Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

हेल्दी गुणों से भरपूर भारतीय हल्दी

हर्ब ऑफ द ईयर का खिताब

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

हल्दी सदियों से औषधीय जड़ी के साथ-साथ मसाले के रूप में मशहूर रही है। दुनिया की 80 फीसदी हल्दी भारत में ही पैदा होती है। इसके चिकित्सकीय और स्वास्थ्य वर्द्धक गुणों के कारण हल्दी पर अनेक शोध भी हुए हैं। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय जड़ी-बूटी संघ ने 2026 के लिए हल्दी को ‘साल की जड़ी-बूटी’ के रूप में चुना है।

अंतर्राष्ट्रीय जड़ी-बूटी संघ (आईएचए) ने साल 2026 के लिए हल्दी को ‘हर्ब ऑफ द ईयर’ चुना है। यह एक पूर्व निर्धारित चयन है। दरअसल आईएचए हर साल किसी एक जड़ी-बूटी को उसके औषधीय, पाक या सजावटी गुणों के कारण उस साल विशेष की जड़ी-बूटी का खिताब देता है और साल 2026 के लिए यह सेहरा हल्दी के सिर बंधा है। सवाल है हल्दी को यह श्रेय क्यों मिला है? दरअसल, हल्दी सदियों से आयुर्वेद की एक औषधीय जड़ी के साथ-साथ भारत में स्वाद और मसाले के रूप में मशहूर रही है। इसके कई चिकित्सकीय और स्वास्थ्य वर्द्धक गुणों के कारण हाल के सालों में हल्दी पर अनेक शोध हुए हैं जिनसे पता चला है कि हल्दी को हम जितना महत्वपूर्ण मानते हैं, वह उससे भी अधिक है। इसलिए आईएचए ने साल 2026 के लिए हल्दी को ‘साल की जड़ी-बूटी’ के रूप में चुना है। अब हल्दी की लोकप्रियता ओर ज्यादा बढ़ जायेगी।

हल्दी को खिताब के गहरे मायने

हल्दी को सदियों से भारत समेत दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में स्वास्थ्य, सौंदर्य, मसाले और औषधि के रूप जाना जाता रहा है। शोध अध्ययनों में पाया गया है कि यह इम्यूनिटी बढ़ाने, शरीर की सूजन नियंत्रित करने और एंटीऑक्सीडेंट वाले गुणों से भरपूर है। दुनिया की 80 फीसदी हल्दी भारत में ही पैदा होती है। दुनियाभर में जो हल्दी पायी जाती है, उसमें 70 से 80 फीसदी हिस्सा भारतीय हल्दी का होता है। इस साल हल्दी को प्रमुख जड़ी-बूटी का खिताब मिलने के आर्थिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और भू-राजनीतिक स्तर तक गहरे मायने हैं।

ग्लोबल वेलनेस फ्रेमवर्क में शामिल

अभी तक हल्दी को लोग भारतीय मसाला या दादी-नानी का औषधीय नुस्खा माना करते थे, पर अब हर्ब ऑफ द ईयर टैग पाने के बाद यह फोक मेडिसिन से निकलकर वैज्ञानिक और ग्लोबल वेलनेस के फ्रेमवर्क का मुख्य हिस्सा बन गई है। इस कारण अब हल्दी को स्टैंडर्ड हर्ब मान लिया गया है। अब दुनिया की दर्जनों यूनिवर्सिटीज में हल्दी को लेकर नये नये एंगल से रिसर्च हो रही हैं। अनेक फार्मास्युटिकल कंपनियां इसके विभिन्न उत्पादों का ट्रायल कर रही हैं। अब पूरी दुनिया इस पर निवेश करने के लिए तैयार है। यानी हल्दी अब केवल किचन का हिस्सा नहीं, लैब और क्लीनिक का भी विषय बन गई है।

हल्दी के नये उत्पाद बनाएंगी कंपनियां

साल 2026 में हमें हल्दी के ऐसे-ऐसे नये उत्पाद देखने को मिलेंगे, जिनके बारे में अभी तक हमने सोचा तक नहीं होगा। मसलन- दुनिया की कई फार्मा कंपनी हल्दी आधारित इम्यूनिटी शॉट्स जैसा प्रोडक्ट लाने की बात कर रही हैं। इस साल दर्जनों स्किन केयर क्रीम हल्दी को लेकर आएंगी। स्पोर्ट्स न्यूट्रिशियन में भी अब हल्दी ने अपनी एक मजबूत जगह बनायी है। माइक्रो-डोज, कैप्सूल, चाय आदि के लिए आकर्षक जड़ी बनकर उभरी है।

विदेशी मांग से बढ़ेगा उत्पादन

अब पश्चिमी देशों में हल्दी की मांग कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। वैसे भी जब किसी जड़ी-बूटी को वैज्ञानिकों की आधिकारिक कम्युनिटी से कोई विशेष मान्यता मिलती है, तो ऐसे प्रोडक्ट की मांग काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इससे यह कहा जा सकता है कि अगले कुछ सालों तक हल्दी का उत्पादन भारत में महत्वपूर्ण आर्थिक उत्पाद होगा। हल्दी को तमगा दिये जाने के बाद पूरी दुनिया में उच्च श्रेणी की हल्दी की मांग बढ़ गई है। इससे किसानों व निर्यातकों को भारी फायदा होने वाला है। वहीं हल्दी भी अब भारत की सॉफ्ट पावर का ताजा हिस्सा हो गई है। इससे पहले योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा ही हमारी ग्लोबल सॉफ्ट पावर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। वहीं साल की जड़ी-बूटी का खिताब पाने के बाद हल्दी किसानों और कारोबारियों की भी पसंदीदा फसल बन जायेगी। -इ.रि.सें.

Advertisement
×