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रियल और रील में डाकुओं के किरदार

भारतीय डकैतों की दुनिया अलग ही है, जिन्होंने पहले रियल में और फिर रील में अपने झंडे गाड़े। अभी तक का इतिहास देखें तो सर्वाधिक चर्चित फिल्मी डकैत गब्बर सिंह हुआ है। इसके नाम पर बनी फिल्म ‘शोले’ आल...

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भारतीय डकैतों की दुनिया अलग ही है, जिन्होंने पहले रियल में और फिर रील में अपने झंडे गाड़े। अभी तक का इतिहास देखें तो सर्वाधिक चर्चित फिल्मी डकैत गब्बर सिंह हुआ है। इसके नाम पर बनी फिल्म ‘शोले’ आल टाइम हिट है। गब्बर के अतिरिक्त फूलन देवी, छविराम भी किंवदंती बने। डाकुओं का खौफ था और उन्हें मसीहा भी माना जाता था।

रियल में जब डकैत हमारे बीच में होते हैं, तो उनके आतंक से बचने के लिए सौ जतन किए जाते हैं और जब वही रील में आते हैं तो हमें सर-आंखों पर बिठा लेते हैं। कम से कम डकैतों पर बनी फिल्मों से तो यही सिद्ध होता है। खास बात यह है कि एक हालिया फिल्म में रहमान डकैत की तारीफ ने इस समय बॉलीवुड और राजनैतिक गलियारों में एक खासा माहौल बना रखा है। लेकिन हम इतिहास के उन डकैतों को भूल रहे हैं, जिन्होंने अपने नाम से जनसामान्य की रूह को कंपा दिया था, लेकिन उन्हें गरीबों का मसीहा भी कहा जाता था।

रियल और रील में छाये डकैत

भारतीय डकैतों के इतिहास में खासकर उन डकैतों की दुनिया अलग ही है, जिन्होंने पहले रियल में और फिर रील में अपने झंडे गाड़े। अभी तक का इतिहास देखें तो सर्वाधिक चर्चित फिल्मी डकैत गब्बर सिंह हुआ है। इसके नाम पर बनी फिल्म ‘शोले’ न सिर्फ आल टाइम हिट है बल्कि आज भी गब्बर द्वारा बोले गए डायलॉग आम बोलचाल की भाषा में बच्चे-बच्चे की जुबान पर हैं। गब्बर के अतिरिक्त फूलन देवी तथा पुतलीबाई ऐसी डाकू अर्थात डाकू हसीना हुई हैं, जिनके नाम से शरीर में कंपकंपी आने के साथ ही एक रोमांच भी आ जाता है। फिल्म ‘धुरंधर’ गुजरते वर्ष 2025 की ऐसी मूवी रही है जिसने बॉलीवुड को ठंडक में एक गर्माहट दी है। इसमें लंबे समय बाद तीन स्टार्स ने एक साथ काम किया है। इससे पहले डकैतों पर बनी फिल्मों में भी मल्टीस्टार कास्ट सामने आती रही है। बॉलीवुड में ऐसी फिल्मों की लंबी फेहरिस्त है, जिसमें डकैतों को दो ही रूपों में दिखाया गया है। पहला उनका महिमा मंडन और दूसरा उनके काले कारनामों के कारण उनकी बुराइयों पर फोकस।

डकैतों की दुनिया दिखाती प्रमुख फिल्में

जिन फिल्मों ने डकैतों की दुनिया को जनता को हर रूप में दिखाया है, उनमें खास हैं- ‘शोले’, मेरा गांव मेरा देश, बैंडिट क्वीन, पान सिंह तोमर, सोन चिड़िया, मुझे जीने दो, डकैत, गंगा जमुना, पुतलीबाई, चंबल की कसम, चाइना गेट, बिंदिया और बंदूक, जिस देश में गंगा बहती है,लोहा आदि। सौ से अधिक फिल्में डकैतों के जीवन पर बनी होंगी। कुछ डकैत हकीकत में भी ऐसे हुए हैं, जिनका इतिहास सोचने को मजबूर कर देता है। उत्तर प्रदेश में दस्यु सम्राट और दद्दा के नाम से मशहूर छविराम उन डकैतों में थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री को भी चुनौती दी थी। गब्बर सिंह जिसने शोले को शोले बनाया,उसने सैकड़ों लोगों की उसने न सिर्फ नाक काट दी बल्कि कई को भी मार डाला था।

फूलन देवी और छविराम

फूलन देवी की कहानी तो सर्वविदित है कि वह किस तरह से दस्यु सुंदरी बनी और फिर सांसद तथा किस तरह से उसकी हत्या हुई। पुतलीबाई की कहानी जो भी रही हो पर मूवी बनी तो उसकी कव्वाली लोगों की जुबान पर रही। वहीं फूलन देवी की ललकार चंबल के बीहड़ों में अभी भी गूंजती है। डकैतों में से छविराम की कहानी यह है कि 80 के दशक में छविराम ने उत्तर प्रदेश पुलिस की चैन छीन ली थी। नौ पुलिसकर्मियों की हत्या, सीओ को अगवा किया था। तब उत्तर प्रदेश के तेजतर्रार पुलिस अफसर एके जैन और मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक कर्मवीर सिंह ने एक रणनीति के तहत उसका एनकाउंटर किया।

गबरा सिंह उर्फ गब्बर का आतंक

अब जरा शोले के गब्बर सिंह को भी देखिए। गब्बर सिंह मध्य प्रदेश के भिंड का रहने वाला था। भूमि विवाद में उसके पिता के साथ हुए अन्याय के चलते तब के गबरा सिंह ने इसका बदला दो हत्याएं करके लिया और जा पहुंचा चंबल के बीहड़ों में। बताते हैं कि गबरा सिंह जो बाद में गब्बर सिंह बन गया, उसने अपने एनकाउंटर से बचने के लिए एक तांत्रिक की शरण ली तो उसके कहे अनुसार उसने 116 लोगों की नाक काट दी। वह बाद में गांव वालों की मुखबिरी से ही एनकाउंटर में मारा गया पर उसने इससे पहले मुखबिरी के शक में कई बाल हत्याएं की। इसी तरह मोहर सिंह, माधो सिंह, मलखान सिंह, कुसमा नाइन, लालाराम श्रीराम, जगन गुर्जर, सुल्ताना डाकू, मान सिंह जैसे डकैतों के कारनामे कम नहीं हैं। लेकिन भले ही डकैतों का महिमा मंडन किया जाए पर शायद ही कोई अपने बच्चों को उन जैसा बनने की शिक्षा दे। -इ.रि.सें.

 

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