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बदलते मौसम के अनुकूल खानपान

इन दिनों ठंड धीरे-धीरे कम हो रही है। शरीर की अंदरूनी गर्मी भी बढ़ रही है। बदलते मौसम में शरीर की पाचन शक्ति और सूजन से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में खानपान में बदलाव जरूरी है।...

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इन दिनों ठंड धीरे-धीरे कम हो रही है। शरीर की अंदरूनी गर्मी भी बढ़ रही है। बदलते मौसम में शरीर की पाचन शक्ति और सूजन से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में खानपान में बदलाव जरूरी है। दरअसल कुछ चीजें जिन्हें हम सेहत के लिए फायदेमंद समझ कर खा रहे हैं वे नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। इस सबंधं में दिल्ली स्थित एक नामी अस्पताल में आहार विशेषज्ञ डॉ. अंजलि शर्मा से रजनी अरोड़ा की बातचीत।

आजकल का बदलता मौसम कई लोगों की सेहत को प्रभावित करता है। शरीर की पाचन शक्ति, रोग प्रतिरोधक क्षमता और पानी की जरूरत गड़बड़ा जाती है। रोजमर्रा में खाई जाने वाली कई चीजें जिन्हें हम सेहत के लिए फायदेमंद समझ कर खाते हैं इस मौसम में वे सेहत की दुश्मन बन जाती हैं। इन पर गौर नहीं किया जाता और अक्सर आहार में शामिल किया जाता है। इनके सेवन से जठराग्नि, गैस, कब्ज, पेशाब की ही परेशानी नहीं होती,बल्कि किडनी व दिल पर भी असर पड़ सकता है। जरूरी है इस दौरान इन चीजों का सेवन बहुत सीमित मात्रा में करें।

गुड़ से गर्मी व सूजन

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ठंड के मौसम में गुड़ को शरीर को गर्म रखने वाला और ताकत देने वाला आहार माना जाता है। जनवरी तक यह कई लोगों को फायदा भी देता है। लेकिन फरवरी में ठंड कम होने लगती है और शरीर की अंदरूनी गर्मी अपने आप बढ़ने लगती है। ऐसे समय में बहुत ज्यादा गुड़ खाना नुकसानदेह हो सकता है। गर्म तासीर वाले गुड़ के अधिक सेवन से शरीर में अनावश्यक गर्मी और सूजन होने लगती है। जिससे पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, मुंह में छाले और जठराग्नि गड़बड़ाने की शिकायत रहती है। कुछ लोगों में त्वचा पर खुजली और जलन भी बढ़ जाती है। अनदेखी करने पर पेट, किडनी और त्वचा से जुड़ी समस्याएं गहरी हो सकती है। गुड़ खून की शर्करा को धीरे-धीरे ऊपर ले जाता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदायक होता है। ठंडा मौसम होने के कारण पानी कम पिया जाता है, गुड़ ज्यादा होने से खून गाढ़ा हो जाता है जिससे थकान, सिर भारी लगना जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

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मूंगफली और चने का अत्यधिक सेवन

बदलते मौसम में मूंगफली और भुने चने का अधिक सेवन पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। ये चीजें शरीर में गर्मी, सूजन, गैस और एसिडिटी बढ़ाती हैं जिससे कुछ लोगों को इन्हें खाने के बाद पेट दर्द और भारीपन महसूस होता है।

दही के सेहत पर प्रभाव

आमतौर पर दही को पाचन के लिए अच्छा और शरीर को ठंडक देने वाला भोजन माना जाता है। लेकिन फरवरी के बदलते मौसम में दही का सेवन,खासकर रात के समय नुकसानदेह हो सकता है। इस दौरान पाचन और प्रतिरोधक तंत्र बहुत संवेदनशील रहता है। दही शरीर में कफ और ठंडक बढ़ा देता है। जिसका नतीजा होता है साइनस ब्लॉक और बार-बार खांसी। रात के समय शरीर की जठराग्नि वैसे ही धीमी हो जाती है। दही उसे कमजोर कर देता है। जिसकी वजह से सुबह घुटनों और कमर में दर्द बढ़ जाता है, जोड़ों में अकड़न बनी रहती है।

बासी खाना

फरवरी में तापमान ऐसा होता है कि खाना जल्दी खराब भी नहीं दिखता और सेहत के लिहाज से सुरक्षित भी नहीं रहता। बासी भोजन में बैक्टीरिया जल्द पनपने लगते हैं जो आंतों को नुकसान पहुंचाते हैं। गैस, दस्त, कब्ज और पेट में जहर बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यही जहर खून में मिलकर किडनी और लिवर पर दबाव डालता है।

बैंगन खाने से सूजन की समस्या

बदलते मौसम में शरीर की पाचन शक्ति और सूजन से लड़ने की क्षमता कमजोर रहती है। बैंगन में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व शरीर में अंदरूनी सूजन को बढ़ाने लगते हैं। यह सूजन बाहर से तुरंत दिखाई नहीं देती, लेकिन अंदर ही अंदर जोड़ों और मांसपेशियों को प्रभावित करती है जिससे सुबह उठते ही जकड़न बढ़ जाती है और चलने में परेशानी महसूस होती है। जिन लोगों को पहले से घुटनों का दर्द, कमर की तकलीफ या जोड़ों में अकड़न रहती है, उनके लिए बैंगन खाना आग में घी डालने जैसा हो सकता है। बैंगन पेट में भारीपन, गैस और एसिडिटी को बढ़ा देता है, रात में पेट फूला रहता है, डकारें आती हैं और नींद बार-बार टूट जाती है।

खीरे से जठराग्नि पर असर

खीरा बहुत ज्यादा कूलिंग नेचर का होता है। यह जठराग्नि को कमजोर करता है जिससे गैस, ब्लोटिंग और लूज मोशन की समस्या पैदा हो सकती हैं।

स्प्राउट्स से वात वृद्धि

स्प्राउट्स शुष्क प्रकृति का और गैस बनाने वाला खाद्य पदार्थ है। इसका सेवन हेल्दी होने के बावजूद बदलते मौसम में वात दोष को बहुत तेजी के साथ बढ़ा देता है। बुजुर्ग या कमजोर पाचन तंत्र वाले लोगों के लिए इन्हें पचाने में परेशानी और ब्लोटिंग, पेट दर्द और आईबीएस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़

सकता है।

चाय-कॉफी से ड्राइनेस

सर्दी के मौसम में गर्मागर्म चाय और कॉफी पीने में बड़ा मजा आता है और कई लोग दिन में चार से पांच कप चाय कॉफी आराम से पीने लगते हैं। चाय-कॉफी में मौजूद कैफीन से शरीर में ड्राइनेस बढ़ने लगती है। भूख कम हो सकती है, पाचन तंत्र गड़बड़ा सकता है, वात दोष बढ़ जाता है। नींद खराब हो सकती है और व्यक्ति एंग्जाइटी का शिकार हो सकता है।

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