अनुलोम-विलोम से विचारों में स्पष्टता
सोच में स्पष्टता लाने के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम बहुत कारगर है। असल में मानसिक धुंध इड़ा व पिंगला नाड़ी में असंतुलन की वजह से पैदा होती है। अनुलोम-विलोम का अभ्यास मस्तिष्क के इन दोनों हिस्सों को संतुलित करता है। सर्दियों...
सोच में स्पष्टता लाने के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम बहुत कारगर है। असल में मानसिक धुंध इड़ा व पिंगला नाड़ी में असंतुलन की वजह से पैदा होती है। अनुलोम-विलोम का अभ्यास मस्तिष्क के इन दोनों हिस्सों को संतुलित करता है।
सर्दियों में शरीर को गर्म करने, फेफड़ों को सक्रिय रखने और मन में स्पष्टता लाने के लिए प्राणायाम बहुत कारगर है। इससे मानसिक स्पष्टता बढ़ती है, उलझन नहीं रहती और ध्यान भटकता नहीं है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम, मानसिक धुंध को दूर करने का सरल और वैज्ञानिक रूप से प्रभावी उपाय है। बता दें कि अनुलोम-विलोम नासिका-श्वास का अभ्यास है। इसमें बारी-बारी से दाएं और बाएं नथुने से श्वास-प्रश्वास की प्रक्रिया दोहरायी जाती है। योगशास्त्र के अनुसार बाएं नथुने से इड़ा नाड़ी (शांत, शीतल, मानसिक) और दाएं से पिंगला नाड़ी (ऊर्जावान, उष्ण, क्रियाशील) सक्रिय होती है। दरअसल मानसिक धुंध पैदा ही तब होती है, जब इन दोनों नाड़ियों में असंतुलन आ जाता है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम- मस्तिष्क के इन दोनों हिस्सों को संतुलित करता है। इस प्राणायाम से शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होती है। स्ट्रेस हार्मोन यानी कॉर्टिसोल कम बनते हैं। पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है।
जरूरी है सही तरीका
अनुलोम-विलोम करने से पहले की तैयारी बहुत जरूरी है,तभी सही तरीके से इसे किया जा सकता है। इसके लिए समय, स्थान और आसन जैसी छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। इसे सुबह खाली पेट करना चाहिए। लेकिन अगर सुबह समय न मिले, तो शाम को तब करें जब दोपहर का भोजन खाए हुए कम से कम 4 घंटे हो चुके हों। यह प्राणायाम करने के लिए जगह शांत, हवादार लेकिन ठंडी हवा से मुक्त हो। सर्दी का प्रकोप हो, तब खुले में प्राणायाम न करें। इसे पद्मासन या सुखासन की स्थिति में करें। रीढ़ सीधी और कंधे ढीले हों।
करने की सही विधि
वास्तव में यह वही हिस्सा है, जहां अधिकतर लोग गलती करते हैं। इसलिए इसे ध्यान से पढ़ें। चरण-1 : दाएं हाथ की तर्जनी और मध्य उंगली मोड़ लें। अंगूठे से दाएं नथुने को बंद करें। चरण-2 : बाएं नथुने से धीरे-धीरे गहरी श्वास लें इसके लिए एक से चार तक की गिनती गिने। चरण-3 : अब दोनों नथुने बंद करके 2 सेकंड रोकें। हालांकि अगर शुरुआत में तो रोकना जरूरी नहीं है। चरण-4 : दाएं नथुने से धीरे श्वास छोड़ें और इस दौरान एक से 6 तक गिनती गिनें। चरण-5 : अब दाएं नथुने से श्वास लें और इस दौरान एक से चार तक गिनती गिने, फिर 2 सेकंड के लिए श्वास रोकें और इसके बाद बाएं से श्वास छोड़ें, इस दौरान एक से 6 तक गिनती गिने। इस तरह यह एक पूरा चक्र हुआ।
विशेष अनुपात
अगर मानसिक जकड़ है यानी मानसिक धुंध बनी हुई तो इसे हटाने के लिए विशेष अनुपात में इसे करना जरूरी होता है। सिर्फ सांस लेने से बात नहीं बनती। इसके लिए एक विशेष अनुपात मायने रखता है। इसके लिए श्वास (पूरक) चार बार जरूरी है। (कुंभक) दो बार और रेचक यानी श्वास छोड़ने की प्रक्रिया छह बार दोहराएं। जैसे-जैसे अभ्यास बढ़े, इस अनुपात 6-3-9 तक ले जाएं। वास्तव में लंबा श्वास, त्याग मस्तिष्क को गहरी शांति और स्पष्टता देता है। शुरुआत में अनुलोम’विलोम पांच मिनट तक करें। फिर अभ्यस्त हो जाएं तो समय 10 मिनट तक बढ़ा दें। मानसिक धुंध यानी चीजों को लेकर अस्पष्टता घनी हो, तो इस प्रक्रिया को 12 से 15 मिनट तक दोहराएं।
ध्यान लगाएं
अपने श्वास के प्रवाह पर ध्यान दें और नासिका में ठंडी व गरम हवा का अहसास करें। हर श्वास छोड़ते हुए अपने मन में दोहराएं कि मैं मानसिक रूप से स्पष्ट हो रहा हूं, मेरी मानसिक जकड़न दूर हो रही है। इस दौरान बहुत तेज़ तेज़ सांस न लें। जबरन भी सांस न रोकें। मोबाइल देखकर अभ्यास न करें व गर्दन झुकाकर न बैठें।
अगर सही तरीके से किया जाए तो अनुलोम-विलोम शुरू करने के तीसरे दिन मन हल्का हो जाता है। पांचवें दिन सोच में स्पष्टता आ जाती है, सातवें दिन तक ध्यान और स्मृति बेहतर हो जाती है। इस तरह एक सप्ताह में इसका असर साफ तौरपर देखने को मिल जाता है। -इ.रि.सें.

