेंड के बारे में विस्तृत पढ़ाई होती है। जेम्स यानी रत्नों के वैज्ञानिक अध्ययन को जेमोलॉजी और इस क्षेत्र में काम करने वाले प्रोफेशनल्स को जेमोलॉजिस्ट कहते हैं। जेमोलॉजी रत्नों को पहचानने की कला है। जियोसाइंस में इसे मिनरोलॉजी की ही एक शाखा माना जाता है। इसमें नेचुरल जेम्स की पहचान करना व उनमें मौजूद खामियों की जांच करना सिखाया जाता है। इसमें रत्नों की कटिंग, सॉर्टिग, ग्रेडिंग, मेटल कॉन्सेप्ट, मेटालर्जिकल प्रोसेस व ओरनामेंट डिजाइनिंग आदि के बारे में बताया जाता है।
कई प्रकार के हैं जेमोलॉजिस्ट
जेमालॉजिस्ट कोई एक प्रकार का काम नहीं है। जेमालॉजिस्ट भी कई तरह के काम करते हैं। इन्हीं कामों के आधार पर इनकी पोस्ट और सेलरी तय होती है। डायमंड ग्रेडर का कैरियर रत्नों के क्षेत्र में खास मायने रखता है। यह रत्नों की विशेषता और उसकी गुणवत्ता की जांच-परख में माहिर होते हैं। रत्न के रंग-रूप के आधार पर उनके मूल्य निर्धारित करते हैं।
इसके बाद आता है क्रम ज्वेलरी डिज़ाइनर का। यह किसी भी ज्वेलरी को आकर्षक रूप देते हैं। रत्नों के डिज़ाइन ,आकार व रंगों के आधार पर पैटर्न तैयार करके उन्हें खूबसूरत बनाते हैं। इसी तरह किसी नग या रत्न की परख स्टोन सेटर ही करता है। ये किसी भी महंगे रत्न को प्लास्टिक या मैटल के आभूषण में सेट करने में एक्सपर्ट होते हैं। इसके साथ ही जैमोलाजिस्ट जेम ऑक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजर के रूप में भी अपनी सेवाएं देते हैं। रत्नों को निर्यात करने और उनकी नीलामी का काम जेम ऑक्शन मैनजेर के हाथों में होता है। ये इस काम में अच्छे-खासे प्रशिक्षित होते हैं।
चमचमाते अवसर
एक समय पहले तक इसमें लोग सिर्फ खुद के बिजनेस का सेटलमेंट करते थे। समय बदला तो इसमें कमाने के तरीके भी बदले। अब बिजनेस के अलावा नौकरी के भी कई विकल्प मिल सकते हैं। जिसमें अच्छी जानकारी होने पर मनचाहा पैसा मिल सकता है। जिन जगहों पर जॉब मिलती हैं उसमें ज्वेलरी बिज़नेस मैनेजमेंट, जेम एक्सपोर्ट डिपार्टमेंट, जेम टेस्टिंग लैब, ज्वेलरी प्रोडक्ट डिपार्टमेंट, ज्वेलरी शोरूम, खनन इंडस्ट्री व ज्वेलरी क्रिएशन डिपार्टमेंट शामिल हैं।
जहां जेमोलॉजिस्ट के लिए रत्न टेस्टिंग लैब्स में भरपूर अवसर हैं तो हीरा कंपनियों में डायमंड ग्रेडर के लिए मौके होते हैं। ज्वेलरी डिजाइनर और कंसल्टेंट को आधुनिक शोरूम्स में आकर्षक काम और दाम मिलते हैं। वहीं जेम ट्रेडर के लिए रत्न व्यापार और एक्सपोर्ट हाउसेज में अनंत अवसर हैं। इसके अलावा वह अपनी खुद की टेस्टिंग लैब स्थापित कर या ट्रेडिंग करके कैरियर को पंख लगा सकते हैं।
सैलरी
एंट्री लेवल जेमोलॉजिस्ट औसतन 5 लाख से लेकर 7 लाख रुपये (बोनस और ओवरटाइम सहित) सालाना कमा लेता है। कुछ अनुभव के बाद उसे 8 लाख से लेकर 10 लाख रुपये का पैकेज मिल सकता है। दरअसल वेतन में बढ़ोतरी व्यक्ति के अनुभव व कार्यकुशलता पर निर्भर है। इस क्षेत्र में कुछ सालों के तजुर्बे के बाद वेतन में 30 से 35 फीसदी का इजाफा हो जाता है। मल्टीनेशनल कंपनियों में एक अनुभवी जेमोलॉजिस्ट को औसतन 25 से 30 लाख रुपये सालाना पैकेज मिल जाता है।
ऐसे बनाएं कैरियर
जेमोलॉजी अथवा रत्न विज्ञान में कैरियर बनाने के लिए 12वीं के बाद मान्यता प्राप्त संस्थान से डायमंड ग्रेडिंग, कलर स्टोन, या डिप्लोमा इन जेमोलॉजी जैसे कोर्स करना आवश्यक है। जीआइए, आईजीआई तथा जीआईआई जैसे संस्थान व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। किसी भी स्ट्रीम में बारहवीं पास होना जरूरी है। फिर डायमंड ग्रेडिंग, कलर्ड स्टोन्स में सर्टिफिकेट कोर्स, डिप्लोमा इन जेमोलॉजी या जेमोलॉजी में स्नातक पाठयक्रम के बाद किसी प्रतिष्ठित लैब या ज्वेलरी हाउस में इंटर्नशिप करके इस क्षेत्र में उतरा जा सकता है।
योग्यता और प्रमुख कोर्स
जेमोलॉजी में डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स में प्रवेश के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। इन कोर्सेज की अवधि कुछ माह से लेकर एक वर्ष तक होती है। पीजी डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए उम्मीदवार के पास बैचलर डिग्री होनी जरूरी है। इस फील्ड में बेहतर कैरियर बनाने के लिए अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ जरूरी है। कोर्स के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी अनिवार्य है। कुछ संस्थानों/विश्वविद्यालयों में जेमोलॉजी के ऑनलाइन कोर्स भी उपलब्ध हैं जो इस प्रकार हैं-
सर्टिफिकेट कोर्स इन इंटरनेशनल सिस्टम ऑफ डायमंड ग्रेडिंग , सर्टिफिकेट कोर्स इन जेम आइडेंटिफिकेशन , सर्टिफिकेट कोर्स इन जेम प्रोसेसिंग, सर्टिफिकेट कोर्स इन स्टोन सेटिंग , सर्टिफिकेट कोर्स इन हार्ड शेप ग्रूविंग , डिप्लोमा इन कलर्ड स्टोन्स एंड जेम आइडेंटिफिकेशन , डिप्लोमा इन कटिंग एंड पॉलिशिंग ऑफ कलर्ड जेमस्टोन्स , डिप्लोमा इन डायमंड ट्रेड मैनेजमेंट , डिप्लोमा इन डायमंड प्रोसेसिंग , डिप्लोमा इन डायमंड ग्रेडिंग , डिप्लोमा इन जेम कार्विंग , डिप्लोमा इन जेमोलॉजी , डिप्लोमा इन एक्सेसरी एंड ज्वेलरी डिजाइन , मास्टर डिप्लोमा इन जेम आइडेंटिफिकेशन , पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डायमंड टेक्नोलॉजी।
इसके अलावा जैमोलॉजी में कैरियर बनाने के लिए ज्वेलरी ट्रेड मैनेजमेंट डिप्लोमा,जेमोलॉजी डिप्लोमा,डायमंड प्रोसेसिंग डिप्लोमा,बैचलर इन ज्वेलरी डिजाइनिंग एंड फाइन आर्ट,पोस्ट ग्रेजुएट इन डायमंड टेक्नोलॉजी तथा पोस्ट ग्रेजुएशन इन ज्वेलरी डिजाइनिंग एंड फाइन आर्ट्स महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।
प्रमुख संस्थान
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) , इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जेमोलॉजी नई दिल्ली, जेम स्टोन्स आर्टिसन्स ट्रेनिंग स्कूल जयपुर, जेके डायमंड इंस्टीट्यूट मुंबई, जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल जयपुर , द जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया मुंबई , नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन अहमदाबाद , ज्वेलरी डिजाइन एंड ट्रेनिंग
इंस्टीट्यूट नोएडा।

