पति पहले गया, फिर एक-एक कर छह बेटे : नशे ने पंजाब की इस महिला से छीन लिया पूरा परिवार
Lives Lost to Drugs : कभी पत्नी के रूप में पति को खोने का सदमा और फिर मां के रूप में अपने छह बेटों की चिताएं जलाने की पीड़ा। यह पीड़ा ऐसी होती है, जिसे शब्दों में बयान करना आसान...
Lives Lost to Drugs : कभी पत्नी के रूप में पति को खोने का सदमा और फिर मां के रूप में अपने छह बेटों की चिताएं जलाने की पीड़ा। यह पीड़ा ऐसी होती है, जिसे शब्दों में बयान करना आसान नहीं। लुधियाना की रहने वाली शिंदर कौर की जिंदगी नशे के साए में इस कदर उजड़ गई कि आज उनके घर में न पति बचा है, न बेटे। बीते करीब एक दशक में शराब और नशे की लत ने उनके पूरे परिवार को निगल लिया। अब वह अकेली हैं और उस सवाल के साथ खड़ी हैं, जिसका जवाब सिर्फ उनका नहीं, पूरे समाज और व्यवस्था को देना है।
परिवार पर सबसे ताजा चोट 20 वर्षीय जसवीर सिंह की मौत के रूप में लगी। उसका शव हाल ही में एक नहर के किनारे मिला। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसकी मौत नशे की ओवरडोज से हुई। जसवीर परिवार का सबसे छोटा बेटा था, जिसे मां अब भी संभल जाने की आखिरी उम्मीद मान रही थीं।
पति की मौत से शुरू हुई त्रासदी, फिर एक-एक कर बुझते गए चिराग
इस त्रासदी की शुरुआत 2012 में हुई थी, जब शिंदर कौर के पति मुख्तियार सिंह, जो शराब की लत से जूझ रहे थे, ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पति के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी और बच्चों का भविष्य पूरी तरह शिंदर कौर के कंधों पर आ गया, लेकिन नशे का साया परिवार से हट नहीं सका।
शिंदर कौर बताती हैं कि 2013 में उनके बड़े बेटे कुलवंत सिंह (उम्र 34) की नशे के कारण मौत हो गई। इसके बाद घटनाएं एक के बाद एक सामने आती चली गईं। गुरदीप सिंह की मार्च 2021 में, जसवंत सिंह की जुलाई 2021 में, राजू सिंह की जनवरी 2022 में और बलजीत सिंह की मार्च 2023 में जान चली गई। हर बार चिता जली, हर बार उम्मीद टूटी, लेकिन नशे की आपूर्ति और उसकी पहुंच बनी रही।
नहर किनारे मिला शव, इंजेक्शन से नशे की आशंका
पुलिस के अनुसार, जसवीर सिंह नशा करते समय एक अन्य व्यक्ति के साथ था। दोनों ने कथित तौर पर इंजेक्शन के जरिए नशा किया, जिसके बाद जसवीर की हालत अचानक बिगड़ गई। साथ मौजूद व्यक्ति घबरा गया और मौके से फरार हो गया।
पुलिस ने इस मामले में दो लोगों, जिनमें एक महिला भी शामिल है, के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। महिला पर नशा सप्लाई करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
‘युद्ध नशे विरुद्ध’ पर सवाल, जमीनी हकीकत से टकराता दावा
शिंदर कौर की पीड़ा केवल व्यक्तिगत नहीं है। वह इसे सामाजिक और प्रशासनिक विफलता से जोड़कर देखती हैं। उन्होंने राज्य सरकार के ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर नशे की बिक्री अब भी जारी है। उनका कहना है कि नशा बेचने वालों को पकड़ा जरूर जाता है, लेकिन बाद में वे छूट जाते हैं, जिससे नशे का नेटवर्क और मजबूत हो जाता है।
आंसुओं के बीच वह कहती हैं कि उनका परिवार नशे की भेंट चढ़ गया, लेकिन वह चाहती हैं कि किसी और मां को यह दर्द न झेलना पड़े। उनका आग्रह है कि नशे की सप्लाई पर सख्ती से रोक लगे और इलाज, काउंसलिंग तथा पुनर्वास की व्यवस्था को मजबूती दी जाए, ताकि युवा समय रहते इस जाल से बाहर निकल सकें।
शिंदर कौर का यह भी आरोप है कि उनके छह बेटों की मौत के बावजूद न तो क्षेत्र के विधायक और न ही किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कभी उनके घर आकर हालात जानने की कोशिश की। इससे परिवार खुद को उपेक्षित और अकेला महसूस कर रहा है।
स्थानीय लोगों में नजर आया गुस्सा
घटना के बाद स्थानीय समुदाय में गुस्सा और बेचैनी साफ दिखाई दी। इलाके में नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन भी हुए। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पंजाब के कई घरों की सच्चाई है, जहां नशा धीरे-धीरे पूरे परिवार को तोड़ देता है।
आज शिंदर कौर के घर में केवल बहू और एक पोता ही बचे हैं। जहां कभी छह बेटों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा है। बची हैं तो सिर्फ यादें और एक मां की वह अपील, जो चाहती है कि उसका दर्द किसी और की कहानी न बने।

