ठिठुरन में सजगता से टालें हृदय रोग के जोखिम
जिन दिनों में ठंड चरम पर हो उस दौरान कई तरह की सावधानियां जरूरी हैं। ठिठुरन का असर जुकाम-खांसी तक ही सीमित नहीं बल्कि यह अचानक दिल की सेहत भी खराब कर सकती है। खासकर दिसंबर मध्य से लेकर...
जिन दिनों में ठंड चरम पर हो उस दौरान कई तरह की सावधानियां जरूरी हैं। ठिठुरन का असर जुकाम-खांसी तक ही सीमित नहीं बल्कि यह अचानक दिल की सेहत भी खराब कर सकती है। खासकर दिसंबर मध्य से लेकर फरवरी के बीच हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी आपात स्थितियों के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। बुजुर्गों के अलावा जिन्हें बीपी व शूगर आदि की समस्या है उन्हें जोखिम ज्यादा रहता है।
जनवरी की ठंड में आमतौर लोग बस कंपकंपी, सर्दी-खांसी और गर्म कपड़ों का ध्यान रखने तक ही सीमित रहते हैं। लेकिन यही ठिठुरन चुपचाप दिल पर भारी पड़ सकती है, यह हममें से ज्यादातर लोग नहीं जानते। दरअसल सर्दियों में खासकर दिसंबर मध्य से लेकर फरवरी के बीच हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी आपातस्थितियों के मामले भारत में सबसे ज्यादा दर्ज होते हैं। लेकिन विंडबना यह है कि ज्यादातर लोग ठंड को मौसम का मामूली असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि हकीकत यह है कि ठंड शरीर के भीतर ऐसी कई प्रतिक्रियाएं शुरू कर देती हैं, जो हृदय के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
ठंड का दिल से सीधा रिश्ता
ठंड लगते ही शरीर अपनी गर्मी बचाने के लिए रक्त नलिकाओं को सिकोड़ने लगता है, इससे अचानक रक्तचाप बढ़ जाता है। दिल को उसी मात्रा में खून पंप करने के लिए तब ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। जिन लोगों को पहले से ही हाई ब्लडप्रेशर, शुगर या दिल की बीमारी हो, उन्हें ठंड के मौसम में कोई भी खतरा मोल नहीं लेना चाहिए। क्योंकि जरा सी लापरवाही इस मौसम में ऐसे लोगों के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है। कई मामलों में दिल की धमनियों में पहले से ही जमी चर्बी ठंड के कारण सिकुड़न और दबाव से टूट सकती है, जिससे अचानक हार्ट अटैक का खतरा पैदा हो जाता है।
सुबह का समय जोखिमभरा
जनवरी के महीने में खास तौरपर दिल के दौरे सबसे ज्यादा आते हैं और ये ज्यादातर दौरे सुबह के समय ही दर्ज होते हैं। इसके कुछ प्रमुख कारण हैं कम तापमान, नींद से अचानक उठना और ठंडे फर्श में पैर रखना तथा वैसी ही स्थिति में शारीरिक गतिविधियां शुरू कर देना। जनवरी का महीना खास तौरपर उन लोगों के लिए बेहद खतरनाक होता है, जो सुबह 5-6 बजे जागते हैं और मॉर्निंग वॉक के लिए चल पड़ते हैं। ऐसे लोगों को पता नहीं होता कि वे अनजाने में कितना बड़ा जोखिम मोल ले रहे हैं। दरअसल ठंड में शरीर की धमनियां पहले से ही संकुचित होती हैं और अचानक तेज चलना या कसरत करना दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इसलिए भीषण सर्दियों के दिनों में सुबह की सैर टाल देनी चाहिए या फिर ऐसी जगह पर करनी चाहिए जो जगह चारों तरफ से बंद हो।
बुजुर्गों और अकेले व्यक्तियों को खतरा
ठंड का असर उम्र के साथ और गहरा होता जाता है। बुजुर्गों में शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। कई बार उन्हें ठंड का अहसास देर से होता है। इसलिए अकेले रहने वाले बुजुर्ग व्यक्तियों के लिए ठंड की ठिठुरन बहुत खतनाक होती है, उन्हें ठंड लग जाती है। लेकिन इस उम्र के लोग उसे पहचान नहीं पाते। सीने में दबाव महसूस करना, सांस का रह-रहकर फूलना, असहज बेचैनी होना, इसे ठंड की वजह मानकर नहीं चलना चाहिए। ऐसी मान्यता संभलने में देर कर सकती है और यह देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
ब्लड सर्कुलेशन की समस्या
ठंड में लोग क्योंकि कम पानी पीते हैं, इस कारण खून गाढ़ा हो जाता है। गाढ़े खून में थक्का बनने की आशंका बढ़ जाती है। यही थक्का या ब्लड क्लॉट वास्तव में हमारे दिल या दिमाग की किसी नली में अगर फंस जाता है, तो हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो सकता है। इसके अलावा ठंड में प्रदूषण और कोहरे का असर सांस की नलियों पर पड़ता है, जिससे ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है और उसका सीधा दबाव दिल पर पड़ता है। इसलिए सर्दियों में हार्ट अटैक बाकी सभी मौसमों के मुकाबले ज्यादा होते हैं। यही नहीं सर्दियों में हार्ट अटैक कई बार बड़े छुपे किस्म के होते हैं यानी पता ही नहीं चलता कि ये हार्ट अटैक के लक्षण हैं या किसी और चीज के।
बहरहाल इस मौसम में अगर सीने में तेज दर्द की बजाय भारीपन महसूस हो, जलन होने लगे, सांस लेने में परेशानी हो और बाएं हाथ या जबड़े में अचानक दर्द महसूस हो तथा पसीना आ जाए तो यह नहीं मानें कि यह ठंड का असर है बल्कि तुरंत मानना चाहिए कि हार्ट अटैक के लक्षण हैं और तुरंत डॉक्टरी सहायता लेनी चाहिए।
दिल की सुरक्षा के उपाय
मॉर्निंग वॉक से बचें
जहां तक संभव हो तो सुबह के वक्त वॉकिंग करने यानी टहलने से बचें। अगर सैर के लिए पार्क आदि में जाएं तो तब ही जाएं जब धूप निकल आए।
गर्म कपड़े मददगार
जब सर्दी का मौसम पीक पर हो तो उस दौरान गर्म कपड़े ठीक से पहनें। बाहर निकलते वक्त तो कपड़ों का खास ख्याल रखें। खासकर छाती और कानों को लगातार ढके रहें।
हाइड्रेटेड रहें
जब सर्दियां ज्यादा हों और प्यास बिल्कुल न लग रही हो, तब भी पानी पीते रहें। भले बहुत कम पीएं, लेकिन रह-रहकर पानी पीएं।यानी हाइड्रेटेड रहें।
हल्की-फुल्की एक्सरसाइज
ज्यादा सर्दियों में ज्यादा भारी एक्सरसाइज कभी न करें, बस हल्के से वार्मअप कर लें। वहीं अपने बीपी और शुगर की नियमित जांच करें।
...तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें
अगर सीने में दर्द के लक्षण दिखें, चाहे वो जिस तरह के हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। खास तौर पर अकेले रहने वाले बुजुर्गों पर नजर रखें और उनकी रोज खैरियत पूछते रहें।
-इ.रि.सें.

