अच्छे स्वास्थ्य के लिए सेहतमंद शरीर के साथ स्वस्थ मस्तिष्क का भी होना जरूरी है। यानी अच्छी याद्दाश्त, सोचने-समझने व निर्णय लेने की क्षमता। डिमेंशिया आदि मानसिक स्थितियों के जोखिम टालने के लिए एकाग्रता के अलावा संतुलित भोजन, व्यायाम करना और सक्रिय रहना जरूरी है।
मनोविज्ञानियों का कहना है कि स्ट्रेस और एंग्जाइटी के कारण लोगों में मानसिक तनाव बढ़ता ही जा रहा है। वहीं मेमोरी लॉस यानी डिमेंशिया के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में ब्रेन पावर को स्टेबल रखना और साथ ही इंप्रूव करने के लिए कुछ उपाय करते रहें तो फायदेमंद रहेगा।
एकाग्रता से काम करें
डिमेंशिया का जोखिम लगातार बढ़ रहा है। अच्छी जीवनशैली, संतुलित भोजन और मानसिक एवं शारीरिक रूप से सक्रिय रहकर इस बीमारी से काफी हद तक सुरक्षित रहा जा सकता है। हाल ही अमेरिका के नॉर्थ वेस्टर्न फेनबर्ग स्कूल आफ मेडिसिन ने अपने अध्ययन में पाया कि जो लोग मन लगाकर काम करते हैं उनमें डिमेंशिया का जोखिम काफी कम होता है। संस्थान की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एलीन ग्राहम के अनुसार, व्यक्तित्व से जुड़े ये गुण न केवल हमारे सोचने और सूचनाओं को ग्रहण करने की क्षमता के बारे में बताते हैं बल्कि डिमेंशिया से जुड़े मस्तिष्क के हिस्से में होने वाले बदलाव के बारे में भी जानकारी देते हैं। काम के प्रति सचेत और ईमानदार लोग सेहत को लेकर भी सतर्क रहते हैं और इनका दिमाग सदैव क्रियाशील रहता है।
वर्कआउट है जरूरी
दिमाग की कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए रेगुलर वर्कआउट की अहम भूमिका है। यह मस्तिष्क का आकार भी बढ़ाता है। फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी में बायो मेडिकल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वैन प्राग के अनुसार फिजिकल एक्टिविटी बड़ी संख्या में सेल्यूलर बदलाव करके मूड और सामंजस्य बैठाने की क्षमता को बेहतर करती है। जब हम एक्सरसाइज करते हैं तो मांसपेशियां कुछ मॉलिक्यूल्स रिलीज करती हैं जो रक्त से होते हुए मस्तिष्क तक पहुंचते हैं। इनमें से आइरिस नामक हार्मोन में नर्वस सिस्टम को सुरक्षा प्रदान करने जैसे गुण होते हैं। साथ ही उनसे मस्तिष्क की सामंजस्य बैठने की क्षमता को भी फायदा पहुंचता है। एक्सरसाइज नई रक्तवाहिकाओं के विकास को प्रोत्साहित करती है। एक्सरसाइज से ब्रेन डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर भी रिलीज होता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को रिकवर करने में मदद करता है।
ब्रेन रोट से बचें
ब्रेन रोट यानी डिजिटल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से सोचने-समझने की क्षमता में कमी आती है। जब हम जरूरत से ज्यादा ऑनलाइन रहते हैं और सोशल मीडिया पर अपना ज्यादा वक्त बिताते हैं तो उसे ही असली दुनिया समझने लगते हैं। बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल में डिजिटल वैलनेस लैब के प्रमुख डॉ. माइकल रिच के अनुसार. इंटरनेट कंटेंट मस्तिष्क में इस कदर घुसपैठ कर सकता है कि लोगों का इस बात पर भी नियंत्रण नहीं रह जाता कि वे क्या कह रहे हैं। इसके लिए डिजिटल वर्ड से समय-समय पर ब्रेक लें। नकारात्मकता फैलाने वाले यूजर्स और सोर्सेज को अनफॉलो करें। अंधाधुंध स्क्रोलिंग से बचें। नए विचारों को खोलने वाले प्रेरक व आध्यात्मिक कंटेंट में रुचि लें।
चुनौतीपूर्ण काम करें
मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए उसे एक्टिव रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए चैलेंजिंग और क्रिएटिव एक्टिविटीज में इन्वॉल्व रहना चाहिये। जैसे पजल सॉल्व करना, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाना, किताबें पढ़ना और नई-नई स्किल सीखना। इनसे मस्तिष्क का वर्कआउट होता है और मस्तिष्क लचीला रहता है।
मस्तिष्क के लिए लाभकारी खाद्य पदार्थ
कई ऐसे फूड होते हैं जो ब्रेन को काफी फायदा पहुंचाते हैं। हमारा ब्रेन 60 फीसदी फैट से बना होता है। इसलिए इसके लिए हेल्दी फैट लेनी चाहिए। ओमेगा 3 फैटी एसिड तो विशेष रूप से लाभप्रद है जो अखरोट, अलसी, चिया सीड, एवोकाडो और ओलिव ऑयल में मिल जाता है। इससे ब्रेन सेल्स की मेंब्रेन बनती है। साथ ही इन फूड्स में सूजन रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। इनके साथ-साथ प्रोटीन का भी नियमित सेवन करना जरूरी है जो ब्रेन टिशूज को रिपेयर और मेंटेन करता है। इसलिए दही , मसूर दाल, पनीर, चना, टोफू ,बादाम व पिस्ता आदि का नियमित सेवन करें।

