कंपनियां डिजिटल सिक्योरिटी के जानकारों को नियुक्त कर रही हैं। देश में चाहे बैंकिंग हो, स्वास्थ्य हो, सरकारी सेवाएं हों, खरीदारी हो, शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर आइडेंटिटी का- सभी में साइबर सिक्योरिटी का चेकअप जरूरी हो गया है, क्योंकि ये सारे क्षेत्र ऑनलाइन हैं व साइबर हमलों की जद में है। ऐसे में इस साल किसी भी दूसरे क्षेत्र के प्रोफेशनल से ज्यादा साइबर सिक्योरिटी के जानकारों की जरूरत पड़ेगी।
जिस तरह पिछले डेढ़ दशकों से आईटी ने युवाओं के लिए रोजगार की एक व्यापक दुनिया खोली है, ठीक उसी तरह 2025 के अब 2026 भी साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में कैरियर, ‘कैरियर ऑफ द ईयर’ के तरफ बढ़ चला है। आज 80 फीसदी कंपनियां अपने यहां डिजिटल सिक्योरिटी के जानकारों को अप्वाइंट कर रही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि देश में इस समय 60 फीसदी से ज्यादा जीडीपी सर्विस क्षेत्र से तैयार होता है और समूचा सर्विस क्षेत्र साइबर अटैक का शिकार है। इसलिए चाहे बैंकिंग हो, स्वास्थ्य हो, विभिन्न सरकारी सेवाएं हों, वहीं चाहे खरीदारी हो, शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर आइडेंटिटी का- सभी में साइबर सिक्योरिटी का चेकअप जरूरी हो गया है, क्योंकि ये सारे क्षेत्र ऑनलाइन हैं और हर ऑनलाइन क्षेत्र इस समय साइबर जालसाजों के हमलों की जद में है। यही कारण है कि इस साल किसी भी दूसरे क्षेत्र के प्रोफेशनल से ज्यादा साइबर सिक्योरिटी के जानकारों की जरूरत पड़ेगी। हकीकत यह है कि अभी भी जितने साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट की जरूरत है, उसमें से 60 फीसदी ही उपलब्ध हैं। दरअसल, साइबर सिक्योरिटी का क्षेत्र एक ऐसे क्षेत्र के रूप में उभरा है जिसमें इस साल हर समय मांग बरकरार रहेगी। कैरियर विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर सिक्योरिटी का क्षेत्र साल 2026 के लिए कैरियर ऑफ द ईयर की ओर बढ़ता साल है।
डिजिटल दुनिया के खतरे
जहां डिजिटल टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी को धार और तेज रफ्तार दी है, दूसरी तरफ इस तकनीक ने हमारी पूरी जिंदगी को खतरे के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। डेटा की चोरी, एकाउंट हैकिंग, रेनसमवेयर, फिशिंग, ओटीपी फ्रॉड और अब तो धड़ल्ले से एआई आधारित साइबर अटैक होने लगे हैं। इसलिए आज भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सिरदर्द और सबसे ज्यादा परेशानी साइबर अपराधियों के कारण है। इसलिए साइबर सिक्योरिटी बढ़ रही है। उम्मीद है कि इस साल पूरी दुनिया में साइबर सिक्योरिटी के जानकारों की मांग 300 फीसदी से भी ज्यादा रहने वाली है। दरअसल जिस तरह डिजिटल तकनीक जीवन का आधार बन गई है, उसी तरह से यह डिजिटल लाइफ स्मूद ढंग से चलती रहे, इसके लिए साइबर सिक्योरिटी का कवच जरूरी हो गया है। यही कारण है कि 2026 में साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स की मांग हर क्षेत्र में और सबसे ज्यादा है।
चाहें तो भी नहीं बच सकते
दरअसल अगर हम चाहें कि साइबर खतरों से बचने के लिए उन रास्तों यानी उन क्षेत्रों को ही छोड़ दें जहां इसका खतरा है, तो यह संभव नहीं है। क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से दुनिया के 60 फीसदी और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 90 फीसदी क्षेत्र किसी न किसी रूप से डिजिटल तकनीक से जुड़े हुए हैं और जो भी क्षेत्र डिजिटल तकनीक से जुड़ा हुआ है, वह डिजिटल अपराधों की जद में है। इसलिए कहा जाता है कि जहां भी डेटा होगा, वहां डेटा फ्रॉड भी होगा और इसलिए डेटा फ्रॉड को पकड़ने वाले और रोकने वाले विशेषज्ञ भी होंगे। ऐसे में आईटी कंपनियों के लिए साइबर सिक्योरिटी ‘कोर डिपार्टमेंट’ बन गया है। शुरू में जब डिजिटल तकनीक आनी शुरू हुई थी, तो लोग हैकिंग करना शौकिया शुरू करते थे या सीखते थे, लेकिन आज यह व्यवस्थित अपराध है। पूरे के पूरे हैकर्स गैंग हैं। रेनसमवेयर गैंग हैं। और लाखों करोड़ों नेटवर्क लॉक तोड़कर यह हर दिन करोड़ों की कमाई या करोड़ों की लूट करते हैं। मतलब साफ है कि सिक्योरिटी खर्च अब अपने आपको सुरक्षित रखने और व्यवसाय को बचाने का जरिया बन गया है।
आग में घी का काम किया है एआई ने
डिजिटल टेक्नोलॉजी के चलते जहां साइबर हमले और साइबर अपराध बढ़े थे, वहीं एआई ने यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने इस खतरे को कई गुना ज्यादा बढ़ा दिया है। क्योंकि पहले ऐसे अपराधियों के पास न तो प्रॉपर भाषा थी और न तमीज, ये टूटी फूटी मेल करते थे, जिससे लोग समझ जाते थे कि ये किसी अपराधी की मेल है, लेकिन आज ऐसा नहीं होता। एआई ने इनको हर तरह की सुविधा दे दी है। ये हाइफाइ मेल करते हैं और इनका लाइफस्टाइल भी एआई के कारण हाइफाइ हो गया है। जिससे यह डीप फेक कॉल करते हैं, नकली वीडियो बनाते हैं, फर्जी सीईओ बनकर मेल करते हैं और कुछ भी अवास्तविक नहीं लगता। वजह होती है एआई। इसलिए अगर कहा जाए कि साइबर अपराधियों के लिए एआई सबसे बड़ा हथियार साबित हुई है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
साइबर क्षेत्र में कैरियर
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट बनने का मतलब सिर्फ हैकर बनना नहीं है बल्कि इनकी बहुत सी भूमिकाएं हैं। इसलिए कुछ साइबर एक्सपर्ट तकनीकी में माहिर होते हैं, कुछ मैनेजमेंट के एक्सपर्ट होते हैं और कुछ कानून के जानकार होते हैं। बहरहाल इस क्षेत्र में कैरियर के रास्ते मुख्यतः ये हैं :-
एनओसी एनालिस्ट : यानी सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर का इंचार्ज होना। ऐसे लोग लाइव मॉनिटरिंग करते हैं और अलर्ट हैंडलिंग में माहिर होते हैं। पैनट्रेशन टेस्टर और एथिकल हैकर- ये ऐसे साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट होते हैं, जो सिस्टम में आयी खामियों को खोजकर सुधारते हैं। इनसिडेंट रिस्पोंडर- ये एक्सपर्ट हमला होने पर रिकवरी करते है और हमला न हो, इसका नियंत्रण करते हैं। * क्लाउड सिक्योरिटी एक्सपर्ट- ये एडब्ल्यूएस,जीपीसी पर सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं। * जीआरसी स्पेशलिस्ट- ये एक्सपर्ट नियम कानून, पॉलिसी और रिस्क मैनेजमेंट को देखते हैं। * सिक्योरिटी ऑडिटर- ये ऐसे एक्सपर्ट होते हैं जो सिस्टम की जांच और रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल फॉरेंसिक एक्सपर्ट- ये साइबर क्राइम के सबूत इकट्ठा करते हैं।
जरूरी स्किल्स और शिक्षा
इस तरह देखा जाए तो साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में बहुत सारे एक्सपर्ट होते हैं। इस क्षेत्र में जॉब के लिए जरूरी है एनालिटिकल थिंकिंग, डाक्यूमेंटेशन और कम्युनिकेशन में एक्सपर्ट होना। लेकिन इस क्षेत्र में कैरियर बनाना सिर्फ आईटी वालों के लिए ही नहीं है, कोई भी इस क्षेत्र का प्रोफेशनल बन सकता है। भले उसने बीएससी की जगह बीए ही क्यों न किया हो या कि लॉ या मैनेजमेंट के क्षेत्र का हो। जरूरत है तो सीखने की आदत, सुरक्षा की मानसिकता।
चमकदार कैरियर
इस क्षेत्र के प्रोफशनल्स को शुरुआत से ही कम से कम 6 लाख रुपये सालाना का पैकेज आसानी से मिल जाता है और अंत की कोई सीमा नहीं है। देश के कई ऐसे साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट हैं, जो एक-एक संस्थान से साल में अपनी सेवाएं देने के लिए कई करोड़ रुपये का मेहनताना लेते हैं। यह क्षेत्र न केवल मांग में है बल्कि इसका एक चमकदार कैरियर पक्ष भी है। -इ.रि.सें.

