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अनुभवी सलाह बचाएगी जड़ी-बूटी के नुकसान से

हमारी परंपरागत चिकित्सा प्रणालियों में जड़ी-बूटियों से औषधियां तैयार की जाती हैं। ऐसे में लोग उन्हें साइड इफेक्ट रहित समझते हैं। वे इनके सेवन के लिए डॉक्टर या वैद्य से राय नहीं लेते। ये कई बार नुकसानदेह भी हो...

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हमारी परंपरागत चिकित्सा प्रणालियों में जड़ी-बूटियों से औषधियां तैयार की जाती हैं। ऐसे में लोग उन्हें साइड इफेक्ट रहित समझते हैं। वे इनके सेवन के लिए डॉक्टर या वैद्य से राय नहीं लेते। ये कई बार नुकसानदेह भी हो सकती हैं। राय लेना बेहद जरूरी है कि कौन सी जड़ी-बूटी खाएं, कब खाएं और कैसे खाएं।

हाल के सालों में प्राकृतिक दवाओं यानी जड़ी-बूटियों को लेकर आम लोगों में विश्वास बहुत ज्यादा बढ़ा है। लेकिन इस बढ़ते भरोसे के बीच सावधानी बहुत जरूरी है। क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में जड़ी बूटियों और विभिन्न तरह के हर्बल उत्पादों का जो अंधाधुंध उपयोग शुरू हुआ है, उससे फायदे की जगह कई तरह के नुकसान भी सामने उभरकर आए हैं।

दरअसल आम लोग जड़ी-बूटियों को हर हालत में सुरक्षित समझते हैं। इसलिए वे कई बार इनके जानकारों से भी यह राय लेना जरूरी नहीं समझते कि कौन सी जड़ी बूटी खानी चाहिए, कब खानी चाहिए और कैसे खानी चाहिए। ऐसी जड़ी बूटियां जो आमतौर पर फायदेमंद होती हैं, कई बार उनसे भी नुकसान हो सकते हैं। इसलिए इनका सेवन बिना जानकार की राय कभी नहीं करें। व्हाट्सएप, यू-ट्यूब और सोशल मीडिया में प्रसारित कंटेंट से भी सजग रहें।

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ओवरडोज से रहें सावधान

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सवाल है जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते हुए किस-किस तरह की सावधानियां बरती जानी चाहिए, जिससे हम इनके जोखिम से बचे रहें? दरअसल जड़ी बूटियां पौधों से प्राप्त होती हैं, इसलिए इन्हें रासायनिक दवाओं की तुलना में ज्यादा कोमल माना जाता है। मगर इनकी भी एक लिमिट होती है। कई बार लोग जड़ी बूटियों को नुकसान न पहुंचाने वाली समझकर इसके ओवर डोज का शिकार हो जाते हैं। इससे उल्टी, दस्त, सिरदर्द और चक्कर तो आते ही हैं, कई बार लिवर या किडनी भी फेल हो सकती है। इसलिए कोई जड़ी बूटी तय डोज से ज्यादा न लें।

एलर्जी होने का खतरा

भारत में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी जैसी चिकित्सा प्रणालियां सदियों से उपयोग में रही हैं। लेकिन पारंपरिक ज्ञान होने के बावजूद ऐसा हो सकता है कि किसी विशेष जड़ी बूटी से किसी को कुछ न होता हो और किसी को उससे एलर्जी हो। जिसको एलर्जी है, उसके लिए कोई जड़ी बूटी त्वचा पर रेशेज डाल सकती हैं। सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकती है या सूजन हो सकती है। इसलिए जड़ी बूटी का इस्तेमाल करते समय किसी जानकार की राय लेना जरूरी है। कई जड़ी बूटियां पाचन सुधारने, प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने और शरीर की सूजन कम करने में बहुत असरकारक मानी जाती हैं। लेकिन कई बार यही जड़ी बूटियां किसी ऐसे व्यक्ति के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं, जो पहले अंग्रेजी दवाओं का इस्तेमाल कर रहा हो।

सेवन की अवधि और स्थितियां

लगभग हर आदमी यह समझता है कि जड़ी-बूटियों को लंबे समय तक उपयोग किया जा सकता है व इनमें किसी तरह का साइड इफेक्ट नहीं। पर यह बात सही नहीं है। विशेषकर गर्भावस्था और स्तनपान करा रही महिलाएं अगर इस तरह के भ्रम का शिकार हों और वे लंबे समय से ली जा रही जड़ी बूटियों को इन विशेष स्थितियों में भी लगातार लेती रहें, तो इनसे परेशानी पैदा हो सकती है। इसलिए विशेष परिस्थितियों में जड़ी बूटियों के जानकारों से जरूरी सलाह लें।

मिलावटी औषधियां

अन्य वस्तुओं की तरह जड़ी-बूटियों में भी खूब मिलावट हो रही है। यह अशुद्धता कई बार तो जानलेवा तक होती है। लेकिन अगर जान न भी जाए तो शरीर को मिलावटी जड़ी-बूटियां कई तरह से परेशान कर सकती हैं। इसलिए जड़ी बूटियों का इस्तेमाल आंख मूंदकर कभी न किया जाए।

कुछ साइड इफेक्ट भी हैं

कुछ जड़ी बूटियों में तो अकसर इस तरह के जोखिम बने रहते हैं। मसलन हल्दी, सूजन कम करने में मददगार है, लेकिन अगर जरूरत से ज्यादा हल्दी का इस्तेमाल कर लिया जाए तो पेट में जलन और ब्लड थिनिंग बढ़ जाती है। इसी तरह अवश्गंधा, तनाव और थकान में तो लाभकारी है,लेकिन अगर आपको थायरॉयड के लक्षण हो तो कभी भी बिना योग्य जानकार के सलाह के बिना कभी इस्तेमाल न करें। क्योंकि थायरायड की स्थिति में अश्वगंधा शरीर के हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ सकती है। एलोवेरा के उपयोग में भी यही सावधानी बरतने की जरूरत होती है। क्योंकि इसके लंबे समय तक अंधाधुंध इस्तेमाल से इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन बढ़ जाता है। यही बात नीम जैसी हर मामले में उपयोगी जड़ी बूटी पर भी लागू होती है। प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए चर्चित गिलोय अत्याधिक सेवन से लिवर को तो डेमेज करती ही है, प्रतिरक्षा प्रणाली को भी नुकसान पहुंचाती है।

जड़ी बूटियों को चमत्कार न माना जाए। हां, इन्हें जहर मानने की भी जरूरत नहीं है। ये औषधियां हैं जो हमें कई परेशानियों में लाभ पहुंचाती हैं, तो कई बार इनका उपयोग भी परेशानी पैदा करने वाला हो जाता है। इसलिए आंख मूंदकर इनके इस्तेमाल से बचें। -इ.रि.सें.

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