हल्की ठंड के साथ धूप में जरा सी गर्मी – इसके साथ ही बसंत के मौसम में चारों ओर प्रकृति के मोहक रंग बिखर जाते हैं। मौसमी सब्जियां भी भरपूर होती हैं। इस ऋतु में खानपान में ताजगी व पोषण बेहतर होते हैं। खास बात है कि बसंत में बनने वाले स्वादिष्ट व्यंजन न तो भारी होते हैं, न ही फीके।
बसंत ऋतु केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि जीवन में नई ताजगी, रंग और स्वाद का आगमन भी रहता है। ठंड की विदाई और गर्मी की आहट के बीच यह मौसम शरीर और मन दोनों को हल्का व ऊर्जावान बना देता है। खेतों में सरसों लहलहाती है, बागों में फूल मुस्कुराते हैं और रसोई में मौसमी सब्जियों, हरी पत्तियों और हल्के मसालों की खुशबू फैलने लगती है। यही वह समय है जब खान-पान में संतुलन, ताजगी और पोषण अपने चरम पर होता है।
बसंत में बनने वाले व्यंजन न तो बहुत भारी होते हैं, न ही फीके। इनमें हरी सब्जियों का रस, दालों का पोषण और देसी मसालों की सुगंध शामिल होती है। ये रेसिपी स्वाद के साथ-साथ शरीर को डिटॉक्स करती हैं। इसके साथ ही इम्यूनिटी बढ़ाती हैं और मौसम के अनुरूप ऊर्जा देती हैं। जानिये, बसंत की इस सौम्य ऋतु में जानें पांच ऐसी स्वादिष्ट रेसिपी, जो आपकी रसोई को खुशबू और अपनापन दोनों से भर दे।
हरे चने और पनीर की बसंती रेसिपी
क्या चाहिए- ताजे हरे चने (छिले हुए) 2 कप, पनीर (मध्यम टुकड़ों में कटा) 200 ग्राम, घी 2 बड़े चम्मच, जीरा 1 छोटा चम्मच, अदरक (कद्दूकस) 1 बड़ा चम्मच, हरी मिर्च (बारीक कटी) 2, हल्दी ½ छोटा चम्मच, धनिया पाउडर 1 छोटा चम्मच, नमक, मलाई 2 बड़े चम्मच, हरा धनिया सजाने के लिए।
ऐसे बनाएं : हरे चनों को पहले छीलकर हल्का उबाल लिया जाता है, ताकि उनका कच्चापन खत्म हो जाए और मिठास उभर आए। कड़ाही में घी गरम कर जीरा, अदरक और हरी मिर्च की खुशबू छोड़ी जाती है। फिर बारी आती है हल्के मसाले डालने की। अब उबले हरे चने डालकर धीमी आंच पर भूनें, ताकि वे मसालों को अपने भीतर समेट लें। थोड़ी देर बाद मुलायम पनीर के टुकड़े इसमें मिलाएं। पनीर डालने के बाद सब्जी को ज्यादा चलायें नहीं, बस ढककर धीमी आंच पर रख दें। अंत में ऊपर से हरा धनिया और हल्की सी मलाई डालकर गॉर्निश कर लें। यह बसंती सब्जी थाली की शान बन जाती है।
मलाईदार हरी मटर की सब्जी
क्या चाहिए - हरी मटर 2 कप, प्याज (बारीक कटा) 1 मध्यम, काजू (भीगे हुए) 12–15, दूध या मलाई ½ कप, घी 2 बड़े चम्मच, अदरक 1 छोटा चम्मच, हरी मिर्च 1–2, गरम मसाला ½ छोटा चम्मच, नमक।
ऐसे बनाएं : ताजी हरी मटर को हल्का उबाल लें। ताकि उसका रंग और मिठास सुरक्षित रहे। कड़ाही में तेल या घी डालकर प्याज को हल्का सुनहरा होने तक भून लें। फिर इसमें अदरक और हरी मिर्च मिलाएं। अब इसमें मटर डालकर धीमी आंच पर चलाएं। फिर काजू की चिकनी पेस्ट और दूध या मलाई मिलाई मिलाएं। यह सब्जी तेज आंच नहीं, बल्कि धैर्य मांगती है। धीरे-धीरे पकते हुए इसका रंग हल्का हरा-सफेद हो जाता है और स्वाद रेशमी। यह सब्जी बसंत की दोपहर में रोटी के साथ खाने का आनंद देती है।
मेथी मूंग दाल
क्या चाहिए- धुली मूंग दाल 1 कप, ताजी मेथी (बारीक कटी) 1 कप, घी 1½ चम्मच, लहसुन कटा 6–7 कली, जीरा 1 छोटा चम्मच, हल्दी छोटा चम्मच, नमक।
ऐसे बनाएं: सबसे पहले मूंग दाल को इस तरह पकाएं कि वह पूरी तरह गल जाए, लेकिन पानीदार न हो। दूसरी ओर कड़ाही में घी गरम कर लहसुन और जीरे का तड़का लगाएं। जैसे ही लहसुन हल्का सुनहरा हो, ताजी कटी मेथी उसमें डाल दें। मेथी को ज्यादा नहीं पकाएं। बस इतना कि उसकी कड़वाहट नरम पड़ जाए और खुशबू बनी रहे। अब इसमें पकी दाल मिलाकर धीमी आंच पर कुछ देर पकाएं। यह दाल न भारी है, न फीकी, यानी बिल्कुल बसंत के संतुलन जैसी। इसे खाने के बाद पेट हल्का और मन ताजा महसूस करता है।
सब्जियों का बसंती पुलाव
क्या चाहिए- बासमती चावल 1½ कप, हरी मटर ½ कप, गाजर (कटी) ½ कप, बीन्स (कटी) ¼ कप, घी 2 बड़े चम्मच, तेजपत्ता 1, लौंग 2, इलायची 2, नमक।
ऐसे बनाएं: इस पुलाव की शुरुआत घी की खुशबू से होती है। घी में साबुत मसाले डाले जाते हैं, ताकि उनकी महक चावल के हर दानों में भी बस जाए। फिर रंग-बिरंगी सब्जियां, गाजर, बीन्स, मटर डालकर हल्का भूनते हैं। भीगे हुए बासमती चावल जब इसमें मिलते हैं, तो उन्हें मसालों और सब्जियों के साथ धीरे से चलाया जाता है। पानी डालकर ढक दें। फिर धीमी आंच पर पकाएं। पकते हुए पुलाव के ढक्कन से उठती खुशबू बताती है कि बसंत थाली में उतर चुका है।
केसरिया मीठे चावल
क्या चाहिए - बासमती चावल 1 कप, घी 2 बड़े चम्मच, चीनी ½ कप, केसर 10-12 धागे, दूध ¼ कप, काजू, बादाम, किशमिश 2-2 बड़े चम्मच।
ऐसे बनाएं: इन चावलों को पहले इस तरह पकाया जाता है कि हर दाना खिला रहे। अलग से केसर को गुनगुने दूध में भिगोकर रखें। कड़ाही में घी गरम कर चावल डालें। फिर केसर वाला दूध और हल्की सी मिठास मिलाई जाती है न ज्यादा, न कम। इसके बाद धीमी आंच पर चावल को हल्के हाथ से चलाया जाता है, ताकि वे टूटें नहीं। ऊपर से ड्राई फ्रूट, मेवे डालकर बस एक-दो मिनट तक रखें। यह मिठाई नहीं, बल्कि बसंत का कोमल मीठा पुलाव है, जो भोजन के बाद भी भारी नहीं लगता।
- लेखिका खानपान विषयों की जानकार हैं।

