ड्रोन ट्रैफिक मैनेजर : संभावनाओं का नया क्षेत्र
विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। एक ही समय पर आकाश में बहुत सारे ड्रोन मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में ड्रोन ट्रैफिक मैनेजर का काम है, ड्रोन को सही जगह, सही समय और सुरक्षित...
विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। एक ही समय पर आकाश में बहुत सारे ड्रोन मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में ड्रोन ट्रैफिक मैनेजर का काम है, ड्रोन को सही जगह, सही समय और सुरक्षित तरीके से उड़ाने में मदद करना। भविष्य में कई तरह के संगठन ऐसे विशेषज्ञों को नियुक्त कर सकते हैं।
कल्पना कीजिए कुछ साल बाद किसी महानगर के ऊपर आसमान में एक ही समय पर सैकड़ों ड्रोन उड़ रहे हैं। कोई कहीं दवा लेकर जा रहा है, कोई ई-कॉमर्स पैकेट पहुंचा रहा है, कोई खेत की निगरानी कर रहा है, कोई बिजली लाइन का निरीक्षण कर रहा है, कोई आपदा प्रभावित इलाके की तस्वीरें ले रहा है। अब सवाल यह नहीं होगा कि ड्रोन कौन उड़ा रहा है बल्कि ये होगा कि इतने सारे ड्रोन्स जब एक साथ आसमान में मंडरा रहे होंगे, तो कहीं वे एक-दूसरे से टकरा न जाएं और वह जो कुछ कर रहे हैं, वो रुक जाए। आखिर नये नियमों के मुताबिक किसी आसमान के ऊपर ड्रोन कैसे उड़ेंगे? आने वाले समय में इसी समस्या से निपटने के लिए एक नया दिलचस्प कैरियर तैयार हो रहा है ड्रोन ट्रैफिक मैनेजर का। ड्रोन ट्रैफिक मैनेजमेंट का संसार एक ही समय पर आकाश में मौजूद बहुत सारे मानवरहित विमानों या ड्रोन की पहचान, उनकी उड़ान की योजना, मार्ग संघर्ष से बचाव, डिजिटल निगरानी और हवाई क्षेत्र के सुरक्षित इस्तेमाल से जुड़ा है।
इसलिए चाहिए ड्रोन ट्रैफिक मैनेजर
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल अब केवल वीडियो शूटिंग या शादी-ब्याह की फोटोग्राफी तक सीमित नहीं। कृषि, भूमि सर्वेक्षण, मानचित्रण, बुनियादी ढांचा निरीक्षण, आपदा प्रबंधन, खनन, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल दिन-पर-दिन बढ़ रहा है। इसलिए सरकार ने ड्रोन्स के लिए नियामकीय ढांचा तैयार किया है और डिजिटल स्काई प्लेटफार्म के जरिये ड्रोन तथा हवाई क्षेत्र से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया है। ड्रोन अर्थव्यवस्था के पीछे डेटा, हवाई क्षेत्र, सुरक्षा और संचालन की पूरी नई व्यवस्था विकसित होगी। यही व्यवस्था इस नये कैरियर की जमीन तैयार करती है।
जिम्दारियों का ब्योरा
ड्रोन ट्रैफिक मैनेजर का काम है, ड्रोन को सही जगह, सही समय और सुरक्षित तरीके से उड़ाने में मदद करना। इसकी जिम्मेदारियां, संस्था और भूमिका के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन इनमें प्रमुख रूप से शामिल हो सकते हैं- ड्रोन की उड़ान योजनाओं का प्रबंधन करना। किसी ड्रोन के लिए निर्धारित हवाई क्षेत्र और प्रतिबंधित क्षेत्रों की जानकारी रखना। संभावित मार्ग संघर्ष की पहचान करना। मौसम और दूसरे परिचालन जोखिमों को समझना। लोकेशन और उड़ान स्थिति की निगरानी। आपातस्थिति में वैकल्पिक मार्ग या कार्रवाई में मदद करना। ड्रोन ऑपरेटरों और डिजिटल प्रणालियों में समन्वय। उड़ान संबंधी डिजिटल रिकॉर्ड और डेटा का प्रबंधन।
जरूरी योग्यताएं
इस क्षेत्र में अलग-अलग भूमिकाओं के लिए अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि उपयोगी हो सकती है। बारहवीं के बाद छात्र ड्रोन एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, कंप्यूटर, भू-सूचना प्रणाली (जीआईएस) या संबंधित तकनीकी पाठ्यक्रमों को कर सकते हैं। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए एयरो स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल या संबंधित क्षेत्रों का ज्ञान उपयोगी हो सकता है। वहीं जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और जियो स्पेशियल टेक्नोलॉजी जानने वाले युवाओं के लिए भी इस क्षेत्र में अवसर बन सकते हैं।
इन संस्थानों में मिलेगी नौकरी
ड्रोन ट्रैफिक मैनेजमेंट का भविष्य केवल किसी कंपनी तक सीमित नहीं है। कई तरह के संगठन ऐसे विशेषज्ञों को नियुक्त कर सकते हैं। मसलन- दवाएं, तुरंत पहुंचाए जाने वाले जरूरी सामान और अन्य उत्पादों की हवाई डिलीवरी वाली कंपनियां। खेतों की निगरानी और कृषि संबंधी कार्यों के संचालन के लिए एग्री टेक कंपनियां। भूमि और बुनियादी ढांचे के सर्वेक्षण एवं मैपिंग से जुड़ी कंपनियां। ड्रोन आधारित परिवहन नेटवर्क में लॉजिस्टिक कंपनियां। बिजली लाइनों, पाइप लाइनों, सड़कों और निर्माण परियोजनाओं की निगरानी में लगी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां। विभिन्न ग्राहकों के लिए ड्रोन बेड़े का संचालन करने वाले ड्रोन सेवा प्रदत्ता।
ऐसे करें शुरुआत
जो युवा इस क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहते हैं, उन्हें शुरुआत में केवल ड्रोन सीखने के बजाय पूरा इको सिस्टम समझना चाहिए, जिसका पहला कदम ड्रोन तकनीक की बुनियादी जानकारी हासिल करना हो सकता है। इसके बाद डीजीसीए से संबंधित मौजूदा ड्रोन नियमों, प्रमाणन और प्रशिक्षण आवश्यकताओं को समझना जरूरी है। फिर जीआईएस डिजिटल मैपिंग, रिमोट सेंसिंग, मौसम संबंधित मूलभूत जानकारी और डेटा विश्लेषण जैसे कौशल भी खुद में जोड़े जा सकते हैं। इसके अलावा ड्रोन सिमुलेटर और वास्तविक प्रशिक्षण के जरिये उड़ान संचालन की समझ विकसित करना उपयोगी होगा। अभी जो इस क्षेत्र में प्रोफेशनल मौजूद हैं, उनकी सैलरी स्ट्रक्चर को देखें तो ड्रोन ट्रैफिक मैनेजर को शुरुआत में बहुत आराम से 5 से 8 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिल सकता है।
-इ.रि.सें.

