ड्रोन तकनीक का विभिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ड्रोन चालक और ड्रोन सर्वेक्षण विशेषज्ञ के रूप में नए कैरियर अवसर पैदा हुए हैं। भविष्य में जॉब बड़ी तादाद में पैदा होंगे। ये विशेषज्ञ कृषि, निर्माण, आपदा प्रबंधन और भू-सर्वेक्षण जैसे क्षेत्रों में कार्य करते हैं। हालांकि इस फील्ड में रोजगार पाने के लिए उचित प्रशिक्षण जरूरी हैं।
आधुनिक तकनीक के विस्तार के साथ ड्रोन अब केवल तस्वीरें लेने और चलचित्र बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। कृषि, भूमि सर्वेक्षण, निर्माण, खनन, सड़क एवं रेल परियोजनाओं, बिजली व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, सुरक्षा, नगर नियोजन और आधारभूत संरचना के विकास में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ड्रोन उड़ाने और उससे प्राप्त आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने वाले प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
इस क्षेत्र में कार्य की प्रकृति
ड्रोन ऑपरेटर का मुख्य कार्य मानव रहित विमान (ड्रोन) को सुरक्षित ढंग से उड़ाना, उड़ान की योजना बनाना, निर्धारित क्षेत्र की निगरानी करना तथा उसमें लगे कैमरे और अन्य उपकरणों का संचालन करना होता है। दूसरी ओर, ड्रोन सर्वेक्षण विशेषज्ञ ड्रोन से प्राप्त चित्रों और आंकड़ों का विश्लेषण करके भूमि का मानचित्र, त्रि-आयामी मॉडल, क्षेत्रफल, ऊंचाई तथा अन्य आवश्यक विवरण तैयार करता है। कृषि में फसलों की स्थिति जानने, निर्माण कार्य की प्रगति देखने, खनन क्षेत्र का सर्वेक्षण करने, बिजली की तारों और टॉवरों की जांच करने तथा बाढ़, भूस्खलन एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान स्थिति का आकलन करने में इन विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रमुख पाठ्यक्रम
ड्रोन ऑपरेटर बनने के लिए नागरिक विमानन महानिदेशालय द्वारा अधिकृत प्रशिक्षण संस्था से दूरस्थ ऑपरेटर प्रमाणपत्र प्राप्त करने का प्रशिक्षण लेना होता है। इसके साथ भूमि सर्वेक्षण, भौगोलिक सूचना प्रणाली, चित्रमिति, मानचित्रण और आंकड़ा प्रसंस्करण का प्रशिक्षण लेना रोजगार की दृष्टि से अधिक लाभदायक है। जो विद्यार्थी केवल ड्रोन उड़ाने के बजाय ड्रोन सर्वेक्षण विशेषज्ञ बनना चाहते हैं, उन्हें ड्रोन संचालन के साथ भूमि मापन, मानचित्र निर्माण और कंप्यूटर आधारित आंकड़ा विश्लेषण का भी प्रशिक्षण लेना चाहिए।
पाठ्यक्रम हेतु योग्यता
ड्रोन ऑपरेटर के प्रशिक्षण के लिए सामान्यतः न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना तथा निर्धारित आयु सीमा में होना आवश्यक है। प्रशिक्षण के लिए अधिकृत संस्था का चयन बहुत महत्वपूर्ण है। ड्रोन सर्वेक्षण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए बारहवीं कक्षा, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, डिप्लोमा या स्नातक की शिक्षा लाभदायक हो सकती है। भूगोल, सिविल अभियंत्रण, कृषि, भू-मापन, भू-स्थानिक विज्ञान और कंप्यूटर से संबंधित शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलता है।
प्रमुख संस्थान
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी सहित देश के अनेक संस्थान ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न राज्यों के सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी संस्थानों में भी ड्रोन संचालन और ड्रोन तकनीक से संबंधित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रवेश लेने से पहले जांच लेना चाहिए कि संबंधित संस्था नागरिक विमानन महानिदेशालय से मान्यता प्राप्त है या नहीं।
फीस और अवधि
सामान्य ड्रोन ऑपरेटर प्रशिक्षण की अवधि कुछ दिनों से लेकर कई सप्ताह तक हो सकती है। वहीं सर्वेक्षण, मानचित्रण, चित्रमिति और आंकड़ा विश्लेषण से संबंधित उन्नत प्रशिक्षण कई सप्ताह या कुछ महीनों का हो सकता है। प्रशिक्षण की फीस सामान्यतः लगभग पचास हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये या उससे अधिक हो सकती है।
नौकरी और अनुमानित वेतन
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ड्रोन ऑपरेटर , कनिष्ठ ड्रोन ऑपरेटर , ड्रोन सर्वेक्षण सहायक, मानव रहित विमान तकनीशियन, ड्रोन मानचित्रण सहायक, सर्वेक्षण सहायक और आंकड़ा विश्लेषण सहायक जैसे पदों पर रोजगार मिल सकता है। अनुभव बढ़ने के साथ वरिष्ठ ड्रोन ऑपरेटर , सर्वेक्षण विशेषज्ञ, मानव रहित विमान संचालन प्रबंधक, ड्रोन आंकड़ा विशेषज्ञ और परियोजना प्रबंधक जैसे पदों पर भी अवसर मिलते हैं। प्रारंभिक स्तर पर लगभग बीस हजार से पैंतीस हजार रुपये प्रतिमाह आय हो सकती है। अनुभव के साथ यह आय चालीस हजार से सत्तर हजार रुपये प्रतिमाह या उससे अधिक हो सकती है। स्वयं की ड्रोन सर्वेक्षण सेवा शुरू करने पर परियोजना के अनुसार आय प्राप्त की जा सकती है।
विदेशों में अवसर और नौकरी
विदेशों में भी ड्रोन का उपयोग निर्माण कार्य, भूमि सर्वेक्षण, खनन, कृषि, ऊर्जा परियोजनाओं, भवन निरीक्षण, मानचित्रण और आपदा प्रबंधन में तेजी से बढ़ रहा है। वहां ड्रोन ऑपरेटर, मानव रहित विमान ऑपरेटर, ड्रोन सर्वेक्षण विशेषज्ञ, ड्रोन तकनीशियन, मानचित्रण विशेषज्ञ और चित्रमिति विशेषज्ञ जैसे कार्य मिल सकते हैं। हालांकि विदेश में काम करने के लिए संबंधित देश के नियमों के अनुसार अतिरिक्त अनुमति या प्रमाणपत्र की आवश्यकता हो सकती है। ड्रोन तकनीक में कैरियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए केवल ड्रोन उड़ाना सीखना पर्याप्त नहीं है। यदि वे ड्रोन संचालन, भूमि सर्वेक्षण, मानचित्रण, भौगोलिक सूचना प्रणाली, चित्रमिति और आंकड़ा विश्लेषण जैसे कौशल एक साथ सीखते हैं तो उनके रोजगार के अवसर काफी बढ़ जाते हैं।

