खुशमिजाजी की मिठास देते हैं खट्टे फल
अगर आप मानसिक तनाव और डिप्रेशन से बचना चाहते हैं तो डाइट में खट्टे फलों को रोज शामिल करें। जानकारों के मुताबिक, ये फल आंतों और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। एक अध्ययन से पता चला कि जो...
अगर आप मानसिक तनाव और डिप्रेशन से बचना चाहते हैं तो डाइट में खट्टे फलों को रोज शामिल करें। जानकारों के मुताबिक, ये फल आंतों और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। एक अध्ययन से पता चला कि जो महिलाएं नियमित खट्टे फल खाती हैं, उनमें अवसाद की संभावना 20 प्रतिशत कम हो जाती है। खट्टे फलों में संतरा प्रभावकारी है।
क्या आपको पता है कि रोजाना एक संतरा खाने से डिप्रेशन का खतरा 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है। संतरा ही नहीं, प्रकृति प्रदत्त बहुत से ऐसे खट्टे फल हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। ये खट्टे फल स्वाद में तो बेमिसाल होते ही हैं, ये हमारे लिए मूड बूस्टर भी होते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर आप मानसिक तनाव और डिप्रेशन से बचना चाहते हैं तो अपनी डाइट में खट्टे फलों को रोज शामिल करें। खट्टे फलों में संतरा, नींबू, मौसमी, अमरूद, किन्नू, जैसे फल होते हैं। ये खट्टे फल हमारी आंतों और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं। इसके अलावा बाजार में बिकने वाले प्रोसेस्ड और पैकेज्ड जूस सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं।
हार्वर्ड की स्टडी
साल 2024 में माइक्रोबायोम पत्रिका में प्रकाशित एक रिसर्च में जिसमें 30 हजार से ज्यादा महिलाओं के डेटा का विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन से पता चला कि जो महिलाएं नियमित रूप से खट्टे फल खाती हैं, उनमें अवसाद होने की संभावना 20 प्रतिशत कम हो जाती है। शोधकर्ताओं ने खट्टे फलों में संतरे को सबसे ज्यादा प्रभावकारी बताया है। रोजाना एक मध्यम आकार का संतरा खाने से हममें डिप्रेशन विकसित होने का खतरा कम हो जाता है। यह आंतों की सूजन कम करता है और सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हार्मोन्स को ब्रेन तक पहुंचाने में मदद करता है। गौरतलब है कि हमारे शरीर का लगभग 90 प्रतिशत सेरोटोनिन और 50 प्रतिशत से ज्यादा डोपामाइन हार्मोन जो हमें गुडफील कराते हैं और ये ऐसे न्यूरोट्रांसमीटर है जो हमारी आंत में बनते हैं। जब हमारी आंत स्वस्थ होती है तो हमारा मूड भी अच्छा रहता है और इससे हमारा मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है।
कोर्टिसोल में कमी
शोध बताते हैं कि संतरा और खट्टे फल हमारी आंतों में स्वस्थ बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं। इनमें मौजूद विटामिन ‘सी’ की ज्यादा मात्रा हमारे शरीर में स्ट्रैस हार्मोन यानी कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में मदद करती है, जो चिंता और तनाव से राहत दिलाते हैं। खट्टे फलों की ताजा सुगंध हमारे मूड को बेहतर बनाती है, इसमें मौजूद पोटाशियम, साइट्रिन थकान को कम करते हैं और ऊर्जा प्रदान करते हैं। ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और इनमें पानी की ज्यादा मात्रा होने के कारण ये इलेक्ट्रोलाइट हैं। संतरे और अन्य खट्टे फल कसरत के बाद शरीर को तरोताजा रखते हैं।
यह न केवल हमारे लिए संतुलित आहार का एक हिस्सा हैं। इसकी पौष्टिकता वजन और भूख दोनों को नियंत्रित रखती हैं। क्योंकि खट्टे फलों में कैलोरी कम, पानी ज्यादा होता है, इन्हें खाने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती। इनमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा चूंकि धीरे-धीरे रक्त में प्रवेश करती है, इसलिए अचानक रक्त में शर्करा का स्तर न तो बढ़ता है और न ही गिरता है। जीआई स्कोर कम होता है, इसलिए यह डायबिटीज रोगियों के लिए भी फायदेमंद हैं।
खुराक में ऐसे करें शामिल
* खट्टे फल स्वादिष्ट, पोषण से भरपूर और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं, इसलिए इन्हें ज्यादा से ज्यादा हम अपने भोजन में कैसे शामिल कर सकते हैं :
* खट्टे फलों को जूस की बजाय अगर पूरा फल खाएं तो हमें इसका अधिकतम लाभ मिलता है। इन फलों का रस पीना इन्हें फाइबर से रहित करना होता है। क्योंकि फल खाने से आपको जितने फाइबर और पोषक तत्व मिलते हैं, उतने गूदे वाले ताजे जूस में भी नहीं होते।
* जब भी सलाद खाएं तो उसमें नींबू के टुकड़े जरूर शामिल करें और उन नींबू के टुकड़ों को सलाद में निचोड़कर या अपने पीने वाले पानी में निचोड़कर ले सकते हैं। यदि आप बेक किये गये खाद्य पदार्थों में पौष्टिकता एड करना चाहते हैं तो उनमें फल, उनका रस या उनके छिलके की स्मूदी बनाकर इस्तेमाल में ला सकते हैं। फलों को सुखाकर उनका इस्तेमाल चाय में भी कर सकते हैं।
* खट्टे फलों को स्मूदी में मिलाकर या उन्हें हरी सब्जियों के साथ इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
* ताजे निचोड़े हुए खट्टे फलों के रस और उनके छिलकों का इस्तेमाल ड्रेसिंग और सॉस के रूप में भी कर सकते हैं।
सावधानी
जिन लोगों को खट्टे फलों से एलर्जी होती है, उनके होंठ और मसूडों में सूजन आ सकती है। मुंह या गले में सुन्नपन महसूस हो सकता है। इसलिए स्किन टेस्ट से पता चलता है कि आपका खट्टे फलों से एलर्जिक हैं। वहीं कुछ लोगों को नींबू के छिलकों में पाये जाने वाले लिमोनिन नामक रसायन से भी एलर्जी हो सकती है। इसलिए नींबू से एलर्जिक होने पर इसको न खाएं।
बहरहाल खट्टे फल न सिर्फ स्वादिष्ट व देखने में सुंदर होते हैं बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनकी खुशबू सेवन करने के लिए प्रेरित करती है। -इ.रि.सें.

