महिलाओं द्वारा महिलाओं की मदद करने वाले समूहों का शहरी भारत में सिलसिला बढ़ रहा है। अब महिलाएं एक-दूसरे के लिए खड़ी हो रही हैं- व्हाट्सएप्प ग्रुप्स में, आधी रात की चहलकदमी में और जिम आदि में। वे अपने जीवन अनुभवों को साझा कर रही हैं, एक-दूसरे की मदद के लिए कह रही हैं कि ‘बहन तुम अकेली नहीं हो।'
‘मेरी एक कजिन है। उसके पति ने उसे बुरी तरह से पीटा है। उसे क़ानूनी मदद चाहिए। क्या किसी के पास कोई कांटेक्ट है?’ यह मैसेज ‘वीमेन फॉर वीमेन’ व्हाट्सएप ग्रुप पर आधी रात को पोस्ट किया गया था, लेकिन इस असामान्य वक्त के बावजूद चंद ही मिनटों में मदद आने लगी- कॉन्टेक्ट्स, संदर्भों, संभावित समाधानों आदि के रूप में। यह समूह ऐसी महिला को सहारा देने के लिए एकजुट हो गया जिससे वह कभी मिला नहीं था। इस व्हाट्सएप ग्रुप को 2024 में वीमेन स्टडीज की स्कॉलर सुमेधा डे ने कोलकाता में शुरू किया था और अब यह अखिल भारतीय है।
महिला समूहों का बढ़ता सिलसिला
महिलाओं द्वारा महिलाओं की मदद करने वाला ‘वीमेन फॉर वीमेन’ इकलौता समूह नहीं है। इस क़िस्म के ग्रुप्स का शहरी भारत में बढ़ता हुआ सिलसिला है ताकि महिलाएं उस नये संसार में सफर कर सकें जिसमें वह स्वतंत्र तो हैं, लेकिन सुरक्षित स्थलों व वास्तविक मानव संपर्क से वंचित हैं। इसी कमी को पूरा करने के लिए नेटवर्क ऑफ़ वीमेन इन मीडिया (पत्रकारिता में महिलाएं), द बाइकरनी (टू-व्हीलर महिला चालक), शीरोज़ (महिलाओं का नेटवर्किंग समूह), ब्रेक फ्री स्टोरीज (तलाकशुदा महिलाओं का समूह), मजलिस (क़ानूनी मदद करने वाली महिला वकीलों का समूह), वीमेन वॉक एट मिडनाइट (महिलाओं का आज़ादी के साथ अपने शहर में घूमना), वीमेन इन सिनेमा कलेक्टिव (फिल्मोद्योग में काम करने वाली महिलाओं का समूह) आदि वजूद में आये हैं।
‘नारी है नारी की मददगार’
ज़ाहिर है, यह ग्रुप्स ‘औरत ही औरत की दुश्मन है’ धारणा को गलत साबित कर रही हैं, जो सास-बहू के झगड़ों से चर्चित हुई थी। अब महिलाएं एक-दूसरे के लिए खड़ी हो रही हैं- व्हाट्सएप्प ग्रुप्स में, आधी रात की चहलकदमी में और एक्सरसाइज केन्द्रों में। वे अपने जीवन अनुभवों को साझा कर रही हैं, एक-दूसरे की मदद कर रही हैं और विश्वास से कह रही हैं कि ‘बहन तुम अकेली नहीं हो’। इसे ही सिस्टरहुड कहते हैं, जिसे ब्रदरहुड यानी भाईचारा की तर्ज़ पर बहनचारा या बहनापा भी कहा जा सकता है।
ड्राइविंग यानी सशक्तीकरण
‘द बाइकरनी’ की अब 11 शहरों में 2,500 से अधिक सदस्य हैं। इसकी संस्थापक सदस्य उर्वशी पटोले का कहना है, ‘फ्री मूवमेंट आज़ादी है जो परम्परा के तहत महिलाओं को हासिल नहीं थी। इसलिए बाइक या कार की मालकिन होना और शक्तिशाली इंजन को नियंत्रित करना ताक़त का अहसास कराता है। जब हम अपनी बाइक चलाती हैं तो हम बिना किसी से अनुमति लेकर किसी भी समय बाहर जा सकती हैं और हमें किसी अन्य के वाहन में सुरक्षित रहने की चिंता भी नहीं रहती है।‘
सेलेब्रिटीज़ में भी एकजुटता
बहरहाल, यह बहनापा केवल आम महिलाओं तक सीमित नहीं। सेलेब्रिटीज़ में भी यह फेनोमेनन देखा जा सकता है। शायर जावेद अख्तर के जन्मदिन (17 जनवरी 2025) पर एक्टर-डायरेक्टर तन्निष्ठा चटर्जी ने अपनी गर्ल गैंग के साथ खूब मौज-मस्ती की। तीन दिन बाद जीवन स्टॉपवाच के साथ दस्तक देता हुआ आया और वह ‘एक तरह से लुप्त हो गई’। तन्निष्ठा, जो ‘फुल प्लेट’ के निर्देशन में व्यस्त थीं, को मालूम हुआ कि उन्हें स्टेज 4 कैंसर है। इस पृष्ठभूमि में भी वह अपनी फिल्म पूरा कर सकीं और कैंसर डायग्नोज़ होने के बाद में जी सकीं, इसका श्रेय तन्निष्ठा अपनी ‘बहनों’ को देती हैं। बहनों का यह समूह खुद को ‘ढेर सारा प्यार’ कहता है और इसमें ‘गैंग लीडर’ शबाना आज़मी हैं व सदस्यों में उर्मिला मतोंडकर, संध्या मृदुल, तन्वी आज़मी, दिव्या दत्ता, ऋचा चड्ढा, विद्या बालन, दीया मिर्ज़ा, शहाना गोस्वामी व कोंकणा सेन शर्मा शामिल हैं।
मस्ती के साथ केयर भी
तन्निष्ठा की डायग्नोसिस के कुछ सप्ताह बाद 4 फरवरी 2025 को उर्मिला का जन्मदिन था, जिसमें वह नहीं गईं। तन्निष्ठा का कहना है, “मैंने तय किया कि उर्मिला अपना जन्मदिन मना ले और फिर मैं हर किसी को अपने कैंसर के बारे में बता दूंगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। संध्या, ऋचा व कुछ अन्यों को मालूम हो गया और फिर उर्मिला की पार्टी ‘तन्निष्ठा की कैसे मदद की जाये’ इवेंट बन गई।” तन्निष्ठा स्वीकार करती हैं कि ‘बहनापा मेरे लिए नई खोज है।मुझे अहसास हो रहा है कि महिलाओं की आपस में जो हमदर्दी व प्यार होता है वह बहुत अलग है’। दीया ने उन्हें डाक्टरों के नंबर उपलब्ध कराये, विद्या बालन ने अपॉइंटमेंट फिक्स किया और उन्हें डाक्टर के पास लेकर गईं। शबाना ने उन्हें एक्सरसाइज के वीडियो भेजे। पहले यह मात्र ‘फन ग्रुप’ था, जिसमें वह मिलती, हंसतीं व मजाक करती थीं। लेकिन जब तन्निष्ठा को कैंसर हुआ तो सबने अहसास किया कि ज़िम्मेदारी व केयर भी है।
-इ.रि.सें.

