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सावधानी और प्रभावी उपचार से प्री-एरिकुलर साइनस पर नियंत्रण

कान के पास जन्मजात छेद की समस्या

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प्री-एरिकुलर साइनस एक सामान्य, लेकिन कम जाना-पहचाना जन्मजात दोष है, जो छेद के रूप में कान के सामने, बिल्कुल ऊपर पाया जाता है। अधिकतर मामलों में यह हानिरहित होती है और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करती। लेकिन बार-बार संक्रमण, दर्द या सिस्ट की स्थिति में उचित उपचार करना बेहद जरूरी है। कुछेक मामलों में सर्जरी कराना बेहतर है। सही समय पर इलाज और सफाई से प्री-एरिकुलर साइनस से जुड़ी जटिलताओं से बचा जा सकता है।

देखा जाए तो मानव शरीर की संरचना अत्यंत जटिल होती है। जिसमें कई बार ऐसे जन्मजात निशान या असमानताएं पाई जाती हैं, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं या फिर शुरुआत में समझ नहीं पाते कि यह क्या बला है! हम उन शारीरिक असमानताओं से बिल्कुल अनजान होते हैं और यही स्थिति मन में डर व घबराहट पैदा कर देती है। जबकि वे कई बार उतनी भयानक नहीं होती हैं। प्री-एरिकुलर साइनस भी ऐसी ही एक सामान्य, लेकिन कम जानी-पहचानी स्थिति है। यह एक जन्मजात दोष है, जो कान के सामने, बिल्कुल ऊपर , चेहरे के पास पाया जाता है। छोटे आकार का यह छेद अक्सर 1-2 मिमी का होता है, और कभी-कभी इसमें बाल या स्राव भी पाया जा सकता है। इसके प्रभाव ,जैसे अक्सर सर्दी– जुकाम या बुखार होना आदि, अक्सर बच्चे के तीन से चार साल के होने पर दिखने लगते हैं। यह डराने वाली स्थिति नहीं होती लेकिन कई बार लोग गलत डॉक्टर के पास भी पहुंच जाते हैं जिससे बात बिगड़ जाती है। वहीं अगर सही डॉक्टर और ट्रीटमेंट मिले तो बमुश्किल हफ्ते भर का समय लगता है ठीक होने में।

प्री-एरिकुलर साइनस होने की वजह

प्री-एरिकुलर साइनस, भ्रूण के विकास के दौरान कान और उसके आसपास की संरचनाओं के बनते समय उत्पन्न होता है। जब भ्रूण के कान के ऊपरी हिस्से में छह छोटे ऊतक या ‘हिलॉइड’ बनते हैं। सामान्य विकास में ये ऊतक आपस में मिलकर कान की पूरी संरचना बनाते हैं। लेकिन कभी-कभी इन ऊतकों के मिलन में कमी रह जाती है, जिससे कान के सामने छोटे छिद्र या फोड़े जैसी संरचना बन जाती है।

कई बार यह आनुवंशिक कारणों से भी होता है। यदि परिवार में किसी को यह स्थिति रही हो, तो संभावना बढ़ जाती है कि बच्चे में भी प्री-एरिकुलर साइनस हो जाए। हालांकि यह स्थिति ज्यादातर मामलों में सामान्य और हानिरहित होती है।

रोग का प्रसार

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, प्री-एरिकुलर साइनस का प्रसार अलग-अलग आबादी में भिन्न होता है। एशियाई देशों में यह स्थिति अधिक आम पाई जाती है। अफ्रीकी और यूरोपीय देशों में लगभग 0.1 प्रतिशत से 0.9 प्रतिशत लोगों में यह पाया जाता है। एशियाई देशों में, खासकर भारत, पाकिस्तान, और चीन में इसका प्रतिशत 4 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक हो सकता है। यह स्थिति पुरुषों और महिलाओं में लगभग बराबर रूप से पाई जाती है। अधिकांश मामलों में यह एक कान पर होता है, लेकिन 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत मामलों में यह दोनों कानों पर भी पाया जा सकता है।

खतरे और जटिलताएं

ज्यादातर प्री-एरिकुलर साइनस हानिरहित होती है और किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या नहीं पैदा करती। लेकिन इसके कुछ मामलों में जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। छिद्र में जीवाणु प्रवेश कर सकते हैं और संक्रमण पैदा कर सकते हैं। जिससे सूजन, लालिमा, दर्द और कभी-कभी पस भी जमा हो सकता है। संक्रमण होने पर अक्सर एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत पड़ती है। लेकिन लंबे समय तक उपचार न होने पर छोटे छिद्र के अंदर सिस्ट बन सकती है।

यह सिस्ट बाद में पक कर फट जाती है और पस बाहर आता है। लगातार संक्रमण या सूजन से कान के आसपास दर्द और असुविधा बढ़ सकती है। खासकर ठंड के मौसम में। यह स्थिति कान की देखभाल और सफाई में समस्या पैदा कर सकती है।

सर्जिकल जटिलताएं

यदि प्री-एरिकुलर साइनस बार-बार संक्रमित होती हो या बड़ी सिस्ट बन रही हो, तो सर्जरी से इसे निकालना ही सबसे प्रभावी उपाय है। सर्जरी आमतौर पर लोकल एनेस्थीसिया में की जाती है और रिकवरी समय भी कम लगता है। आधुनिक तकनीक के साथ सर्जरी में निशान भी कम रहता है। लेकिन यदि बड़ी उम्र में सर्जरी की जाए, तो घाव या निशान रह सकता है। सर्जरी के बाद दुर्लभतम मामलों में पुनरावृत्ति हो सकती है। हालांकि कुशल हाथों से इलाज होने पर पुनरावृत्ति की संभावना नहीं होती।

सावधानी और देखभाल

अधिकांश प्री-एरिकुलर साइनस वाले व्यक्ति अपने पूरे जीवन बिना किसी समस्या के रह सकते हैं। लेकिन यदि संक्रमण या सिस्ट की समस्या हो, तो कुछ उपचार विकल्प मौजूद हैं। प्री-एरिकुलर साइनस छिद्र की साफ-सफाई के लिए हल्के साबुन और पानी से छिद्र के आसपास की जगह साफ रखना चाहिए। संक्रमित जगह पर किसी भी तरह के दबाव या चुभन को टालें। घाव होने पर डॉक्टर एंटीबायोटिक क्रीम या दवा दे सकते हैं। अक्सर यह संक्रमण कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। वहीं सेल्फ केयर में प्री-एरिकुलर साइनस को खुद से न छेड़ना बेहतर है। संक्रमित स्थिति में सिकाई करनी चाहिये। क्योंकि इससे राहत मिल सकती है, लेकिन केवल डॉक्टर की सलाह के बाद। यदि बार-बार संक्रमण हो रहा है, तो समय पर सर्जरी कराना उचित रहता है। बच्चों और युवाओं में प्री-एरिकुलर साइनस पर निगरानी रखना महत्वपूर्ण है। किसी भी असामान्य बदलाव, जैसे लालिमा, सूजन या दर्द को नजरअंदाज न करें।

प्री-एरिकुलर साइनस एक आम जन्मजात स्थिति है, जिसे अक्सर लोग सामान्य मानते हैं। अधिकतर मामलों में यह हानिरहित होती है और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करती। लेकिन बार-बार संक्रमण, दर्द या सिस्ट की स्थिति में उचित चिकित्सा की व्यवस्था करना अत्यंत आवश्यक है। सही समय पर इलाज और सफाई से प्री-एरिकुलर साइनस से जुड़ी जटिलताओं से बचा जा सकता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति का समाधान उपलब्ध है, और सावधानीपूर्वक देखभाल से प्रभावित व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकता है। इसलिए यदि आपके या आपके किसी परिचित के कान के पास छोटा छेद है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि समझदारी भरी निगरानी और उचित इलाज इसे समस्या बनने से रोक सकता है।

ईएनटी विशेषज्ञ की राय

‘प्री ऑरिकुलर साइनस कान के सामने दिखाई देने वाला एक छोटा जन्मजात छिद्र या गड्ढा होता है। जो आमतौर पर हानिरहित होता है। साथ ही कुछ मामलों में दोनों कानों में भी हो सकता है। यह बाह्य कान के भ्रूणीय विकास के दौरान होने वाली संरचनात्मक कमी के कारण बनता है। कई लोगों में यह बिना किसी परेशानी के जीवनभर बना रह सकता है, इसलिए यदि इसमें संक्रमण न हो तो घबराने की आवश्यकता नहीं होती।लेकिन यदि इसमें संक्रमण हो जाए तो सूजन, दर्द, लालिमा, फोड़े जैसी स्थिति या उस छिद्र से स्राव निकलने की समस्या हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई दें तो स्वयं उपचार करने के बजाय ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। बार-बार संक्रमण होने, दर्द या पस बनने की स्थिति में एंटीबायोटिक, ड्रेनेज और आवश्यकता पड़ने पर पूरे साइनस ट्रैक्ट को शल्यक्रिया द्वारा हटाना सबसे प्रभावी उपचार माना जाता है। समय पर जांच और सही उपचार से इस समस्या को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।’ –डॉ. पल्लवी नायक

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