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मातृत्व में लाभकारी हल्का-फुल्का योग

हल्के-फुल्के योगासन मातृत्व के दौरान सुरक्षा प्रदान करते हैं । इनके जरिये प्रेग्नेंट महिला द्वारा श्वास पर नियंत्रण करके अपने रक्त संचार को बेहतर किया जा सकता है। दरअसल योगा प्रैक्टिस महिला को पेन फ्री गर्भावस्था के लिए शारीरिक-मानसिक...

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हल्के-फुल्के योगासन मातृत्व के दौरान सुरक्षा प्रदान करते हैं । इनके जरिये प्रेग्नेंट महिला द्वारा श्वास पर नियंत्रण करके अपने रक्त संचार को बेहतर किया जा सकता है। दरअसल योगा प्रैक्टिस महिला को पेन फ्री गर्भावस्था के लिए शारीरिक-मानसिक रूप से तैयार करता है। इन दिनों में योग विशेषज्ञ की सलाह व विशेषज्ञ में करना बेहतर है।

प्री-नेटल योगा आमतौर पर बहुत धीमी की जाने वाली प्रैक्टिस है, जो प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में आने वाले शारीरिक और भावनात्मक बदलावों को सपोर्ट करने के लिए की जाती है। यह योगा गर्भावस्था के शुरुआती दिनों से शुरू होकर डिलीवरी तक आसानी से किया जा सकता है। प्री-नेटल योगा घर पर रहकर ऑनलाइन यू-ट्यूब द्वारा दिखाये गये वीडियोज के जरिये भी कर सकते हैं, जो काफी धीमी गति से योगासन करने के लिए निर्देश देते हैं।

मातृत्व में सुरक्षा का पहलू

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हल्के-फुल्के योगासन मातृत्व की प्रक्रिया के दौरान पूरी सुरक्षा देते हैं और इनके जरिये महिला द्वारा श्वास पर नियंत्रण करके अपने रक्त संचार को बेहतर किया जा सकता है और अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के साथ अपना एक गहरा कनेक्शन भी महसूस कर सकती हैं। लगातार की जाने वाली यह योगा प्रैक्टिस महिला के लिए पेन फ्री गर्भावस्था के लिए उसे शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करता है। यह उन्हें शारीरिक गतिविधियों को खुलकर करने के लिए मोटिवेट ही नहीं करता बल्कि वे खुलकर आसनों को करके अपने आपको ऊर्जा से लबरेज पाती हैं।

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ट्रेंड इंस्ट्रक्टर की लें मदद

जो महिलाएं प्रेग्नेंट हैं और जिन्होंने अभी तक योगा शुरू नहीं किया है, उनको योगासन करने के लिए सर्टिफाइड प्री-नेटल ट्रेंड इंस्ट्रक्टर से ही ट्रेनिंग लेनी चाहिए। शुरुआत में मंद गति से सांस लेना और छोड़ना, शरीर को धीरे-धीरे स्ट्रेच करना और गर्भावस्था के लिए विशेष तौर पर डिजाइन किए गये बेसिक पॉस्चर के साथ योगा करना चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में नये-नये तरह के बदलाव होते हैं। इसलिए रोज हर हाल में करने की बजाय स्वस्थ रहने के लिए योगा उतना ही करना है, जितना गर्भवती स्त्री को इससे ज्यादा थकान न लगे।

शरीर के समझें इशारे

ज्यादा कठोर आसन और एडवांस पॉस्चर विशेष तौरपर बिना किसी के निगरानी के नहीं करने चाहिए। अपने शरीर की भाषा सुननी चाहिए। आपका शरीर जितने की आपको इजाजत देता है, आपको उतनी ही कड़ी मेहनत और श्रम करना चाहिए, तभी आपका शरीर धीरे-धीरे योगासन के लिए अपने आपको शारीरिक रूप से तैयार कर सकता है।

डाक्टरी सलाह से योगाभ्यास

*प्री-नेटल योगासन डॉक्टर की सलाह पर ही करें। * श्वसन क्रिया, हल्के फुल्के पॉस्चर जैसे कैट काओ, बर्ड डॉग और मलासन पर ही ज्यादा फोकस करें। * सीने की मांसपेशियों और एडविक फ्लोर को मजबूती देने वाले आसन ही करें। * तनाव से मुक्त रहने के लिए योगा, निद्रा और प्राणायाम करें। * कड़े आसन करने की बजाय उन्हीं आसनों को करें, जो आपको एकाग्रचित होने में सहयोग करें और आपके लिए आरामदेह साबित हों।

सावधानियां भी जरूरी

* कमर को पीछे की ओर ज्यादा मोड़ने वाले, गहराई से अचानक मुद्रा में बदलाव करने वाले, जंप बैक और दूसरे कठिन आसन करने से परहेज रखें।* जो हमें भीतर से ऊर्जा प्रदान करते हैं, उन आसनों को करें। एक्सपर्ट की निगरानी में सांस रोकने वाले आसन भी किए जा सकते हैं।* गर्भावस्था के दिनों में ज्यादा स्ट्रेचिंग न करें, क्योंकि इन दिनों हार्मोन्स में बदलाव होता है, जिसके कारण शरीर में लचीलापन आ जाता है, लेकिन जो जोड़ों की सेहत के लिए सही नहीं होता। वजह यह है कि इन दिनों शरीर में जोड़ों की मजबूती कम हो जाती है। -इ.रि.सें.

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