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धधकती ज्वालाओं में जानमाल की रक्षा करने वाले जांबाज

फायर फाइटर का पेशा

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संदीप जोशी
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फायर फाइटर आग बुझाने के अलावा विभिन्न आपात स्थितियों जैसे सड़क दुर्घटनाओं, मेडिकल इमरजेंसी और बाढ़ से निपटने का काम करते हैं। वे एक ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ होते हैं जो जान-माल की रक्षा करते हैं। इस क्षेत्र में कैरियर बनाने को फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग में डिप्लोमा अथवा बीई तथा फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी में बीएससी करनी चाहिए। इनमें अग्निशामक से लेकर अग्नि इंजीनियर तक के पद शामिल हैं, जिनमें रेलवे, एयरपोर्ट, डिफेंस, बिजली विभाग, ओएनजीसी, रिफाइनरीज प्रमुख नियोक्ता हैं।

फायर फाइटिंग में कैरियर एक चुनौतीपूर्ण लेकिन फायदेमंद क्षेत्र है, जिसमें उच्च शारीरिक फिटनेस, साहस और समस्या-समाधान कौशल की आवश्यकता होती है; इसके लिए आमतौर पर हाई स्कूल डिप्लोमा, अग्नि अकादमी प्रशिक्षण और अक्सर इएमटी/पैरामेडिक योग्यता जरूरी होती है, और कैरियर के पथ में अग्निशामक से लेकर अग्नि इंजीनियर तक के पद शामिल हैं, जिनमें सरकारी विभाग, रिफाइनरी और सशस्त्र बल प्रमुख नियोक्ता हैं।

हाल ही में भारत के बड़े शहरों में ही नहीं, सिंगापुर और हांगकांग जैसे सर्वसुविधायुक्त शहरों के बहुमंजिला भवनों में भयावह आग ने बहुत जनधन की हानि की। एक अनुमान के मुताबिक, आग दुर्घटनाओं के कारण हर साल लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। अलग-अलग राज्यों से प्राप्त आंकड़े और बीमा रिपोर्ट महत्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव के बारे में और अधिक जानकारी प्रदान करते हैं। मसलन, भारत की प्रमुख बीमा कंपनियों की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 45 प्रतिशत दावे आग से होने वाले नुकसान से संबंधित हैं। तेलंगाना राज्य में ही 2025 में आग लगने की 8,159 घटनाओं में रिकॉर्ड 865.7 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान दर्ज किया गया। एक वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, भारत में 2024-2025 में 44 अरब डॉलर मूल्य के घर और बुनियादी ढांचा जंगल की आग की चपेट में आने वाले थे, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक जोखिम मूल्य है।

फायर फाइटर के कार्य

फायर फाइटर आग बुझाने के अलावा लोगों और जानवरों को बचाने, और विभिन्न आपात स्थितियों जैसे सड़क दुर्घटनाओं, मेडिकल इमरजेंसी, खतरनाक पदार्थों के रिसाव, और बाढ़ से निपटने का काम करते हैं। उनके काम में अग्नि सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने और रोकथाम के उपाय करने में भी मदद करना भी शामिल है। वे आग बुझाने के साथ-साथ बचाव कार्य, प्राथमिक उपचार और उपकरणों के रखरखाव जैसे कई काम करते हैं, जिसके लिए उन्हें शारीरिक रूप से फिट और प्रशिक्षित होना ज़रूरी है।

वैसे देखा जाए तो आग बुझाने से कहीं ज़्यादा, वे एक ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ होते हैं जो जान-माल की रक्षा करते हैं और हर तरह की मुश्किल परिस्थितियों से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। वे टीम के साथ काम करते हैं, अक्सर शिफ्ट में, जिसमें स्टेशन पर रहना, प्रशिक्षण लेना और आपातकालीन कॉल का इंतजार करना शामिल होता है।

ऐसे बनाएं फायर फाइटिंग में कैरियर

फायर सेफ्टी के अंडर ग्रेजुएट कोर्स करने के लिए स्टूडेंट्स ने 12वीं कक्षा विज्ञान विषयों के साथ (न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक) उत्तीर्ण की हो। फायर टेक्नोलॉजी और सेफ्टी इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए आपको जेईई मेन एवं जेईई एडवांस परीक्षा में भाग लेना होता है जिससे देश के टॉप कॉलेजों/संस्थानों में प्रवेश मिल सके। कई कॉलेज अन्य माध्यमों से भी फायर फाइटिंग कोर्सेज में प्रवेश देते हैं।

जो युवा डिप्लोमा इस क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहते हैं उन्हें फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग में एक साल का डिप्लोमा अथवा चार साल की स्नातक डिग्री जिसमें फायर में बीई तथा फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी में बीएससी की डिग्री प्राप्त करनी चाहिए। इस क्षेत्र में बेहतर कैरियर बनाने के लिए अग्निशमन अकादमी प्रशिक्षण, इएमटी या पैरामेडिक प्रशिक्षण अक्सर आवश्यक होता है। देश में अग्निशमन का अध्ययन करने के लिए, राज्य द्वारा संचालित अग्निशमन सेवा प्रशिक्षण केंद्रों, विमानन पर केंद्रित एएआई अग्निशमन प्रशिक्षण संस्थान (कोलकाता/दिल्ली)जैसे विशेष संस्थानों, या सामान्य अग्नि एवं सुरक्षा डिप्लोमा के लिए राष्ट्रीय अग्नि एवं सुरक्षा इंजीनियरिंग अकादमी (एनएएफएस) जैसी निजी अकादमियों में दाखिला ले सकते हैं। इन सस्थानों में 10+2 के बाद बुनियादी, उन्नत या एआरएफएफ (विमान बचाव एवं अग्निशमन) प्रशिक्षण के विकल्प उपलब्ध हैं, जो नागरिक, रक्षा या विमानन अग्निशमन में कैरियर की ओर ले जाते हैं। इसके लिए नेशनल एप्टिट्यूड टेस्ट भी आयोजित किए जाते हैं।

आवश्यक कौशल

फायर फाइटिंग एक उच्च कौशल से जुड़ा प्रोफेशन है जिसमें केवल शिक्षा और प्रशिक्षण ही जरूरी नहीं हैं। इस क्षेत्र में कैरियर बनाने वालों के पास कुछ आवश्यक कौशल तथा योग्यता का होना भी जरूरी है। उनमें बेहतरीन शारीरिक फिटनेस, सहनशक्ति और ताकत के साथ मानसिक दबाव में शांत रहने, त्वरित निर्णय लेने जैसे गुणों के साथ सहानुभूति और टीम वर्क के अलावा तकनीकी, प्राथमिक चिकित्सा, सीपीआर और अग्नि शमन उपकरण का ज्ञान होना एडिशनल क्वालिफिकेशन माना जाता है।

यहां प्राप्त करें प्रशिक्षण

फायर फाइटिंग के लिए देश के सभी राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के अंतर्गत निचले स्तर के अधिकारियों के लिए 14 केंद्र हैं जहां इसका प्रशिक्षण दिया जाता है। राज्यों के प्रशिक्षकों के साथ-साथ एडवांस्ड कोर्स के लिए राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा महाविद्यालय (एनसीडीसी), नागपुर में प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध है। भारतीय वायुसेना में लड़ाकू पायलट बनने की इच्छा रखने वालों के लिए वायु सेना अकादमी, दुंडीगल और फाइटर ट्रेनिंग विंग, हकीमपेट जैसे विशेष विंग के माध्यम से फायर फाइटिंग प्रशिक्षण दिया जाता है। एएआई फायर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एफएसटीसी), कोलकाता और दिल्ली (एफटीसी) बेसिक और एडवांस्ड फायर फाइटिंग (बीएफएफसी/एएफएफ) और एआरएफएफ के लिए, विशेष रूप से हवाई अड्डे की आपात स्थितियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए तैयार किए गए हैं। हवाई अड्डों पर आग बुझाने के लिए राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय (आरजीएनएयू) बेसिक फायर फाइटर्स कोर्स (बीएफएफसी) प्रदान करता है। सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के साथ-साथ निजी संस्थानों में भी फायर फाइटिंग का प्रशिक्षण उपलब्ध है। नेशनल एकेडमी ऑफ फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग (एनएएफएस), नागपुर फायर फाइटर प्रशिक्षण में डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रदान करता है। ग्रीन वर्ल्ड ग्रुप चेन्नई, मुंबई, दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों में सुरक्षा और अग्निशमन संबंधी पाठ्यक्रम प्रदान करता है। इंस्टीट्यूशन ऑफ फायर इंजीनियर्स (आईएफई), इंडिया विभिन्न फायर इंजीनियरिंग प्रमाणपत्र प्रदान करने वाला प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट है।

कैरियर के अनेक अवसर

फायर फाइटिंग के क्षेत्र में कोर्स करने से युवाओं लिए रोजगार के अनेक मौके उपलब्ध हैं। कोर्स करने के पश्चात फायर फाइटर को सरकारी एवं प्राइवेट दोनों ही क्षेत्रों में नौकरी मिल सकती है। फायर फाइटर की नियुक्ति रेलवे, एयरपोर्ट, डिफेंस, बिजली विभाग, ओएनजीसी, रिफाइनरीज एवं पेट्रोकेमिकल से जुड़ी कंपनियों में की जाती है। इसके अलावा अब हर सरकारी विभाग में भी एक फायर फाइटर की नियुक्ति की जाती है जिसके चलते रोजगार के अवसरों में बढ़त देखने को मिल रही है। इस क्षेत्र में आरम्भिक नियुक्ति फायर फाइटर, फायरमैन के रूप में होती है। कुछ अनुभव के बाद क्रू मैनेजर, वॉच मैनेजर, स्टेशन मैनेजर, ग्रुप मैनेजर के पद से होते हुए ब्रिगेड मैनेजर, मुख्य अग्निशमन,फायर इंजीनियर के रूप में तरक्की होती है। सरकारी फायर ब्रिगेड, बिजली बोर्ड, बिजली बोर्ड, तेल और गैस कंपनियों, रासायनिक संयंत्रों, रिफाइनरी के साथ-साथ भारतीय नौसेना तथा वायु सेना के साथ-साथ निजी कंपनियों और मॉल्स में फायर सेफ्टी आफिसर का पद हासिल किया जा सकता है।

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