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आर्थिक अस्थिरता से चढ़ते-लुढ़कते सोना-चांदी

वैश्विक नीतियों-स्थितियों का असर

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सोने-चांदी के भाव पर वैश्विक नीतियों व अनिश्चितताओं का सीधा असर होता है। बीते साल आसमान छूते नजर आये तो इस साल के पहले माह के अंत में बेहद बड़ी गिरावट आयी। साल 2025 में पीली धातु के दाम में उछाल की प्रमुख वजह अमेरिकी राष्ट्रपति की टैरिफ नीति रही , वैसे ही ताजा बड़ी गिरावट का एक कारण यूएस डॉलर की वैल्यू में परिवर्तन व मुनाफा वसूली माना जा रहा है। दरअसल पिछले साल ज्यादातर देशों के केंद्रीय बैंक डॉलरों में रिजर्व रखने की बजाय सोने को ज्यादा मात्रा में अपना रहे थे। तो बाजार मांग बढ़ने से भाव चढ़ता नजर आया। कीमत में उतार-चढ़ाव अपनी जगह, अनूठी खासियतों से लैस सोना दुर्लभ धातु है और इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है।

सोने और चांदी के भावों को क्या हो गया है? सन‍् 2024 के मुकाबले 2025 में सोने के भाव में आज तक का सबसे ज्यादा 86.26 फ़ीसदी का उछाल आया है। जबकि इस साल 2026 में 30 जनवरी को इनके दामों में ऐतिहासिक गिरावट भी दर्ज की गयी। पहली जनवरी 2025 को 24 कैरेट (99.9 फ़ीसदी शुद्ध) सोने का भाव 76,500 रुपये से बढ़ते-बढ़ते 31 दिसंबर 2025 को 1,35,900 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया था। बमुश्किल एक महीना भी नहीं बीता कि भाव 1,85,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर तैर रहा था कि एक झटके से करीब 9 फीसदी गिर गया। हालांकि बीते साल उफान का नतीजा है कि 2025 में, घरेलू कीमतों में 76.5 फ़ीसदी की अभूतपूर्व वृद्धि की वजह से भारत में सोने की कुल मांग 11 फ़ीसदी घटकर 710.9 टन रह गई थी। जबकि सोने के गहनों की खपत इससे दुगुनी से भी ज्यादा 24 फ़ीसदी घटकर 430.5 टन (2020 को छोड़ बीते तीस सालों में न्यूनतम) हो गई। हालांकि इस दौरान सोने की छड़ों और सिक्कों में निवेश 17 फ़ीसदी बढ़ा और खपत बढ़कर 280.4 टन हो गई। यह सोने की कुल खपत का लगभग 40 फ़ीसदी है। क्योंकि सोने में निवेशकों को सुरक्षित निवेश का विकल्प मिल गया था।

सोने पर कर्ज लेने की बढ़ी प्रवृत्ति

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सोने के तेज उछाल के चलते, सोने के गहनों और सिक्कों के छोटे या परचून ख़रीदार पीछे हट गए। साथ-साथ एक नया पहलू उभरा। बैंकों में अपने सोने के गहने गिरवी रख कर, क़र्ज़ लेने वाले बीते दो सालों में दुगुने हो गए। क्रिफ हाई मार्क (क्रेडिट सूचना प्रदाता संस्था ) की ताजा रिपोर्ट ज़ाहिर करती है कि नवंबर 2025 तक के एक साल में सोने के बदले कर्ज में 42 फ़ीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। जबकि नवंबर 2024 तक के वर्ष में इसमें 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

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सोने में बढ़त की वजह

आख़िर तेज़ी का कारण क्या रहा? सरल शब्दों में समझते हैं। सोना तेज गति से बढ़ता रहा क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ बढ़ाने के मनमाने तरीक़े से आहत दुनिया के तमाम देशों के केंद्रीय बैंक अपनी-अपनी करेंसी के मुकाबले अमेरिका डॉलर का मूल्य घटाने के लिए डॉलरों में रिजर्व रखने की बजाय सोने को पहले की तुलना में ज्यादा मात्रा में अपनाने लगे। दुनिया के ज्यादातर देशों के केंद्रीय बैंक धड़ाधड़ सोना ख़रीद कर अपना रिजर्व बढ़ा रहे थे। डेढ़ साल पहले भारतीय रिजर्व बैंक के पास करीब 650 टन सोना था, जो अब बढ़ कर 850 टन हो गया है। अभी भारत का गोल्ड रिजर्व कम ही है, इसलिए रुपये के मुकाबले डॉलर भी बढ़त बनाए है। इसी कारण से सोने के साथ चांदी, तांबा और अन्य धातुओं के भाव भी बढ़े। चूंकि सोना कम जगह घेरता है, इसलिए बैंक चांदी की बजाय सोने में ही रिजर्व रखने के इच्छुक होते हैं।

खपत में और कमी के अनुमान

आंकडे बताते हैं साल 2024 में भारत में 802 टन सोने की खपत हुई, जो पिछले साल घट कर 708 टन रह गई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का अनुमान है कि 2026 में मांग और भी कम होकर 600 से 700 टन के बीच रह जाएगी। कहते हैं कि सोना जब और जिस भाव पर भी ख़रीदा जाए, शुभ और फ़ायदे का सौदा ही होता है। ‘जोड़ा हुआ’ सोने का ही पर्यायवाची बन गया।

एक अनूठी और बेहद दुर्लभ सुनहरी धातु

पीला, सुनहरी और बेशकीमती सोने की दुनिया बहुत सीमित है। इतना नपा- तुला है कि ‘वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल’ की किताब ‘गोल्ड प्रिंट’ बताती है कि समूची दुनिया का सोना केवल 24 वर्ग गज के एक चौरस कमरे में समा सकता है। मोटा अनुमान है कि अब तक धरती ने 1,30,000 टन सोना उगला है। तमाम धातुओं में से सोना ही अकेली ऐसी घातु है, जिसके एक ग्राम को गलाकर बारीक तार के तौर पर साढ़े तीन किलोमीटर लंबा तार खींचा जा सकता है। इस हिसाब से एक तोले सोने, या कहें 11.650 ग्राम, की 100 किलोमीटर लंबी तार खींच सकते हैं। यही नहीं, एक औंस यानी 31.100 ग्राम सोने को हथौड़े से ठोंक-पीट-कूट कर, 16 वर्ग मीटर क्षेत्रफल का बारीक पतरा बना सकते हैं। पतरा 1/1200 मिलीमीटर तक एकदम बारीक किया जा सकता है। सोने की एक और खासियत है कि इस पर न तो जंग लगता है, न घुलता है, न चूहा कुतर सकता है, और न ही कीड़ा या दीमक खा सकती है।

स्वर्ण खनन की जटिल प्रक्रिया

सोना धरती की सतह से 4 किलोमीटर से अधिक नीचे पाया जाता है। मोटे तौर पर, हर 17 टन स्वर्ण पत्थरों से लंबी और जटिल मशक़्क़त के बाद आखिरकार एक औंस (31.100 ग्राम) 24 कैरेट शुद्धता का सोना निकलता है। 24 कैरेट ही एकदम खरा सोना होता है। सोना सर्वत्र है- धरती ही नहीं, समुद्र, नदी, पेड़- पौधे और मानव शरीर तक में बारीक-बारीक सोने के कण रहते हैं। दक्षिण अफ्रीका की धरती सबसे ज्यादा सोना उगलती है। फिर अमेरिका, आस्ट्रेलिया, रूस और कनाडा का नम्बर आता है।

भारतीय घरों में मौजूद भंडार

‘वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल’ के आंकड़ों के मुताबिक अब तक विश्व स्वर्ण उत्पादन का 13 फीसदी सोना हिन्दुस्तान में है। हांगकांग एंड शेंघाई बैंकिंग कॉरपोरेशन की ताजा रिपोर्ट तो भारतीय परिवारों के पास 25,000 टन सोना होने का अंदाज़ा आंकती है। यह अमेरिका, जर्मनी, इटली, फ्रांस, रूस, चीन, स्विट्जरलैंड, भारत, जापान व तुर्किये समेत 10 शीर्ष केंद्रीय बैंकों के संयुक्त स्वर्ण भंडार से ज़्यादा है। यूं भी, चीन व भारत में दुनिया में सर्वाधिक सोने की खपत होती है।

‘वन ग्राम गोल्ड जूलरी’ का चलन

ज्यों-ज्यों सोना आसमान की उड़ान भरता गया, त्यों- त्यों ‘वन ग्राम गोल्ड जूलरी’ का चलन बढ़ने लगा। हाल के सालों तक ऐसी ‘वन ग्राम गोल्ड जूलरी’ को बंधेल कहते थे, जो ठगी का बड़ा ज़रिया था। इनमें भीतर गिल्ट या कोई सस्ती धातु होती है, और ऊपर शुद्ध सोने का वर्क चढ़ा होता है। देखने में एकदम सोने के गहने लगते हैं। अच्छे सुनार भी असली- नक़ली की पहचान करने में चूक जाते हैं। कसौटी पर भी इनकी कस एकदम 24 कैरेट सोने की ही आती है।

लंदन में निकलता है भाव

सोने का भाव निकालने के पीछे का गणित बहुत सरल है। भारत में सोने का भाव लंदन के भाव पर निर्भर करता है। लंदन स्थित रोथसचाइल्ड बैंक के गोल्ड रूम में 5 नामी बुलियन डीलरों द्वारा दशकों तक रोजाना सुबह साढ़े 10 बजे और शाम 3 बजे अमेरिकी डॉलरों में सोने का भाव तय किया जाता रहा है। सोने के भाव निर्धारण की यह व्यवस्था 1919 से 2004 तक जारी रही। अब यह लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन करती है। ब्रिटेन में शनिवार-रविवार बैंक बंद रहते हैं, इसलिए भारत में भी इन दो दिन ताज़ा भाव नहीं निकलता। शुक्रवार के बाद सोमवार को दोपहर दो-ढाई बजे ताज़ा भाव खुलता है। इस दौरान शुक्रवार के भाव पर ही ख़रीद-फ़रोख़्त चलती है। भाव का उतार-चढ़ाव सोने की खरीद- फरोख्त के आर्डरों पर ही निर्भर करता है।

                                                                                                                                 -लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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