Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

ईरान में 'सुप्रीम लीडर' के उत्तराधिकार की जंग : अयातुल्ला खामेनेई के बाद अब कौन संभालेगा कमान ?

ईरान ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन की ओर

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
तेहरान के एंग़ेलाब स्क्वायर पर उमड़ा जनसैलाब! अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान में शोक और आक्रोश का माहौल। ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ता देश। (फोटो: रॉयटर्स)
Advertisement

Iran Succession : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के साथ ही मध्य-पूर्व के इस शक्तिशाली इस्लामी राष्ट्र में एक युग का अंत हो गया है। 86 वर्षीय खामेनेई, जो 1989 से ईरान की सत्ता के केंद्र में थे। उनके बाद अब देश के भविष्य को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। विशेष रूप से जून 2025 में इजरायल के साथ हुए 12 दिवसीय भीषण युद्ध के बाद उपजे सैन्य तनाव के बीच यह उत्तराधिकार न केवल ईरान, बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीति को प्रभावित करने वाला है।

विशेषज्ञ परिषद पर टिकीं नजरें : कैसे होगा चयन ?

ईरान के संविधान के मुताबिक, अब सारी शक्ति 88 सदस्यीय 'विशेषज्ञ परिषद' (Assembly of Experts) के हाथों में है। यह परिषद ही तय करेगी कि अगला 'सुप्रीम लीडर' कौन होगा।

Advertisement

  • चयन की प्रक्रिया : इस परिषद में केवल वरिष्ठ शिया धर्मगुरु शामिल होते हैं। खामेनेई के निधन के बाद अब यह परिषद तत्काल बैठक कर नए नेता का चुनाव करेगी।

    Advertisement

  • गोपनीयता और सुरक्षा : परिषद के पास संभावित उत्तराधिकारियों की एक 'टॉप सीक्रेट' सूची पहले से तैयार रहती है। वर्तमान संकट को देखते हुए विशेषज्ञ परिषद को जल्द से जल्द किसी एक नाम पर सहमति बनानी होगी ताकि सत्ता का निर्वात (Vacuum) पैदा न हो।

मुजतबा खामेनेई और 'राजवंश' का डर

ईरान में उत्तराधिकारी का नाम कभी भी सार्वजनिक नहीं किया जाता, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में मुजतबा खामेनेई (56) का नाम सबसे ऊपर है।

अयातुल्ला खामेनेई के पुत्र मुजतबा को शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का सीधा समर्थन हासिल है। हालांकि, उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा 1979 की क्रांति के वे सिद्धांत हैं, जो वंशानुगत शासन (शाह शासन) को खत्म करने के लिए अपनाए गए थे। यदि मुजतबा को सत्ता मिलती है, तो इसे एक नए 'धार्मिक राजवंश' की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है, जिससे जनता में असंतोष की लहर पैदा होने का जोखिम है। मई 2024 में राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार की यह पहेली और अधिक उलझ गई है।

जब तक फैसला न हो: 'अस्थायी नेतृत्व' की कमान

ईरानी कानून के अनुसार, सर्वोच्च नेता का पद खाली होते ही विशेषज्ञ परिषद को प्राथमिकता के आधार पर नया नेता चुनना होता है। यदि आम सहमति में देरी होती है, तो एक 'अस्थायी नेतृत्व परिषद' कार्यभार संभालती है। इस परिषद में वर्तमान में सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी एजेई शामिल रहेंगे।

सुप्रीम लीडर: क्यों है यह पद इतना ताकतवर?

ईरान में राष्ट्रपति शासन तो होता है, लेकिन अंतिम 'पावर सेंटर' सर्वोच्च नेता ही होता है।

  1. सैन्य नियंत्रण : वह सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कमांडर-इन-चीफ होता है। युद्ध और शांति के फैसले उसी की मेज पर होते हैं।

  2. न्यायिक और विधायी पकड़ : न्यायपालिका प्रमुख की नियुक्ति और गार्जियन काउंसिल के आधे सदस्यों का चयन वही करता है।

  3. आर्थिक साम्राज्य : देश के बड़े चैरिटेबल ट्रस्ट (बोन्याद), जो अरबों डॉलर की संपत्तियों को नियंत्रित करते हैं, सीधे सर्वोच्च नेता के प्रति जवाबदेह होते हैं।

1989 के बाद सबसे बड़ी चुनौती

ईरान के 45 साल के इतिहास में यह केवल दूसरा मौका है जब 'सुप्रीम लीडर' का पद खाली हुआ है। 1989 में अयातुल्ला खुमैनी के बाद खामेनेई के उदय ने ईरान की दिशा तय की थी। अब नया उत्तराधिकारी यह तय करेगा कि ईरान इजरायल और पश्चिम के साथ सीधे संघर्ष का रास्ता चुनेगा या आंतरिक सुधारों की ओर कदम बढ़ाएगा।

Advertisement
×