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रहते थे कभी जिनके दिल में हम...

प्रतिभाओं से ‘रोशन’ परिवार
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फिल्म जगत के कुछ अभिनेता-अभिनेत्रियां न सिर्फ बरसों दर्शकों के दिलों पर छाए रहे बल्कि उनके खानदान ने भी जड़ें जमाई। मसलन, कपूर परिवार, देओल परिवार के अलावा सलमान खान का परिवार। लेकिन इनके बीच जिस परिवार का कभी जिक्र नहीं होता, वो है ‘रोशन परिवार।’ संगीतकार रोशन लाल को कव्वाली का बादशाह माना जाता रहा है। उनके दो बेटों एक्टर-निर्देशक राकेश रोशन और संगीतकार राजेश रोशन के अलावा एक्शन के सरताज ऋतिक रोशन को कौन नहीं जानता। ऋतिक ‘कृष-4’ से डायरेक्टर भी बन रहे हैं।

रोशनी को कभी छिपाकर नहीं रखा जा सकता है, यही वजह है कि आज ‘रोशन परिवार’ का नाम सिनेमा की दुनिया में शिद्दत के साथ चमचमा रहा है। सिने जगत में पिछले 6 दशक से छाया ये परिवार अपनी बहुमुखी प्रतिभा से बहुत कुछ कहता है। माना जाता रहा है, कि इस परिवार का सरनेम ‘रोशन’ होगा जिसके उत्तराधिकारी राकेश रोशन, राजेश रोशन और ऋतिक रोशन हैं। लेकिन, असल में इस परिवार का सरनेम नागरथ है, जो उनके पिता रोशनलाल नागरथ की वजह से ‘रोशन’ पर आकर रुक गया। इस कश्मीरी ब्राह्मण परिवार के गीत-संगीत में कश्मीरी बयार की तरह ताजगी ही नहीं, केसर सी महक भी हैं। यही महक इस पीढ़ी के पुरोधा रोशन की संगीत रचना ‘रहें ना रहें हम महका करेंगे बन के कली बन के सबा बाग़ वफ़ा में’ की याद ताजा कर देती है। संगीतकार रोशन ने अपने समय काल में कई कालजयी गीतों की रचना की। इनमें कई आज भी गुनगुनाए जाते हैं। उनकी संगीत विधा को उनके एक बेटे राजेश रोशन ने आगे बढ़ाया।

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‘रोशन परिवार’ का एक बेटा राकेश रोशन एक्टिंग की तरफ मुड़ गया। लेकिन, वे बहुत ज्यादा सफल नहीं हुए। इसके बाद वे निर्देशन में आए और अपना अलग मुकाम बनाया। अपने बेटे ऋतिक रोशन की फिल्मों की सफलता में राकेश रोशन का बहुत बड़ा हाथ है। इस ‘रोशन परिवार’ को आज संगीत के अलावा निर्देशन और एक्शन हीरो के लिए पहचान मिली है। ‘रोशन परिवार’ की तीन पीढ़ियों ने मनोरंजन की दुनिया को रोशन किया, लेकिन उन्हें अंधकार से भी रूबरू होना पड़ा। इस परिवार की सबसे बड़ी ताकत इनके पारस्परिक संबंध हैं। परिवार अलग रहते हुए भी एकजुट है। कहते हैं कि ऋतिक रोशन की अपने चाचा राजेश रोशन के साथ बहुत बनती है। एक दूसरे का साथ निभाने की प्रवृत्ति ही ‘रोशन’ को अलग रखती है।

कई प्रतिभाएं एक ही परिवार में

रोशन परिवार के बारे में दर्शक इतना ही जानते हैं कि 25 साल पहले अभिनेता ऋतिक रोशन ने फिल्म ‘कहो ना प्यार से’ अभिनय में कदम रखा था। फिल्म की सफलता ने उन्हें स्टार बना दिया। फिल्म के निर्देशक ऋतिक के पापा राकेश रोशन थे। राकेश ने भी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पारी अभिनय से आरंभ की। लेकिन, उनकी प्रतिभा को वह सम्मान नहीं मिला। उन्होंने निर्देशन में हाथ आजमाया और शोहरत हासिल की। उनके भाई राजेश रोशन ने संगीत की राह पकड़ी। दोनों भाइयों के फिल्म जगत में आने का आधार बने उनके पिता संगीतकार रोशन। वही रोशन जिन्होंने हिंदी सिनेमा को ‘बड़े अरमानों से रखा है’, ‘सारी सारी रात तेरी याद सताए’, ‘रहते थे कभी जिनके दिल में’, ‘रहें न रहें हम महका करेंगे’, ‘जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा’, ‘तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं’ और ‘जिंदगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात’ जैसे कई यादगार गानों को संगीतबद्ध किया।

गीत-संगीत में हासिल महारत

कम लोग जानते हैं, कि रोशन परिवार के सभी सदस्यों को संगीत में महारत है। राजेश रोशन तो घोषित संगीतकार हैं, लेकिन गीत-संगीत पर राकेश रोशन और ऋतिक रोशन का हाथ भी कहीं से तंग नहीं। यह गुण उन्हें न केवल संगीतकार रोशन से विरासत में मिला, बल्कि उनकी मां इरा रोशन भी संगीत की जानकार थी। उन्होंने रोशन के अधूरे काम को पूरा किया और ‘अनोखी रात’ के मशहूर गीत ‘महलों का राजा मिला रानी बेटी राज करेगी’ जैसा कर्णप्रिय गीत भी कम्पोज किया। बाद में रोशन बंधुओं ने अपनी मां के भजनों का एक एलबम भी जारी किया था। पिछले करीब 6 दशक में रोशन परिवार ‘रहे न रहे हम महका करें’ गाने की तरह संगीत की दुनिया में महक रहे हैं। उनके नाम को बाद में परिवार ने सरनेम की तरह अपना लिया।

संघर्ष से पाया मुकाम

रोशन परिवार ने खुद को खपाकर अपने आप को बनाया। रोशन के जीवित रहने तक तो उनके बेटों को कोई जानता नहीं था। लेकिन, उनकी असमय मौत ने बड़े बेटे को लड़कपन से सीधे जिम्मेदार इंसान बना दिया था। छोटे बेटे को उन संगीतकारों का सहायक बनकर अपना कैरियर शुरू करना पड़ा, जो कभी रोशन के आगे सिर झुकाया करते थे। इस पर कोई यदि सोचे कि ऋतिक रोशन को तो सब कुछ प्लेट में रखकर मिला होगा, तो यह भी गलत है। उन्होंने सबसे ज्यादा संघर्ष कर अपनी शारीरिक कमजोरियों पर नियंत्रण पाने के बाद ही फिल्मी अखाड़े में कूदने का काम किया।

संगीतकार रोशन का बड़ा योगदान

फिल्म जगत में संगीतकार रोशन के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उनके संगीत में उनके स्वभाव की मधुरता भी झलकती है। उनका कैरियर बहुत बड़ा नहीं हो पाया। 70 के दशक की शुरुआत में ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन, इसके बावजूद संगीत श्रोताओं के लिए बेशुमार नगमों की सौगात दी। रफी की आवाज में चित्रलेखा के गीत ‘मन रे तू काहे न धीर धरे’ से रोशन के पूरे संगीत का आकलन किया जा सकता है। इसी तरह मुकेश के साथ ‘ओहो रे ताल मिले नदी के जल में’ गाने की सादगी और स्वाभाविकता तथा लता के साथ ‘रहें न रहें हम’ की शाश्वत सत्यता उनके संगीत के बैरोमीटर हैं। कव्वालियों के तो वे शहंशाह थे। ‘बरसात की रात’ में उनका कमाल अविस्मरणीय है। ‘दिल जो न कह सका’ और ‘ताज महल’ के ‘जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा’ के साथ उनका संगीत चरम पर पहुंचा था।

विरासत का विस्तार

पिता की विरासत को फिल्म जगत में आगे बढ़ाने और संजोने में सबसे पहले राजेश रोशन का ही नाम आता है। पिता की तरह ही संगीत की सेवा की। ‘जूली’ फिल्म के गानों को भला कौन भूल सकता है। यहां तक कि ऋतिक के लिए ‘कहो ना प्यार है’ के गानों का संगीत भी राजेश रोशन ने दिया। उस फिल्म के गाने आज 25 साल बाद भी ताजा लगते हैं। महमूद के सहयोग से आगे बढ़े राजेश रोशन ने सभी बड़े निर्माताओं के साथ काम किया। लेकिन, अपनी शर्तों पर काम करने और किसी के पास काम मांगने नहीं जाने के उनके सिद्धांत ने उन्हें सही अर्थों में अपने पिता का उत्तराधिकारी बनाया।

राकेश रोशन का कैरियर और उसकी सफलता की अलग ही कहानी है। एक्टर के तौर पर उनकी विफलता और एक डायरेक्टर के तौर पर उनकी सफलता को कौन नहीं जानता। काफी संघर्ष के बाद फिल्म जगत में पांव जमाने का मौका मिला। लेकिन, जब मिला तो उन्होंने उसी नयेपन के साथ अपने काम को अंजाम दिया, जिसके लिए रोशन परिवार जाना जाता रहा है। परिवार के तीसरे सदस्य ऋतिक रोशन 51 साल की उम्र में अभी भी लीड एक्टर के तौर पर सक्रिय हैं। उन्होंने अपने डांस, पर्सनालिटी और डेप्थ से मॉडर्न युग के हीरो की नई परिभाषा गढ़ी। शुरुआत में ऋतिक का हकलाना उनकी कमजोरी था। जिस पर उन्होंने जीत हासिल कर युवा दिलों की धड़कन बनने का जो काम किया वह बेमिसाल है। अब ये अभिनेता ‘कृष-4’ में दोहरी भूमिका में नजर आएगा। ऋतिक परदे पर एक्टिंग तो करेंगे ही, डायरेक्टर की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।

 

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