मकर संक्रांति का पर्व हमारी दिनचर्या में बदलाव लेकर आता है वहीं यह सेहत के लिए भी कई सन्देश लिए है। सूर्य के उत्तर दिशा में जाने से दिन बड़े होने लगते हैं। इस मौके पर पतंग उड़ाने के साथ धूप सेवन का लाभ जुड़ा है। सूर्य की किरणों से सेरेटॉनिन का स्राव बढ़ता है जिससे तन-मन खिल उठते हैं। वहीं इस मौके पर खाए जाने वाले तिल व गुड़ आदि पौष्टिकता से भरपूर हैं।
मकर संक्रांति केवल एक पारम्परिक त्योहार भर नहीं है। यह सामाजिक समरसता, मेलजोल और मदद के उन मानवीय भावों से जुड़ा उत्सव है, जिनकी आज के बिखरते भरोसे के परिवेश में बहुत अधिक दरकार है। अहम यह भी है कि सेहत बनाने और संवारने का पाठ भी पढ़ाता है। हालिया बरसों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने के मायने हमने अच्छे से समझ लिए हैं। परंपरागत खान पान और अच्छी जीवनशैली का महत्व भी अब और गहराई से समझ आया है। ऐसे में मकर संक्रांति जैसे पर्व से जुड़ी हमारी मान्यताएं स्वास्थ्य सहेजने वाली है।
सधी दिनचर्या की अहमियत
यह त्योहार ना केवल हमारे रहन- सहन, खान-पान और दिनचर्या में बदलाव लेकर आता है बल्कि सेहत के लिए भी कई सन्देश लिए है। गुनगुनी धूप वाली इस रुत में हमारी दिनचर्या ही बदल जाती है। यह पर्व प्रकृति के ज़रिये स्वास्थ्य को सहेजने की सीख देता है। मकर संक्रांति पर सूर्य के उत्तर दिशा में जाने से दिन बड़े होने लगते हैं और इसी के साथ वसंत ऋतु का भी आगमन होता है। मकर-संक्रांति से प्रकृति भी करवट बदलती है। जो सर्दियों के बाद ऊर्जा से भरी दिनचर्या की ओर लौटने का समय होता है। ऊर्जा और उजास का यह पर्व के बदलाव संग सामंजस्य बनाए हुए अनुशासित जीवन जीने की सीख देता है। आज वैज्ञानिक अध्ययन और चिकित्सकों की सलाह भी मन और तन दोनों की सहेजने के लिए सधी दिनचर्या को सबसे जरूरी बताते हैं।
धूप की जरूरत पर ध्यान
इस पर्व पर पतंग उड़ाने की परंपरा है। यह केवल मनोरंजन भर नहीं है। पतंग उड़ाने की यह रीत सेहत से भी जुड़ी है। खुले आसमान तले छत पर पतंग उड़ाना और सूर्य की किरणों का सीधे हमारे शरीर के संपर्क में आना भी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद है। अब तो वैज्ञानिक भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि धूप में बैठने से शरीर को विटामिन डी मिलता है। कई तरह के कीटाणु ख़त्म होते हैं और मन भी अवसाद से दूर रहता है। नींद अच्छी आती है। ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है। जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह प्राकृतिक उजास समग्र जीवन को संवारती है। मनोभावों में संतुलन लाती है। अवसाद और थकान को दूर कर ऊर्जावान जीवचर्या से जोड़ती है। मौजूदा जीवनशैली में कई व्याधियां तो केवल धूप की कमी के कारण ही जड़ें जमा रही हैं।
मानसिक सेहत का ख्याल
सर्दियों का मौसम एक ठहराव लाता है। जिसमें मन अनमना सा रहता है। संक्रांति पर्व से मौसम का बदलाव और खिली धूप की रंगत मन को सुकून देती है। यही वजह है कि पर्व मन की सेहत को बेहतर बनाने वाला भी है। उत्तरायण में सूर्य के होने से व्यक्ति में नई ऊर्जा का संचार होता है। इस समय खिली धूप से मन को सकारात्मकता की उजास मिलती है। सूरज की किरणें पड़ने पर अच्छा महसूस कराने वाले हार्मोन, सेरेटॉनिन और एंडोर्फिन का स्राव बढ़ता है। जिससे हमारे मन को खुशनुमा अहसास की सौगात मिलती है।
खानपान से जुड़ी इम्यूनिटी
देश में भर में लोग मकर संक्रांति के त्योहार पर तिल, मूंगफली, गुड़, चावल और उड़द की दाल जैसी चीज़ों का सेवन करते हैं। इन सभी चीज़ों में सबसे ज़्यादा महत्व तिल को दिया जाता है। जो शरीर को निरोग रखता है। मकर संक्रांति के पर्व पर जिन चीज़ों को खाने में शामिल किया जाता है, वे पौष्टिक होने के साथ ही साथ शरीर को ऊर्जा देने वाले भी हैं। इस पर्व पर खायी जाने वाली लगभग सभी चीज़ें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली हैं। सेहतमंद रहने के मोर्चे पर भी यह त्योहार बहुत महत्वपूर्ण है।
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