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फिल्म एडिटिंग में रचनात्मक कैरियर

फिल्म एडिटर निर्देशक का महत्वपूर्ण तकनीकी एवं रचनात्मक सहयोगी माना जाता है। डिजिटल सिनेमैटोग्राफी और ओटीटी के विस्तार के बाद फिल्म एडिटर्स की मांग और बढ़ गई है। टीवी चैनल, विज्ञापन एजेंसी, यूट्यूब प्रोडक्शन, डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया कंटेंट...

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फिल्म एडिटर निर्देशक का महत्वपूर्ण तकनीकी एवं रचनात्मक सहयोगी माना जाता है। डिजिटल सिनेमैटोग्राफी और ओटीटी के विस्तार के बाद फिल्म एडिटर्स की मांग और बढ़ गई है। टीवी चैनल, विज्ञापन एजेंसी, यूट्यूब प्रोडक्शन, डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएशन व ई-लर्निंग वीडियो निर्माण और एनीमेशन-वीएफएक्स स्टूडियो जैसे क्षेत्रों में एडिटर्स की वैकेंसी रहती हैं।

फिल्म एडिटिंग मनोरंजन जगत का वह सृजनात्मक क्षेत्र है जहां कच्चे फुटेज को एक प्रभावी, रोचक और अर्थपूर्ण दृश्य कथा में बदला जाता है। एडिटर का काम केवल शॉट्स को जोड़ना ही नहीं, बल्कि कहानी की लय, भावनाओं और प्रभाव को सही ढंग से उभारना भी है। यही कारण है कि एडिटिंग को फिल्म निर्माण की ‘इनविज़िबल आर्ट’ कहा जाता है—जो दिखाई नहीं देता, पर स्क्रीन पर हर प्रभाव उसी पर निर्भर होता है।

एडिटर्स के जॉब्स में बढ़ोतरी

फिल्म इंडस्ट्री में एडिटिंग का महत्व अत्यंत बड़ा है। चाहे फीचर फिल्म हो, वेब सीरीज़, डॉक्यूमेंट्री, विज्ञापन या म्यूज़िक वीडियो—हर प्रोजेक्ट एडिटर की रचनात्मक दृष्टि पर टिका होता है। आज डिजिटल सिनेमैटोग्राफी और ओटीटी के विस्तार के बाद एडिटर्स की मांग पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। एक कुशल एडिटर निर्देशक की कल्पना को साकार करने वाला सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी एवं रचनात्मक सहयोगी माना जाता है।

फिल्म एडिटिंग से जुड़े कोर्स

फिल्म एडिटिंग सीखने के लिए अनेक कोर्स उपलब्ध हैं—जैसे सर्टिफिकेट कोर्स (3–6 माह), डिप्लोमा (1 वर्ष), एडवांस डिप्लोमा (1–2 वर्ष) तथा डिग्री प्रोग्राम (3 वर्ष)। प्रतिष्ठित फिल्म संस्थानों में फिल्म एडिटिंग को विशेष विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। प्रवेश के लिए सामान्यतः न्यूनतम योग्यता 12वीं पास मानी जाती है, जबकि कुछ उच्च संस्थानों में ग्रेजुएशन व प्रवेश परीक्षा की आवश्यकता भी होती है। कोर्स फीस संस्थान और स्तर के अनुसार बदलती रहती है—सर्टिफिकेट कोर्स 30,000 से 1 लाख रुपये तक, डिप्लोमा 1 से 3 लाख रुपये तक तथा डिग्री प्रोग्राम 3 से 10 लाख रुपये तक की फीस में हो सकते हैं। अधिक और सटीक जानकारी संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट/कार्यालय से मिल सकती है।

प्रमुख सरकारी फिल्म संस्थान

फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे : यह भारत का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित फिल्म-शिक्षण संस्थान है। अब डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त कर चुका है अर्थात यह अब केवल डिप्लोमा नहीं, बल्कि डिग्री / पीएच.डी. वगैरह की डिग्री देने में सक्षम है। यहां फिल्म आदि की एडिटिंग में पीजी डिप्लोमा या अब डिग्री (मास्टर लेवल) पाठ्यक्रम उपलब्ध है। सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता : यह संस्था भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आती है। यह संस्थान भी डीम्ड यूनिवर्सिटी की कैटेगरी में आ चुका है जो अपनी डिग्री प्रदान कर सकता है। इस संस्थान में एडिटिंग स्पेशलाइज़ेशन (एमएफए इन सिनेमा (ईडीएम एडिटिंग) उपलब्ध है। इन कोर्सेज में प्रवेश आम तौर पर जून / जुलाई माह में लिखित परीक्षा ( जेईटी / एसआरएफटीआई परीक्षा) और साक्षात्कार के आधार पर होता है।

रोजगार के अवसर

फिल्म एडिटिंग केवल फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है। आज यह कौशल अनेक क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी है—टीवी चैनल, न्यूज़ रूम, विज्ञापन एजेंसी, यूट्यूब प्रोडक्शन, डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएशन, शिक्षा एवं ई-लर्निंग वीडियो निर्माण, कॉर्पोरेट ट्रेनिंग फिल्में, इवेंट कवरेज, वेडिंग फिल्मिंग और एनीमेशन-वीएफएक्स स्टूडियो जैसे क्षेत्रों में एडिटर्स की व्यापक आवश्यकता रहती है।

आमदनी की संभावना

फिल्म एडिटिंग के क्षेत्र में आमदनी कई बातों पर निर्भर करती है—जैसे कौशल, अनुभव, काम का प्रकार, शहर, और आप फ्रीलांसर हैं या किसी स्टूडियो में कार्यरत। फिर भी एक सामान्य अनुमान के अनुसार, शुरुआती स्तर (0–2 वर्ष अनुभव) वालों को छोटे स्टूडियो / न्यूज़ चैनल / यूट्यूब प्रोडक्शन हाउस में काम मिल जाता है। जहां शुरुआत 15,000 रुपये– 30,000 रुपये प्रति माह तक हो सकती है। फ्रीलांस छोटे प्रोजेक्ट्स में 3,000 – 10,000 रुपये प्रति वीडियो (वीडियो की लंबाई और जटिलता पर निर्भर) तक कमा सकते हैं। मिड-लेवल एडिटर जिन्हें 2–5 वर्ष अनुभव है, वे टीवी चैनल, विज्ञापन एजेंसियों, ओटीटी कंटेंट स्टूडियो में काम करके 40,000 – 80,000 रुपये प्रति माह तक कमा सकते हैं। बड़ी प्रोडक्शन कंपनियों, फिल्म हाउस, ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म में 1 लाख – 2 लाख रुपये प्रति माह तथा फ्रीलांस बड़े प्रोजेक्ट में 1 लाख – 5 लाख रुपये प्रति प्रोजेक्ट कमाई की जा सकती है। फिल्म एडिटर (फीचर फिल्म/वेब सीरीज़), फिल्मों में पेमेंट प्रोजेक्ट आधार पर तय किया जाता है। जो 5 लाख – 50 लाख रुपये प्रति फिल्म हो सकता है। बड़े फिल्म एडिटर्स (बॉलीवुड / ओटीटी) इससे भी अधिक चार्ज करते हैं। फ्रीलांसिंग में कमाई और भी अधिक होती है। आजकल यूट्यूब, सोशल मीडिया, एड एजेंसियों, डिजिटल मार्केटिंग कंपनियों में एडिटर्स की भारी मांग है। फ्रीलांस एडिटर अच्छे नेटवर्क और पोर्टफोलियो के साथ: 1–3 लाख रुपये प्रति माह कमाना बिल्कुल संभव है। शादी/इवेंट वीडियो एडिटिंग में सीजन के दौरान 1–5 लाख रुपये महीना भी मिल जाता है।

यदि किसी में रचनात्मक सोच, तकनीक को समझने की क्षमता और कहानी कहने का जुनून है, तो फिल्म एडिटिंग उसके लिए उज्ज्वल और स्थायी कैरियर साबित हो सकता है।

 

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