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छठी इंद्रिय का रहस्य खोज जटिल रोगों के इलाज की तलाश

मस्तिष्क-शरीर के संवाद पर अध्ययन

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मनुष्य की हर धड़कन,सांस और प्रतिरक्षा संकेत के पीछे मस्तिष्क और आंतरिक अंगों के बीच एक गुप्त संवाद छिपा होता है। इस आदान-प्रदान को हम कभी महसूस नहीं करते हैं। शायद यही हमारी ‘छठी इंद्रिय’ है। इसी अंत: संवेदना के अध्ययन से वैज्ञानिक पता लगाना चाहते हैं कि मस्तिष्क शरीर की जरूरतों के प्रति कैसे सजग रहता है। एक तंत्रिका एटलस निर्मित करने की तैयारी है। यह अध्ययन मस्तिष्क और शरीर के बीच संचार को समझने के तरीके को नया रूप दे सकता है और जटिल रोगों के इलाज के नए रास्ते खोल सकता है।

क्या हमारे शरीर के भीतर कोई छठी इंद्रिय भी सक्रिय है? यदि उसका अस्तित्व है तो वह किस रूप में अभिव्यक्त होती है? यह एक विचारणीय प्रश्न है जिसका वैज्ञानिक उत्तर खोजना चाहते हैं। हमारे शरीर के अंदर शांत संचार होता रहता है। हमारी हर धड़कन,सांस और प्रतिरक्षा संकेत के पीछे मस्तिष्क और आंतरिक अंगों के बीच एक गुप्त संवाद छिपा होता है। यह निरंतर आदान-प्रदान हमें जीवित रखता है। लेकिन हम इसे कभी महसूस नहीं करते हैं। शायद यही हमारी ‘छठी इंद्रिय’ है।

तंत्रिका एटलस के निर्माण का प्रयास

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वैज्ञानिक शरीर की इस अंतःसंवेदना अथवा इंटेरोसेप्शन का अध्ययन करके यह पता लगाना चाहते हैं कि हमारा मस्तिष्क शरीर की जरूरतों के प्रति कैसे सजग रहता है। अमेरिका के स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट और एलन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों द्वारा हाल ही में शुरू की गई परियोजना का उद्देश्य इस रहस्यमय नेटवर्क का विस्तार से पता लगाना है। यह परियोजना अंतःसंवेदना पहला तंत्रिका एटलस तैयार करेगी।

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जटिल रोगों के इलाज की दिशा में उम्मीद

यह अध्ययन अंततः मस्तिष्क और शरीर के बीच संचार को समझने के हमारे तरीके को नया रूप दे सकता है और जटिल बीमारियों के इलाज के नए रास्ते खोल सकता है। अंतःसंवेदना के जरिए मस्तिष्क यह पता लगा लेता है कि आपके शरीर के अंदर क्या हो रहा है। इसके जरिए आप बिना किसी के बताए जान पाते हैं कि आपको कब भूख लगी है,कब प्यास लगी है, कब गर्मी लग रही है, कब ठंड लग रही है,या आपको शौचालय जाने की जरूरत है। यह जटिल प्रणाली ज्यादातर हमारी जानकारी से परे काम करती है।

भावनाएं पहचानने व तनाव नियंत्रण में सहायक

वैज्ञानिक इसे यानी अंतःसंवेदना को शरीर की ‘छिपी हुई छठी इंद्रिय’ कहते हैं क्योंकि यह शरीर में संतुलन,आराम और तत्परता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। यह आंतरिक जागरूकता आपको भावनाओं को पहचानने और तनाव को नियंत्रित करने में मदद करती है। यह हमें यह भी बताती है कि जैसे शांत होने के लिए कब गहरी सांस लेनी है या ऊर्जा का स्तर कम होने पर कब नाश्ता करना है।

परियोजना में शामिल तंत्रिका विज्ञान विशेषज्ञ

इस परियोजना में तंत्रिका विज्ञान और आनुवंशिकी के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इस टीम का नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ.आर्दम पटापूटियन कर रहे हैं,जो स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में तंत्रिका विज्ञान के प्रोफेसर हैं। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हैल्थ (एनआईएच) ने इस परियोजना को सफल बनाने के लिए पांच वर्षों में 1.42 करोड़ डॉलर देने का वादा किया है।

शरीर की आंतरिक दुनिया का ख्याल

अंतःसंवेदना हमारी दृष्टि या श्रवण जैसी परिचित इंद्रियों से बहुत भिन्न होती है। जहां ये इंद्रियां बाहरी संकेतों का पता लगाने के लिए विशिष्ट अंगों पर निर्भर करती हैं, वहीं अंतःसंवेदना शरीर की आंतरिक दुनिया पर नजर रखती है। इसका तंत्रिका कोशिकाओं का नेटवर्क लगातार हृदय गति, पाचन, रक्तचाप और प्रतिरक्षा गतिविधि पर नजर रखता है। इसके महत्व के बावजूद अंतःसंवेदना को लंबे समय से ठीक से समझा नहीं गया है। शरीर के भीतर से आने वाले संकेतों को रिकॉर्ड करना और उनकी व्याख्या करना मुश्किल होता है। इन्हें ले जाने वाली तंत्रिका कोशिकाएं अंगों में बिखरी हुई होती हैं, और ऐसे ऊतकों में मिल जाती हैं जिन्हें अलग करना मुश्किल होता है।

शरीर की अहम प्रक्रियाओं पर प्रभाव

डॉ.पटापूटियन और उनकी टीम सावधानीपूर्वक मानचित्रण के माध्यम से इसमें बदलाव लाने की उम्मीद करते हैं। अंतःसंवेदना शरीर की लगभग हर महत्वपूर्ण प्रक्रिया को प्रभावित करती है। जब यह संचार बाधित होता है,तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। अध्ययनों ने अंतःसंवेदना के बाधित संकेतों को ऑटोइम्यून रोगों, पुराने दर्द, उच्च रक्तचाप और स्नायु रोगों से भी जोड़ा है। इन मार्गों के काम करने के तरीके का मानचित्रण करके, वैज्ञानिक यह समझने की उम्मीद करते हैं कि ऐसी स्थितियां क्यों उत्पन्न होती हैं और उन्हें कैसे उलटा जा सकता है। यह शोध उन उपचारों को विकसित करने में भी मदद कर सकता है जो मस्तिष्क और शरीर के बीच संचार टूटने की स्थिति में आंतरिक संतुलन बहाल करते हैं।

शोध के होंगे दो प्रमुख चरण

यह परियोजना एक दुर्लभ सहयोग का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें संरचनात्मक, आणविक और कार्यात्मक जीव विज्ञान को जोड़ा गया है। स्क्रिप्स के प्रोफेसर डॉ.ली ये का कहना है कि हमारे परिणाम अन्य वैज्ञानिकों को इस बारे में नए सवाल पूछने में मदद करेंगे कि आंतरिक अंग और तंत्रिका तंत्र कैसे तालमेल बिठाते हैं। यह शोध दो प्रमुख चरणों में सामने आएगा। पहले चरण में संवेदी तंत्रिका कोशिकाओं को लेबल करना शामिल होगा ताकि रीढ़ की हड्डी से आंतरिक अंगों तक उनके मार्गों का पता लगाया जा सके। उन्नत संपूर्ण बॉडी इमेजिंग से इन तंत्रिका संबंधों के उच्च-रिजॉल्यूशन वाले 3डी मानचित्र तैयार किए जाएंगे। दूसरे चरण में आनुवंशिक प्रोफाइलिंग का उपयोग करके विभिन्न अंगों जैसे आंत,मूत्राशय या वसा ऊतक से संकेत भेजने के लिए जिम्मेदार तंत्रिका कोशिकाओं के प्रकारों में अंतर किया जाएगा। ये संयुक्त प्रयास आंतरिक संवेदी मार्गों की संरचना और कार्यप्रणाली को समझने के लिए पहला मानकीकृत संदर्भ तैयार करेंगे। तंत्रिका एटलस शरीर-मस्तिष्क अनुसंधान के संपूर्ण क्षेत्र के लिए एक खाका तैयार कर सकता है और यह अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है कि हमारा तंत्रिका तंत्र स्थिरता बनाए रखने के लिए आंतरिक संकेतों को कैसे एकीकृत करता है।

ब्रेन और बॉडी का संतुलन

स्क्रिप्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.शिन जिन ने कहा, अंतर्ज्ञान स्वास्थ्य के लगभग हर पहलू के लिए मौलिक है,लेकिन यह तंत्रिका विज्ञान का एक बड़ा अनछुआ क्षेत्र बना हुआ है। इस प्रणाली का पहला एटलस बनाकर, हमारा उद्देश्य यह बेहतर ढंग से समझने की नींव रखना है कि मस्तिष्क शरीर को कैसे संतुलन में रखता है,बीमारी में वह संतुलन कैसे बिगड़ सकता है और हम उसे कैसे बहाल कर सकते हैं। अंतःसंवेदना के लिए एक तंत्रिका एटलस का निर्माण तंत्रिका विज्ञान के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इससे हम यह समझ पाएंगे कि हमारे आंतरिक अनुभव को कौन सी चीज संभव बनाती है।

भीतरी संकेत समझने की छिपी हुई प्रणाली

धड़कते दिल की धड़कन से लेकर गहरी सांस लेने के बाद की शांति तक हर संवेदना उन संकेतों पर निर्भर करती है जिन्हें हमारा मस्तिष्क चुपचाप समझता है। इस छिपी हुई प्रणाली का पता लगाकर, वैज्ञानिक उस मौन को समझ में बदलने की उम्मीद करते हैं। यह शोध हमें शरीर के शांत संदेशों को समझने में मदद करेगा और ऐसा करके,हम भीतर से उपचार करना सीखेंगे। शोधकर्ताओं का कार्य न केवल तंत्रिका कोशिकाओं और अंगों के बारे में है, बल्कि यह भी उजागर करने के बारे में है कि जागरूकता भीतर से कैसे उत्पन्न होती है।

यह परियोजना इस बात पर प्रकाश डाल सकती है कि भावनाएं,तनाव और शारीरिक संवेदनाएं आपस में इतनी गहराई से क्यों जुड़ी हुई हैं। यह शोध उन उपचारों को विकसित करने में भी मदद कर सकता है जो मस्तिष्क और शरीर के बीच संचार टूटने की स्थिति में आंतरिक संतुलन बहाल करते हैं।

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